रहस्यमयी लड़की फिर से बगीचे में।अनिल की बेचैनी बढ़ी
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
अनिल ने उस रहस्यमयी लड़की को फिर से देखा, लेकिन चाँद की रोशनी कम होते ही वह गायब हो गई।
रात धीरे‑धीरे गहराती जा रही थी। अनिल अपने बिस्तर पर लेटा था, लेकिन उसकी आँखों में नींद नहीं थी। आसमान में चाँद बादलों के पीछे छिपा हुआ था, और पूरे मोहल्ले में अजीब‑सी खामोशी फैली हुई थी।
अनिल ने खिड़की से बाहर झाँका। बगीचा पूरी तरह अंधेरे में डूबा हुआ था—न कोई आवाज़, न कोई हलचल। वह फिर से बिस्तर पर लेट गया और सोचते‑सोचते कब नींद में चला गया, उसे पता ही नहीं चला।
करीब एक बजे उसकी आँख अचानक खुल गई। उसने देखा कि बादल हट चुके थे और चाँद फिर से चमक रहा था। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वह तुरंत उठकर खिड़की के पास गया और धीरे से बाहर देखा।
और फिर… वह हैरान रह गया। उसका पूरा शरीर काँपने लगा।
बगीचे में वही लड़की फिर से दिखाई दी— ठीक उसी जगह, उसी मुद्रा में, जैसे पिछली रात। चाँदनी उसके आसपास फैल रही थी, और वह चुपचाप घास पर लेटी हुई थी, जैसे किसी अदृश्य शक्ति का इंतज़ार कर रही हो।
अनिल की साँसें रुक‑सी गईं। वह कुछ देर तक उसे देखता रहा। फिर अचानक काले बादल चाँद के सामने आ गए। जैसे ही चाँद की रोशनी गायब हुई, लड़की उठी और पौधों के पीछे अंधेरे में चली गई। वहाँ इतना अंधेरा था कि अनिल उसे देख भी नहीं पाया।
अनिल के मन में एक ही बात घूमने लगी— लड़की और चाँद की रोशनी के बीच कोई गहरा संबंध है।
उसने सोचा, “जब तक चाँद दोबारा नहीं निकलेगा, वह लड़की भी नहीं आएगी।”
वह वापस बिस्तर पर आ गया, लेकिन बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उसने खुद से फुसफुसाकर कहा, “वह ज़रूर कोई भूत होगी… भला कोई आम लड़की चाँदनी के साथ ऐसा रिश्ता कैसे रख सकती है?”
वह जानता था कि अगर उसने यह बात किसी को बताई, तो लोग उसे पागल समझेंगे। लेकिन उस लड़की की मौजूदगी ने उसकी रातों की नींद छीन ली थी। वह सच जानने के लिए बेताब था।
कुछ देर बाद चाँद फिर से बादलों के पीछे से निकला। अनिल तेजी से खिड़की की ओर भागा।
और जैसे उसने सोचा था— लड़की फिर से वहीं लेटी हुई थी।
अनिल के मन में अचानक एक विचार आया— क्यों न क्या वह नीचे जाकर उससे बात करे?
लेकिन अगले ही पल उसके भीतर एक अजीब‑सा डर उठ खड़ा हुआ। अगर वह सचमुच कोई भूत हुई तो?
कुछ मिनट बाद लड़की फिर उठी और पौधों के पीछे अंधेरे में गायब हो गई। इस बार अनिल को पूरा यकीन हो गया—
वह लड़की इंसान नहीं हो सकती। अगर वह असली होती, तो दरवाज़े से बाहर आती… अंधेरे में यूँ गायब नहीं होती।