सायरा का डर — अली की नई धमकी
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
सायरा ने उसे समझने की कोशिश की; उसने कुछ भी गलत नहीं किया।
शाम का समय था। सायरा अपने कमरे में बैठी थी और अली के बारे में सोच रही थी। अली बीस साल का लड़का था, लेकिन उसका व्यवहार बहुत अपरिपक्व था। कुछ साल पहले उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। वह गलत संगत में पड़ गया था और कभी‑कभी बहुत गुस्से में आ जाता था।
सायरा जानती थी कि अली उसे पसंद करता है, लेकिन उसका तरीका बिल्कुल सही नहीं था। जब भी वह सायरा के करीब आने की कोशिश करता, सायरा असहज हो जाती और गुस्सा भी। उसे अली का यह व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं था।
सायरा अठारह साल की थी और कॉलेज में उसका पहला साल था। उसका सपना था कि वह पढ़ाई पूरी करे और एक दिन डॉक्टर बने। लेकिन उसका परिवार बहुत रूढ़िवादी था। उसके पिता और चाचा तो यह भी नहीं चाहते थे कि वह कॉलेज जाए। सिर्फ़ उसकी माँ ही उसका साथ देती थी।
सायरा को डर था कि अगर अली ने कोई झूठा वीडियो घर में दिखा दिया, तो परिवार उस पर भरोसा नहीं करेगा। शायद उसे पढ़ाई भी छोड़नी पड़ जाए। यह सोचकर उसका दिल बैठ जाता था।
उसने धीरे से कहा, “नहीं… मैं अपने सपने को नहीं छोड़ूँगी। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं पढ़ाई जारी रखूँगी।”
उसी समय अली उसके कमरे में आया। सायरा उसे देखकर घबरा गई।
अली उसके पास बैठ गया और बोला, “क्या सोच रही हो?”
सायरा ने किताब उठाते हुए कहा, “मैं पढ़ रही हूँ। तुम्हें पता है कि मुझे पढ़ना अच्छा लगता है।”
अली ने शांत रहने की कोशिश करते हुए कहा, “हाँ, मुझे पता है… लेकिन मैं तुम्हें देखना चाहता था।”
सायरा ने तुरंत दूरी बनाते हुए कहा, “अली, ऐसा मत करो। मुझे यह ठीक नहीं लगता।”
अली ने उसकी बात अनसुनी करते हुए कहा, “तो तुम इतनी आसानी से मानने वाली नहीं हो। तुम्हें याद है तुमने दोपहर में क्या कहा था? या फिर तुम चाहती हो कि मैं वह वीडियो दिखा दूँ?”
सायरा डर से काँपने लगी।
“अली, मैंने तुमसे कहा था कि मेरा उस लड़के से कोई संबंध नहीं है। वह मेरी तरफ इशारा नहीं कर रहा था। तुम चाहो तो उससे खुद पूछ सकते हो। मैं बस कपड़े बदल रही थी और खिड़की बंद करना चाहती थी। कृपया मेरी बात पर भरोसा करो।”
अली ने कहा, “ठीक है… मैं तुम्हारी बात मान लेता हूँ। लेकिन मुझे बदले में क्या मिलेगा?”
सायरा ने घबराकर कहा, “मैंने कुछ गलत नहीं किया। तुम क्या चाहते हो?”
अली ने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर तुम चाहती हो कि मैं शांत रहूँ… तो रात में अपना दरवाज़ा खुला रखना। मैं अकेले रहने से थक गया हूँ।”
यह कहकर अली बाहर चला गया। सायरा वहीं बैठी रह गई—डरी हुई, असहाय, और उलझन में।