समीर का आकर्षण: लिली के प्रति बढ़ती खामोश चाहत

पाँच शब्दों का रहस्य

समीर का आकर्षण

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

समीर के  सपनों की लड़की लिली ।

दोपहर का समय था। सूरज की किरणें पेड़ों की पत्तियों से छनकर जमीन पर सुनहरी आकृतियाँ बना रही थीं। समीर बगीचे के एक शांत कोने में पुरानी लकड़ी की बेंच पर बैठा था, जहाँ चारों ओर खामोशी पसरी थी। यहाँ आते समय उसने अपनी पड़ोसी लिली को गली में चलते देखा था। लिली का आकर्षक व्यक्तित्व और उसका सहज सौंदर्य उसे बहुत प्रभावित करता था। वह अक्सर अपनी कल्पनाओं में खो जाता था, यह सोचते हुए कि अगर उसे कभी मौका मिले, तो वह उसके साथ क्या क्या करेगा।

लिली अठारह साल की एक स्कूली छात्रा थी, जिसका शांत स्वभाव उसे और भी रहस्यमयी बनाता था। जब भी समीर उससे बात करने की कोशिश करता, वह बस एक सौम्य मुस्कान के साथ आगे बढ़ जाती थी। समीर लिली के प्रति गहरा आकर्षण महसूस करता था और उसके विचार अक्सर उसके मन में आते रहते थे। उसने अनगिनत बार अपने विचारों में उसे स्पर्श किया था।

तभी एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने आकर उसकी शांति भंग कर दी। वे किसी साधु या बाबा जैसे लग रहे थे, जिनके चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी। समीर ने उन्हें बैठने के लिए इशारा किया। बाबा ने अपनी गहरी आँखों से समीर को देखते हुए पूछा, “बेटा, तुम क्या सोच रहे हो? तुम्हारी परेशानी क्या है?” 

समीर कुछ देर चुप रहा, क्योंकि वह अपनी निजी भावनाओं को किसी अजनबी के सामने व्यक्त करने में हिचकिचा रहा था। बाबा ने पुनः आग्रह किया, “बेटे, संकोच मत करो। मैं तुम्हारी हर बात गुप्त रखूंगा।” 

समीर बीस साल का एक नौजवान लड़का था। वह इससे पहले कभी किसी बाबा से नहीं मिला था। उसे याद था कि बचपन में उसकी माँ ने उसे बाबाओं से सावधान रहने के लिए कहा था। माँ ने उसे बताया था कि कुछ बाबा अच्छे होते हैं, लेकिन ज्यादातर बुरे और खतरनाक होते हैं।

लिली उसके लिए खास थी। वह उसके बारे में बात करने में सावधानी बरतना चाहता था। लेकिन वह लिली को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था।

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