अनिल और नौकरानी की बातचीत - रानी का आकर्षण
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
अनिल अपनी पड़ोस की लड़की से मिलता है।
शाम का समय था। आसमान में हल्की लालिमा थी और घर के बाहर ठंडी हवा चल रही थी। अनिल अपने कमरे में बैठा उस रहस्यमयी लड़की के बारे में सोच रहा था, जिसे उसने कई रातों से बगीचे में देखा था। उसके मन में सवाल ही सवाल थे—वह कौन है, कहाँ से आती है, और चाँदनी में ही क्यों दिखाई देती है?
उसी समय दरवाज़ा धीरे से खुला। लगभग पच्चीस साल की एक लड़की चाय की ट्रे लेकर अंदर आई। अनिल ने उसे देखा और चौंककर पूछा, “तुम कौन हो?”
लड़की मुस्कुराई। “मैं रानी हूँ। आपकी माँ ने मुझे मदद के लिए बुलाया था । मैं पास की वाली गली में रहती हूँ।”
अनिल ने हँसते हुए कहा, “अरे, मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा। और सच कहूँ तो… अपने कमरे में पहले इतनी खूबसूरत लड़की भी नहीं देखी।”
दोनों हल्के से हँस पड़े। “आओ, बैठो,” अनिल ने कहा।
रानी उसके पास बैठ गई। दोनों चाय पीने लगे।
कुछ देर बाद अनिल ने पूछा, “रानी, क्या तुम उस बूढ़े आदमी चरण को जानती हो, जो हमारे घर के बगल में रहता है?”
रानी का चेहरा अचानक गंभीर हो गया। वह कुछ पल चुप रही, फिर बोली, “हाँ… मैं उन्हें जानती हूँ। एक दिन उन्होंने मुझसे मदद माँगी थी, क्योंकि उनकी पत्नी बीमार थीं। मैं उनके घर गई थी… लेकिन वहाँ मुझे बहुत अजीब लगा। सच कहूँ तो, मुझे वहाँ जाने से डर लगता है।”
अनिल ने उत्सुकता से पूछा, “डर? कैसा डर?”
रानी ने कंधे उचकाए। “मुझे नहीं पता… बस माहौल अजीब था। जैसे घर में कोई छुपा हुआ राज़ हो।”
अनिल ने सिर हिलाया। “अच्छा… ठीक है। तो आजकल तुम क्या कर रही हो?”
रानी ने कहा, “कुछ खास नहीं। बस अपने माता‑पिता की देखभाल कर रही हूँ। मैं नौकरी करना चाहती हूँ, लेकिन सोचती हूँ कि अगर मैं काम पर चली गई, तो मेरे माता‑पिता की देखभाल कौन करेगा?”
अनिल मुस्कुराया। “रानी, तुम सही कह रही हो। मुझे भी यही समस्या है। मैं शहर में काम करता हूँ, इसलिए मेरे माता‑पिता को यहाँ अकेले रहना पड़ता है।”
रानी ने मज़ाक में कहा, “आप तो शादी कर सकते हैं, अनिल जी… लेकिन मैं क्या करूँ?”
अनिल हँस पड़ा। “तुम भी शादी क्यों नहीं कर लेती?”
रानी ने गंभीर होकर कहा, “मुझे ऐसा आदमी चाहिए जो मेरे माता‑पिता की मदद करने को तैयार हो।”
अनिल ने पूछा, “रानी, तुम किस तरह का काम ढूँढ रही हो?”
रानी मुस्कुराई। “अगर अच्छे पैसे मिलें… तो मैं कोई भी काम कर सकती हूँ।”
अनिल ने उसकी आँखों में देखा। कुछ पल के लिए दोनों की नज़रें एक‑दूसरे में अटक गईं। जैसे वे बिना बोले एक‑दूसरे की सोच समझ रहे हों।
रानी उठी और बोली, “मुझे जाना होगा, अनिल जी। मैं कल फिर आऊँगी।”
वह चाय के खाली कप लेकर बाहर चली गई। अनिल उसे जाते हुए देखता रहा l