अली का वादा — और सायरा का नया फैसला
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
सायरा जानती थी कि अली इतनी आसानी से शांत नहीं बैठेगा।
वह समझ चुकी थी कि अली किसी न किसी तरह उसे फिर परेशान करने की कोशिश करेगा। इसलिए वह हर दिन सतर्क रहती थी— कभी उसकी आवाज़ से डर जाती, कभी उसके कदमों की आहट से घबरा जाती।
लेकिन अब वह पहले जैसी कमजोर नहीं थी। वह अपने मन को संभालना सीख रही थी।
एक शाम, जब सायरा अपने कमरे में पढ़ रही थी, अली अचानक दरवाज़ा खटखटाकर अंदर आया।
उसके चेहरे पर अजीब‑सी गंभीरता थी। सायरा ने किताब बंद कर दी और शांत होकर उसकी तरफ देखा।
अली बोला,
“सायरा… अगर तुम मेरी मदद करोगी, तो मैं तुम्हें दोबारा कभी परेशान नहीं करूँगा। यह मेरा वादा है।”
सायरा ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
“ठीक है। मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ… लेकिन तभी, जब मुझे लगे कि तुम्हारी सोच सच में सही और ईमानदार है।”
अली ने गहरी साँस ली और बोला,
“सायरा, जैसा कि मैंने पहले भी कहा था…
मुझे तुम्हारी दोस्त लीना पसंद है। मैं सिर्फ़ उसके साथ रिश्ता नहीं बनाना चाहता— मैं उससे शादी करना चाहता हूँ।
मुझे पता है कि सिर्फ़ तुम ही मेरी मदद कर सकती हो।”
सायरा कुछ पल चुप रही।
फिर उसने बहुत शांत आवाज़ में कहा,
“हाँ, मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ। लेकिन पहले तुम्हें खुद को बदलना होगा। तुम्हें अपनी बुरी आदतें छोड़नी होंगी,
लोगों को परेशान करना बंद करना होगा, और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना होगा। तभी मैं लीना से तुम्हारे बारे में बात कर सकती हूँ। अभी बात करने का कोई फ़ायदा नहीं है— क्योंकि न वह मानेगी,और न उसके माता‑पिता।”
अली ने तुरंत कहा,
“मैं लीना के लिए सब कुछ करूँगा। मैं वादा करता हूँ कि मैं वही करूँगा जो तुम कहोगी।”
सायरा ने पहली बार महसूस किया कि अली की आवाज़ में सचमुच बदलाव था। शायद वह पहली बार किसी बात को गंभीरता से ले रहा था।
इसके बाद अली ने अपना वादा निभाना शुरू किया।
वह धीरे‑धीरे खुद को बदलने लगा— क्लास में ध्यान देने लगा, लोगों से ठीक तरह बात करने लगा, और सायरा को परेशान करना बिल्कुल बंद कर दिया।
अली और लीना एक ही क्लास में थे। धीरे‑धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी।लीना को भी लगा कि अली अब पहले जैसा नहीं रहा।
सायरा दूर से यह सब देखती रही—
थोड़ी हैरान,
थोड़ी राहत महसूस करती हुई।
लेकिन उसे पता था कि कहानी यहाँ खत्म नहीं होती।
कभी‑कभी बदलाव के पीछे भी एक नया रहस्य छिपा होता है।