जब सालिजी कॉलेज से जल्दी आ गईं - जीजू की उम्मीदें।
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
बेडरूम में जीजू और सालीजी की बातें।
दोपहर का समय था । मेहमानों के जाने के बाद घर फिर से शांत हो गया। जीजू अपने बिस्तर पर आराम कर रहा था , लेकिन उसका मन शांत नहीं था। वह जानता था कि साली जी जल्द ही आने वाली हैं, लेकिन उसे यह पता नहीं था कि साली जी आज क्या करने बाली हैं। मन में पिछली रात की वे बातें बार-बार गूंज रही थीं, जिन्हें याद करके वह मुस्कुरा रहा था । आज का वातावरण कुछ अलग था , जैसे कोई अनकही इच्छा हवा में तैर रही हो।
तभी सालीजी कमरे में दाखिल हुईं, अपना सामान एक तरफ रखा और बिना किसी हिचकिचाहट के उनके बगल में बिस्तर पर लेट गईं। उनकी देहभाषा से स्पष्ट था कि उन्हें पिछली रात की बातें न केवल याद थीं, बल्कि वे उस सिलसिले को आगे बढ़ाना चाहती थीं।
उन्होंने धीरे से करवट ली और अपना एक हाथ और पैर जीजू के ऊपर रख दिया, जिससे कमरे की हवा में एक नई गर्माहट घुल गई। “चलो कुछ बात करते हैं, जीजू,” उसने धीमी आवाज में कहा।
जीजू ने मजाक में जवाब दिया कि ऐसी स्थिति में भला बात करने का मन किसका करेगा, जिस पर सालीजी ने उनकी छाती पर धीरे से हाथ फेरते हुए कहा, “मैं पूरी तरह तैयार हूँ। मुझे अपनी बाहों में भरिए और जो चाहे कीजिए। मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी, यह मेरा वादा है।”
जीजू ने गंभीरता से पूछा कि क्या वे वाकई इस रिश्ते को एक नई दिशा में ले जाना चाहती हैं।
सालीजी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और कहा, “जीजू, मैं आपके साथ आगे बढ़ना चाहती हूँ। मुझे चूमिए और मुझे महसूस कीजिए।”
जीजू ने उनके पेट पर अपना हाथ रखा और प्रशंसा करते हुए कहा, “आपका शरीर वाकई एकदम परफेक्ट और बेहद आकर्षक है।”
दोनों के बीच की नजदीकी बढ़ रही थी l वे बहुत उत्तेजित थे । सालजी जीजू के ऊपर लेट गई। उनके गर्म शरीरों के बीच केवल पतले कपड़े ही दीवार थी। वे जोश से एक-दूसरे को चूमने लगे।
जीजू और सालीजी एक होने के बहुत करीब थे l तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। साली तुरंत अपने कमरे में भाग गई। जीजू ने दरवाजा खोला तो वहां पार्टी के वाद्ययंत्र लेने वाला व्यक्ति खड़ा था।