शांत बगीचे में अनिल और मकान मालिक की रहस्यमयी बातचीत

शांत बगीचे में अनिल और मकान मालिक की रहस्यमयी बातचीत

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

अनिल उस रहस्यमयी लड़की के बारे में जानने की कोशिश करता है।

अनिल पूरी रात उस लड़की के बारे में सोचता रहा। उसका चेहरा उसके दिमाग में घूम रहा था। उसने सोचा कि वह ज़रूर कोई भूतनी होगी, क्योंकि कोई आम लड़की ऐसा क्यों करेगी? 

वह जनता  था कि उस घर में सिर्फ़ एक अधेड़ उम्र का जोड़ा रहता था और उनकी दोनों बेटियाँ शादी के बाद घर छोड़कर चली गई थीं। उसने फिर बगीचे की ओर देखा। वह एकदम शांत था। सूरज की रोशनी सभी फूलों और पौधों पर पड़ रही थी। फिर उसने घास को ध्यान से देखा; उसे किसी लड़की की आकृति का निशान नहीं दिखा। “शायद वह  भूत ही थी ।” उसने धीरे से कहा l 

उसने कुछ जानने के लिए उस घर जाने का फ़ैसला किया।

दोपहर में उसने उनका दरवाज़ा खटखटाया। बुज़ुर्ग आदमी ने दरवाज़ा खोला और कहा, “अंदर आ जाओ अनिल। कैसे हो? बहुत दिनों से तुम्हें यहाँ नहीं देखा।”

“नमस्ते चरण अंकल। मुझे दूसरे शहर में काम मिल गया है। मैं कल सुबह ही आया हूँ। आप और आंटी कैसे हैं?” अनिल ने विनम्रता से कहा।

“मैं तो ठीक हूँ, लेकिन आंटी की तबीयत अभी ठीक नहीं रहती ,” चरण ने कहा। वह थोड़ा परेशान लग रहे थे।

“अंकल, कल रात मैंने आपके बगीचे में कुछ अजीब देखा। मुझे लगा कि वहाँ कोई था। मैं  देखने आया था कि आप ठीक हैं।” अनिल ने पूछा। उसकी नज़रें बगीचे पर थीं।

“बेटा, ज़रूर कोई बिल्ली या खरगोश होगा। आजकल यहाँ उनकी बहुत भरमार है। कभी-कभी वे हमें परेशान भी करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी कुछ चुराया नहीं।” वह मुस्कुराया। 

अनिल ने देखा कि चरण को कोई चिंता नहीं थी। फिर उसने कहा, “बेटा, हमारे पास यहाँ है ही क्या? हम घर में कोई कीमती चीज़ नहीं रखते।”

अनिल जानता था कि वह आदमी अमीर है और शहर के अंदर और बाहर उसकी कई संपत्तियां हैं।

“अंकल, यह अच्छी बात है। लेकिन मुझे नहीं पता कि वहाँ बिल्ली थी या कोई आदमी; कल रात मुझे बस कुछ साये दिखे थे। शायद आप सही कह रहे हैं।” अनिल ने सोचा कि अभी कुछ भी बताना ठीक नहीं होगा। 

वह उस बूढ़े आदमी के जवाब से संतुष्ट नहीं था। उसे लगा कि वह कुछ छिपा रहा है, लेकिन वह इस राज़ का पता लगाकर रहेगा। वह अपने घर वापस आ गया।

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