स्टिकर इकट्ठा करने की दीवानी परी

स्टिकर इकट्ठा करने की दीवानी परी

श्रेणी: जवानी की गलतियां

पढ़ने का समय: 5 मिनट | शब्द: 532  

   परी की एक शांत, कल्पनाशील लड़की थी। उसे रंग-बिरंगे स्टिकर इकट्ठा करने का शौक था—फूल, तारों, दिलों और प्यारे कार्टूनों से भरा उसका एल्बम उसकी सबसे कीमती चीज़ थी। 

अब वह कॉलेज में थी, लेकिन उसका शौक अभी भी वही था। एक दिन लंच ब्रेक में, जब वह अपने दोस्तों से बातें कर रही थी, तभी उसकी मुलाकात आरव से हुई—इतिहास का छात्र, जिसे पुरानी तस्वीरें और पोस्टकार्ड इकट्ठा करने का शौक था। दोनों की रुचियाँ अलग थीं, पर संग्रह करने का जुनून एक जैसा। यही बात उन्हें जल्दी दोस्त बना गई।

एक दिन आरव ने मुस्कुराते हुए कहा,
“मुझे कुछ बहुत खास स्टिकर मिले हैं। मुझे लगता है, तुम्हें बहुत पसंद आएंगे। मैं उन्हें एक जगह इकट्ठा कर रहा हूँ… जल्द ही दिखाऊँगा।”

परी उत्साहित हो गई, लेकिन हर बार पूछने पर आरव हँसकर कह देता, “अरे, आज फिर भूल गया!”

आख़िर एक दिन परी ने मज़ाक में कहा,
“अगर तुम बार-बार भूलते रहोगे, तो मैं खुद ही तुम्हारे घर आकर देख लूँगी।”

आरव ने तुरंत कहा, “तो फिर कल ही आ जाओ।”

अगले दिन परी उसके घर पहुँची। वे कमरे में फर्श बैठे  गए और आरब  ने उसे कई खूबसूरत स्टिकर दिखाए। परी को इस तरह के स्टिकर चाहिए थे, लेकिन उसके पास कभी इतने पैसे नहीं होते थे। आरब  ने उसे अपना फोटो एल्बम भी दिखाया। परी उसके कलेक्शन में बिकिनी पहनी लड़कियों की तस्वीरें देखकर दंग रह गई। 

उसने पूछा, “क्या तुम को  इस तरह की तस्वीरें भी पसंद हैं?”

“हां, मुझे तस्वीरें देखना पसंद है क्योंकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।” आरब हंसा l 

परी हंसते हुए बोली, “अगर मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड बन जाऊं तो क्या मैं वो सारे स्टिकर अपने पास रख सकती हूं?”

“पहले तुम्हें बिकिनी पहननी होगी, फिर मैं तुम्हें बताऊंगा ।” 

“मुझे शर्म आ रही है, मैं तुम्हारे सामने नहीं पहन सकती।”

“ ठीक है, रहने दो परी। मुझे खुशी है कि तुम मेरे घर आई हो।” लेकिन परी स्टिकर के बिना जाना नहीं चाहती थी, उसने कहा, “ठीक है, मैं पहन लूंगी अगर तुम किसी को नहीं बताओगे।”

“चिंता मत करो, मैं किसी को नहीं बताऊँगा।” 

“ठीक है, क्या तुम्हारे पास कोई बिकनी है जो मैं पहन सकूँ?”

 “नहीं, लेकिन अगर तुम अपनी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार दो, तो तुम बिकनी मे ही  लगोगी।” परी समझ गई कि वह उसे ब्रा और अंडरवियर में देखना चाहता है। उसने दरवाजा बंद करने को कहा। आरब ने वैसा ही किया। उसने अपनी शर्ट का पहला बटन खोला और फिर रुक गई। 

“आरब, मुझे शर्म आ रही है। क्या यह सही है?” 

“हाँ, आगे बढ़ो। मुझे देखो। आरब ने अपनी शर्ट उतार दी और कहा, देखो, कुछ नहीं हुआ।”

परी ने एक और बटन खोला और फिर रुक गई। आरब समझ गया , उसने उसका हाथ पकड़ा और उसकी कमीज़ के बटन खोलने लगा। परी अवाक होकर उसकी बाहों में गिर पड़ी। आरब ने मौका देखकर उसकी टी-शर्ट खोली और फिर ब्रा का हुक भी। उसने अधनंगी परी को फर्श  पर लिटाया, परी ने उसे नहीं रोका। उसने उसकी स्कर्ट ऊपर उठाई और उसके अंडरवियर उतार दिए। उसे जोश से चूमने लगा । तभी परी जोर से चिल्लाई और उनके शरीर एक हो गए।

उसने कुछ स्टिकर के लिए अपनी जिंदगी की सबसे कीमती चीज दे दी।

उसकी कमीज गीली थी, जिससे उसकी गोरी त्वचा दिख रही थी। गीले कपड़ों की वजह से वह  शर्म  रही थी। उसने रानी के भाई से कुछ नहीं कहा।

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