समीर ने अपना मन बदल लिया।
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
समीर को बाबा पर भरोसा नहीं था।
समीर और लिली हर रोज मिलने लगे। लिली के साथ कुछ दिन बिताने के बाद समीर को उससे प्यार हो गया। वह उसे बाबा के साथ साझा नहीं करना चाहता था। “मुझे लिली के साथ उनकी झोपड़ी में जाने की कोई ज़रूरत नहीं है। मुझे बाबा की क्या ज़रूरत है? बाबा हमारा कुछ बुरा नहीं कर सकते,” उसने सोचा।
यहाँ समीर ने एक बार फिर बाबा को कम आँका। दरअसल बाबा उसे उन शब्दों के बारे में एक महत्वपूर्ण सलाह देना चाहते थे। वह सलाह लिली के साथ संबंध बनाए रखने में बहुत मददगार साबित होने वाली थी।
दोपहर के बाद जब लिली और समीर बिस्तर पर लेटे बातें कर रहे थे, लिली ने पूछा, “समीर, तुम्हें वो खास शब्द किसने दिए?”
समीर बाबा के बारे में बात नहीं करना चाहता था। उसने एक झूठी कहानी कही । ”लिली,एक दोपहर मैं बगीचे के पास तुम्हारा पीछा कर रहा था। एक आदमी बगीचे में बैठा था। उसने देखा कि मैं तुमसे बात करने की कोशिश कर रहा हूँ। वह मेरे पास आया और मुझे रोक लिया। मैंने उस आदमी को पहली बार देखा। उसने मुझसे कुछ मिनट बात की और फिर ये शब्द मुझे तुम्हें कहने को कहा । मुझे इन शब्दों का अर्थ नहीं पता था, लेकिन मैंने कहे, क्योंकि मैं तुम्हें चाहता हूँ और तुम्हें पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ।”
लिली की आंखें चमक उठी । “तो तुम्हें नहीं पता उन शब्दों का मतलब क्या है?” वह मुस्कुराई।
“नहीं, मुझे जानने की ज़रूरत नहीं है। ये तो बस कुछ शब्द हैं।” लिली बैठ गई और अपने कपड़े पहनने लगी।
“लिली, अभी नहीं। मुझे और चाहिए,” समीर ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।
“नहीं समीर। मुझे अब जाना होगा, फिर मिलेंगे।” लिली की आवाज़ बदल गई थी। वह बहुत साहसी लग रही थी। सारा डर और प्यार खत्म हो गया था। उसने सारे कपड़े पहने और अपना बैग उठाया और बाहर चली गई। बाहर जाते समय उसने समीर को किस भी किया।
समीर उसका व्यवहार देखकर स्तब्ध रह गया। वह तुरंत समझ गया कि लिली उन खास शब्दों के सत्य के बारे में सुनकर बदल गई थी। उसे यकीन नहीं था कि लिली वापस आएगी। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। बाबा ने उसे पहले ही मना कर दिया था कि वह लिली को उन शब्दों के बारे में कुछ भी न बताए।
धीरे-धीरे लिली ने उसके साथ अपना रिश्ता खत्म कर दिया।