छुट्टियों का पहला दिन
श्रेणी: जबरदस्ती सेक्स
पढ़ने का समय: 10 मिनट | शब्द: 1286
यह वयस्कों के लिए लिखी गई कहानी एक युवा लड़की के विचित्र अनुभव के बारे में है। क्या वह अनुभव वाकई भयानक था या नहीं?
मई का महीना था l स्कूल बंद था । शहर से दूर ऐक छोटे से गाम में मेरे दादा दादी रहते थे l पिता जी ऐक दूसरी शहर में जॉब करते थे l घर महीने मे ऐकबार ही आ पाते थे l मां ने ऐक दिन बोला, “लिली क्योंना कुछ दिन तुम्हारे दादा दादी के पास हो आते है” मुझे सुनकर बहुत अच्छा लगा l बहा की पर्वत, जंगल मुझे बहुत अच्छे लगते थे l
अगले ही दिन सुबह हम चल पड़े,तीन चार घंटे का समय लागत था l रास्ते में ऐक जंगल से होकर जाना पड़ता था l
सड़क पर ट्रैफिक नहीं था और हम जल्दी आगे बढ़ रहे थे,लगता था तीन घंटे मे ही पहुंच जाएंगे l मां गाड़ी चलाते ज्यादा बात नहीं करती थी l
जब हम जंगल से गुजर रहे थे तो अचानक हमारी कार का अगला राइट साइड बाला टाइर पंचर हो गया l गाड़ी थोड़ी जंगल मे गुसगाई l हम कार से निकलें मां को टायर बदलाना तो आता था लेकिन हमारी कार कुछ ऐसे फस गई उसे पहले थकेलना जारूरी था l हम कार को धकेलने की प्रयास कर रहे थे l अचानक दो आदमियों ने हमें पीछे से पकड़ लिया। तीसरा आगे आ कर बोला “चिल्लाई तो टुकड़े कर दुगा,” बड़ा सा चाकू दिखाते मेरी मां से बोला l चाकू देखकर मैं कांपने लगी l चाकू और मेरे बीच कुछ सेंटी की बस दुरी थी l
उस मोटे आदमी ने मुझे बहुत जोर से पीछे से पकड़ रखा था l उस के हाथों मे मेरे दोनों स्तन थे l बह पूरे जोर से दबा रहा था l आज तक किसी भी पुरुष ने मेरे स्तनों को कभी नहीं छुआ था मुझे ऐसा लगा जैसे पूरा खून रुक गया हो l मैं बहुत डरी हुई थी और मुझमें चिल्लाने की हिम्मत नहीं थी।
मेरे नितंब भी बड़े नहीं थे। बो मोटा मेरे से पूरा चिपका हुआ था l उसका लिंग मेरे नितंबों को छू रहा था। मुझे बहुत अजीब लग रहा था। धीरे-धीरे उसका लिंग मेरे नितंबों को और अधिक दबा रहा था। शायद वह सही जगह की तलाश कर रहा था। यह आसान नहीं था क्योंकि मेरी पैंट और पैंटी ने उसके लिंग और मेरे गुदा के बीच एक सुरक्षा दीवार बना दी थी।
तभी चाकू बाला आदमी बोला, “ले चलो इन को झोपड़ी मे ,” बो हमें गसीट कर जंगल के बीच ऐक पुराने से कमरे मे ले गए l उस मोटे आदमी ने मेरे स्तनों को पल बर भी नहीं छोड़ा l
“क्या खाती हो, इस उम्र मे इतने मोटे” उस आदमी ने धीरे से कहा।
“प्लीज मुझे छोड़ दो” मै डर से कांप रही थी l
कमरे मे ऐक पुराना सा बेड था उस पर ऐक कारपेट जैसा कुछ था, मुझे और मां को उन्होंने हमें पुराने बिस्तर पर गिरा लिया l
“आप दोनों समझ गई होंगी कि हम क्या चाहते हैं।” एक आदमी चिलाकर बोला l
मुझे कुछ समज नहीं आ रहा था हमरा सारा सामान, फोन तो गाड़ी मे थे l मैने डरते हुऐ पुक्षा,
“आप क्या चाहते हो?”
एक आदमी मेरी और झुका और मेरी योनि को जोर से पकड़ कर बोला’ “हमे जे चाहिए , मेरे वहाँ जोर से दर्द हुआ,मै चलाने लगी l
“प्लीज मेरी बेटी को छोड़ दो,वह बच्ची है” मां चीलाई!
“छोड़ देता हू, अगर तुम चुप चाप सब अच्छे से करोगी,“ मेरी योनि को छोड़ते हुए उसने कहा।
दूसरे आदमी ने मेरी मां के स्तनों को बाहर खींचा और चुपने लगा और मां की योनि को छूने लगा l
कमरा आ .. आ , की अबाज से भर गया l
मै चुपचाप देख रही थी। उस मोटे आदमी के हाथ अभी भी मेरे स्तनों पर थे। अब वह उन्हें जोर से नहीं दबा रहा था। मेरी योनि में अभी भी दर्द हो रहा था। उस आदमी ने उसे बहुत जोर से दबाया था।
फिर चाकू बाले आदमी ने मा की सलवार और अंडरवियर उतार दी l मां की योनि पर एक भी बाल नहीं था। शायद उसने आज सुबह शेव किया होगा।, वह जोर से चमक रही थी l मां ने तेल से मालिश भी की थी। मुझे ऐसा लगता था जैसे मां को पहले से ही पता था कि आज क्या होने वाला है। मेरी योनि तो पूरी तरह से बालों से ढकी हुई थी। मैंने कभी शेव नहीं की थी। जब उस आदमी ने मेरी योनि को पकड़ा, मुझे नहीं पता कि बालों ने मदद क्यों नहीं की।
फिर उस ने अपना पजामा भी उतारा दिया l मेरी आँख खुली की खुली रह गई l क्या वो इतना बड़ी भी हो सकता है, मेने कभी सोचा ना था l दरअसल, मैंने कभी किसी वयस्क पुरुष का लिंग नहीं देखा।
मां ने मेरी तरह देख कर उस आदमी से बोला,”मेरी बेटी को बाहर बेज दो”
उस की आँखो मे अजीब चमक थी,डर तो नाजाने कहा उड़ गया था l
मुझे कमरे के बाहर बैठने को कहा और बोला कुछ ग़लत किया तो तुम्हारी मां को मार देगे l मैं कमरे से बाहर निकली और दरवाजे के पास बैठ गई।
मैं अब भी उस विशाल लिंग के बारे में सोच रही थी। अगर वह उसे मेरी योनि में डालता, तो वह मेरे स्तनों तक पहुँच जाता।
अंदर से आ.. आ.. जोरसे .. जोर से डालो आवाज आ रही थी l मैं सोच रही थी, अब क्या होगा माँ की योनि का? अगर उन सभी पुरुषों के लिंग का आकार इतना बड़ा है, तो माँ की योनि हमेशा के लिए गई। अगर माँ के बाद मुझे पकड़ लिया तो क्या होगा? यह धरती पर मेरा आखिरी दिन हो सकता है।
मैने थोड़ा छिप कर कमरे मे देखा,तीनो आदमी काम पर थे l मां बहुत प्यार से चाकू बाले की लिंग मुँह मे डाल रही थी l ऐक लिंग योनि मे तो दूसरा नितंबों मे था l कहीं भी कोई डर नहीं था। माँ तीन लिंगों के साथ आनंद ले रही थी। मैंने सोचा कि मेरी माँ का शरीर कितना मजबूत है। फिर मैंने सोचा, शायद माँ इसलिए चुप है क्योंकि वह मेरी रक्षा करना चाहती है।
जे सब देख कर मेरा ड़र भी ना जाने कहा चला गया l कमरे से अब भी आ .. आ .. और तेज.. और तेज.. की अबाज आ रही थी l ना जाने मन मे ऐसा बिचार कहा से आने लगा, लिंग को चाटने का l क्यों ना उस बड़ी लिंग को मूँह मे मैं भी डालू, “नहीं नहीं” मां क्या बोलेगी, अगर उन्होने नीचे डाल दिया तो l दो घंटे ऐसे सोचते ही गुज़र गया, कमरे से अबाजे अत्ती रही l
फिर मां कमरे से बाहर आई। वह एकदम परिपूर्ण लग रही थी। उसकी आंखें चमक रही थीं, चेहरा ऐसा लग रहा था मानो उसे लंबे समय से जो चाहिए था वह मिल गया हो।
“बेटी, सब ठीक है। चलो अपनी कार में चलते हैं। वे अब हमें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।” मां ने कहा l
जब हम कार के पास पहुंचे, तो वह मोटा आदमी वहां खड़ा था। मैं फिर से डर गई। कहीं वह फिर से मेरे स्तन और योनि को न पकड़ ले।
मोटा जो गाड़ी के पास खड़ा था बोला “मेने टाइर बदल दिआ है” उस ने मुझे पानी का बोतल भी दिया l
मां ने उस तरफ देखते बोला, “हम रविवार वापस जाऐगे जहाँ से,” मुझे कुछ समझ नहीं लगा l
गाड़ी मे बैठ कर मां ने फ़ोन देखा, “ओह! तुम्हारे पिताजी की मिस कॉल है ,” मां पिताजी को फ़ोन पर बोली हम गाड़ी का टायर बदले मे व्यस्त थे और मेरी तरफ मुस्कराते हुऐ देखा l
हमारी गाड़ी तेज़ी से आगे बड़ने लगी l मै अब भी सोच रही थी मां ने गुंडों को हमारी बापस आने का क्यों बोला l
सैंडी सोफे पर बैठा था और टीवी देख रहा था । मिरी नहाने जा रही थी, वह लिविंग रूम में कुछ लेने आई l उसके शरीर पर केवल तौलिया था l