मिरी का सैंडी अंकल

मिरी का सैंडी अंकल

श्रेणी: जबरदस्ती सेक्स

पढ़ने का समय: 10 मिनट | शब्द: 1375

इस वयस्क कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक भरोसेमंद दोस्त अविश्वसनीय बन जाता है और स्थिति का फायदा उठाता है।

   मंजू चालीस साल की एक स्कूल टीचर थी, वह अपनी बेटी मिरी के साथ रहती थी l  मिरी अठारह साल की खूबसूरत लड़की थी l मंजू का ऐक खूबसूरत परिवार था l उसका पति बैंक मैनेजर थे l वे आमतौर पर अपनी छुट्टियाँ हिल स्टेशन पर बिताते थे। 

कुछ साल पहले वे छुट्टियों से वापस आ रहे थे, उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया था । उसके पति की मृत्यु हो गई, वह और उसकी बेटी बच गईं लेकिन मिरी के सिर पर चोट आई l वह अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी l कभी-कभी उसे केवल एक या दो घंटों के लिए ही कुछ याद रहता था । लेकिन ऐसा बहुत कम होता था l वह सामान्य जीवन जीती थी और अपनी उम्र की अन्य लड़कियों की तरह रहती थी l उसके जीवन में कुछ भी कम नहीं था l

बहुत लड़के अब भी उसे पसंद करते थे l उसके सेक्सी शरीर को पाने  की  बात करते थे, वह बहुत खूबसूरत थी, उसके लंबे बाल,मोटे स्तन  और गोलनितंब सब को आकर्षित करते थे । वह अभी तक कुंवारी थी l

एक लड़का, उसका नाम जॉनी था, हमेशा उसके करीब आने की कोशिश करता था, वह पहले उसका सहपाठी था l लेकिन मिरी को उसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी l

मंजू का अब बॉयफ्रेंड था l  उसका नाम सैंडी था, वह पैंतालीस साल का था और ऑफिस में काम करता था l  उसे मंजू बहुत पसंद थी l मंजू का शरीर अबी भी खूबसूरत था l  सैंडी हमेशा उसके स्तनों और कसी हुई योनि  की तारीफ करता था । मंजू हमेशा कहती थी “उसकीयोनि  टाइट नहीं, लेकिन तुम्हारा लिंग  इतना बड़ा है, इसके लिए हर योनि टाइट है l”

कभी कभी वह उनके घर आता था । वह हमेशा मिरी के लिए ढेर सारे उपहार लाता था । वह उसे पसंद करती थी और हमेशा सैंडी अंकल कहती थी l मंजू ने पहले ही उसे जॉनी के बारे में बताया था जो मिरी को फॉलो करता था l मंजू भी उसे पसंद नहीं करती थी l

एक दिन, मंजू ने देखा कि इस लड़के की गतिविधियाँ उसके घर के आसपास बढ़ रही थी l  वह डर गई और  उसने सैंडी से बात की, पूछा कि क्या वह कुछ दिनों के लिए उनके घर पर रह सकता है l वह मंजू को मना नहीं कर सकता था l  वह सहमत हो गया, मंजू भी खुश थी, वह उसके साथ अधिक समय बिता सकती थी l

सैंडी अपना सामान उनके घर ले आया  वे साथ रहने लगे।

अगली सुबह, मंजू  स्कूल जल्दी चली गई l  सैंडी अभी भी बिस्तर पर था l  मिरी अपने कमरे में सो रही थी। उस लड़के की वजह से वह कुछ दिनों से बेचैन महसूस कर रही थी। वह लगभग आठ बजे उठी, उसने सैंडी को लिविंग रूम में समाचार पत्र पढ़ते देखा l वह पास आई और पूछा, 

“सैंडी अंकल, नमस्ते, आप कब आए”

सैंडी को लगा कि वह उससे पूछने की कोशिश कर रही थी कि वह बेडरूम से कब आया ।

“अभी डिअर “उसने  कहा 

“क्या आप चाय लोगे l” 

“नहीं प्रिय l”

वह रसोई में चली गई l सैंडी नहाने के लिए वॉशरूम में चला गया l  वह लगभग आधे घंटे के बाद वापस आया और लिविंग रूम में बैठ गया  l

मिरी फिर से  लिविंग रूम मे आई  और पूछा ,

“हेलो ,सैंडी अंकल, आप कब आए, क्या आप चाय लोगे l “

सैंडी ने फिर कहा “नहीं प्रिय”

वह  बिना कुछ कहे चली गई l  सैंडी उलझन में था कि वह ऐसा क्यों कर रही थी, तभी उसे उसकी याददाश्त खोने के बारे में याद आया l  वह सोचने लगा कि उसे क्या करना होगा , मंजू तो  चार घंटे बाद आने को थी l  उसने इंतजार करना ठीक समजा l  वह टीवी देखने लगा l फिर उसे याद आया कि मंजू ने उससे कहा था, जब मिरी याददाश्त खोने लगीती थी तो आधे घंटे के बाद  कुछ भी याद नहीं रहता था l

सैंडी सोफे पर बैठा था और टीवी देख रहा  था । मिरी नहाने जा रही थी, वह लिविंग रूम में  कुछ लेने आई l उसके शरीर पर केवल तौलिया था l उसने फिर कहा ,

   “सैंडी अंकल, नमस्ते, आप कब आये,”

सैंडी ने उसकी तरफ देखा। वह एक छोटे से तौलिए में लिपटी हुई थी। उसके आधे स्तन बाहर दिख रहे थे। उसकी टांगें जांघ तक नंगी थीं।सैंडी अपना नियंत्रण खोने लगा। उसका लिंग खड़ा होने लगा।

 “मैं अभी आपसे बात करने आया हूँ,आओ मेरे साथ बैठो डिअर।”

“मैं नहाने जा रही हूँ, हम जल्द ही बात करेंगे सैंडी अंकल।” मिरी ने मुस्कुराते हुए कहा।

“नहीं नहीं मिरी। मुझे अभी बात करनी है, इधर आओ।”

मिरी चुपचाप सोफे पर बैठ गई l उसके काले बाल उसके कंधे पर गिर रहे थे l उसके बड़े स्तनों से तौलिया गिर रहा था। शायद वह इतना कसा हुआ नहीं था। सैंडी धीरे से उसके पास आया  और अपना हाथ उसकी जाँघ पर रखा दिया l 

“क्या बात है सैंडी अंकल?” मिरी ने धीरे से पूछा, 

“आज तुम बहुत खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो, मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।” उसने अपना हाथ उसकी जांघों पर फैलाते हुए कहा।

मिरी  कांप उठी l उसकी साँसें तेज़ चलने लगीं थी , होंठ कांपने लगे, शायद उसे समझ आने लगा था कि सैंडी क्या  क्या चाहता था l वह अब भी चुप थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे। 

सैंडी ने अपना हाथ उसकी पैंटी की ओर बढ़ाया और उसकी योनि को दबाया l

“अंकल प्लीज मुझे मत छुओ” मिरी चिल्लाई।

“मिरी, सिर्फ एक बार, मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है।”

“ नहीं नहीं, मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करना चाहती। मैं बाहर जाना चाहती हूँ।” मिरी चिल्लाई।

सैंडी ने उसे पकड़ लिया और उसके होंठों को चूमने लगा ।

मीरी ने उसे धक्का देने की कोशिश की, इस संघर्ष में उसका तौलिया उसके स्तनों से गिर गया। सैंडी ने तौलिया दूर फेंक दिया और उसके  स्तनों को छूने लगा। मिरी बहुत असमंजस में थी और उसका आधा शरीर नंगा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे।

सैंडी ने उसे पीछे से पकड़ा और बेडरूम में ले गया। उसने उसे बिस्तर पर पटक दिया और उसके हाथ पकड़ लिए। फिर उसने उसका निप्पल अपने  मुंह में डाल लिया  और दांतों से उसे नोचने लगा। 

कृपया रुकें  सैंडी अंकल, मुझे दर्द हो रहा है।”मिरी चिल्लाई।

“ठीक है। अगर तुम मेरी मदद करोगी तो मैं रुक जाऊंगा। नहीं तो मैं तुम्हारे निपल्स को अपने दांतों से काटता रहूंगा।” सैंडी ने गुस्से से चिल्लाते हुए कहा।

“तो आप क्या चाहते हैं?” मिरी फिर  चिल्लाई।

सैंडी ने  योनि पकड़ी और बोला , “मुझे अभी इसकी ज़रूरत है।”

 “नहीं सैंडी, प्लीज़ नहीं।”

 “ठीक है, तुम ऐसे नहीं मानोगी, मुझे तुम्हारे निपल्स को ज़ोर से काटना पड़ेगा।”

“कृपया मेरे स्तन मत काटो। जो चाहो करो, मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी।”

सैंडी ने उसकी  अंडरवियर उतार दी। उसने उसके पैर खोल दिए। उसके सामने एक छोटी सी गुलाबी योनि थी। उसने चाटना शुरू कर दिया। मिरी एकदम शांत थी। उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया। योनि धीरे-धीरे गीली होने लगी। शायद उसे भी आनंद आने लगा था।फिर उसने अपना पायजामा खोला और अपना लिंग बाहर निकाल लिया। मिरी की आंखें चौड़ी हो गईं। उसने पहली बार किसी पूर्ण विकसित पुरुष का लिंग देखा था।

“सैंडी, कृपया मुझे चोट मत पहुँचाओ। तुम्हारा लिंग बहुत बड़ा है। यह माँ के लिए अच्छा है। मैं तो बहुत छोटी हूँ।”

“अंदर जाने के बाद तुम्हें अच्छा लगेगा।”

सैंडी लिंग से योनि को रगड़ने लगा । मिरी का शरीर कांप रहा था। धीरे-धीरे सैंडी ने अपना लिंग अंदर धकेलना शुरू किया। मिरी दर्द से चीख उठी, लेकिन सैंडी ने उसकी चीखों पर ध्यान नहीं दिया और अपना लिंग पूरी ताकत से अंदर धकेल दिया। कुछ ही मिनटों के भीतर सैंडी ने अपना वीर्य उसकी योनि में डाल दिया।

उसने अपना लिंग बाहर निकाला और कहा, “मुझे यकीन है कि तुम्हें मेरा लिंग पसंद आया होगा, मिरी।”

मिरी ने कुछ नहीं कहा, वह एकदम चुप थी। सैंडी ने अपने कपड़े वापस पहने और बैठक में आ गया।

कुछ देर बाद मिरी नहाने चली गई। सैंडी रसोई में चाय बनाने लगा । जब मिरी नहाकर वापस आई तो उसने सैंडी को रसोई में देखा। उसने फिर कहा,

 “सैंडी अंकल, आप कब आए ? आप चाय क्यों बना रहे हैं? मैं बना देती हूँ।”   

सैंडी  मुस्कुराया और बोला, “तुम बहुत अच्छी हो, मिरी।”

यह हमेशा बंद रहता था, दरवाज़ा पुराना था और चाबियाँ लगाने के लिए एक छोटा सा छेद था। अब्दुल ने छेद से  देखा, लड़कियाँ कपड़े बदल रही थीं और स्विमिंग सूट पहन रही थीं।

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