कोई सुन रहा था , जीजू और सलीजी की रोमांटिक बातें

कोई सुन रहा था , जीजू और सलीजी की रोमांटिक बातें

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

जीजू और सालीजी की अपने भविष्य के बारे में बातचीत।

जब सब लोग चले गए ,दरवाज़ा बंद करते ही जीजू ने एक लंबी सांस ली।
उन्होंने धीरे से सालीजी को आवाज़ दी।

सालीजी अपने कमरे से बाहर आईं।
उनकी आँखों में हल्की घबराहट थी, लेकिन चेहरे पर उत्साह भी साफ दिख रहा था।
जैसे ही वह पास आईं, जीजू ने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया।

“सालीजी… मुझे लगता है कि हमें किसी और जगह मिलना चाहिए,” जीजू ने धीमी आवाज़ में कहा।

सालीजी ने तुरंत सिर हिलाया। “हाँ जीजू, सही कह रहे हैं। चलिए चाय पीते हैं और बातें करते हैं। यहाँ हम और कुछ नहीं कर सकते।” वह हल्के से मुस्कुराईं।

जीजू ने भी मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, अपना घर बसाने से पहले हमें कोई सुरक्षित जगह ढूँढनी होगी।”

सालीजी ने उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “जिजू… मैं चाहती हूँ कि हम जल्द ही कोई जगह तय कर लें।
मुझे अगले हफ़्ते अपने घर जाना है।
माँ आ रही हैं। मैं आपके बिना कहीं नहीं जाना चाहती… अपने घर भी नहीं।”

जीजू ने उनका हाथ थाम लिया। “सालीजी, मैं भी आपके साथ रहना चाहता हूँ। मैं अपनी अर्थहीन शादी से बहुत थक चुका हूँ। सच कहूँ तो… आपकी बहन और मैं कभी एक‑दूसरे को समझ ही नहीं पाए।”

सालीजी ने शांत आवाज़ में कहा, “मुझे पता है जीजू।
वह मेरी बहन है, लेकिन वह आपके लिए सही नहीं है।
आप दोनों बस निभा रहे हैं… जी नहीं रहे।
उसे भी कोई ऐसा मिल सकता है जो उसे समझे।”

जीजू ने गहरी सांस ली। “कुछ फैसले बहुत कठिन होते हैं… लेकिन हमें लेने ही पड़ते हैं।”

सालीजी ने कहा, “मुझे लोगों की बातों की परवाह नहीं है। हमें अपनी जिंदगी के बारे में सोचना चाहिए।
दुनिया बहुत बड़ी है—हम कहीं भी जाकर अपनी तरह से जी सकते हैं।”

जीजू ने उनका हाथ कसकर पकड़ा। “अगर आपकी बहन बात नहीं कर पा रही, तो मैं करूँगा।
मैं आपके साथ नई जिंदगी शुरू करना चाहता हूँ।”

सालीजी ने भावुक होकर जीजू को चूमा। उसी समय उन्हें बाहर किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
दोनों एकदम चुप हो गए।

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