जीजू की पार्टी
सालीजी ने अपने आकर्षण को स्वीकार किया
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
जीजू और सालीजी की रोमांटिक शाम
शाम का समय था। मनोज अपनी पांचवीं शादी की सालगिरह मना रहा था। हॉल मेहमानों से खचाखच भरा हुआ था। अचानक मनोज की नजर बगल की सीढ़ियों पर पड़ी। रिया हाथ में शराब का गिलास लिए ऊपर की ओर जा रही थी। मनोज ने उसका पीछा करने का निर्णय लिया। रिया छत पर पहुँच गई और डूबते हुए सूरज को निहारने लगी। मनोज बिना कुछ कहे उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया।
रिया बीस साल की कॉलेज छात्रा थी और मनोज उसका जीजा था। कुछ मिनटों की खामोशी के बाद मनोज ने पूछा, “रिया, क्या हुआ? तुम यहाँ क्यों आई हो?”
रिया ने पीछे मुड़कर कहा, “जीजू, मुझे इतने सारे लोगों के बीच घुटन महसूस हो रही थी।”
मनोज ने उसकी आँखों में देखा, जो एक अलग ही कहानी बयां कर रही थीं। मनोज ने धीमे स्वर में पूछा, “रिया, क्या सिर्फ यही एकमात्र कारण है ?”
रिया ने थोड़ी शराब पी और नपे-तुले शब्दों में कहा, “नहीं।”
“सालिजी, तो क्या बात है?” वह मुस्कुराया और पूछा।
रिया जीजू के करीब आई और उसका हाथ थाम लिया। उसने धीमी आवाज में कहा, “आप… मैंने देखा कि आप इस पार्टी में खुश नहीं हैं और मैं जानती हूँ कि क्यों। मैंने आपकी और दीदी की बातें सुन ली थीं। आप दूसरों के लिए तो खुशियाँ जुटाते हैं, लेकिन आपकी अपनी जिंदगी में पार्टी जैसा कुछ भी नहीं है।”
मनोज ने ठंडी आह भरते हुए कहा, “कोई बात नहीं सालिजी। मैं यह शादी निभाना चाहता हूँ। उम्मीद है कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा।”
रिया ने दृढ़ता से कहा, “नहीं, मैंने तय कर लिया है कि मैं आपको अकेला नहीं छोड़ूँगी। मैं चाहती हूँ कि हम अपने दिल की बातें और अपनी जिंदगी एक-दूसरे से साझा करें।”
मनोज ने भावुक होकर रिया को गले लगा लिया और उसके माथे को चूमने के लिए झुका, लेकिन रिया ने अपना चेहरा इस तरह घुमाया कि उसके होंठ मनोज के होंठों के करीब आ गए। उनकी सांसें मिलने लगीं। धीरे-धीरे होंठ और करीब आने लगे। रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उनके होंठ बस छूने ही वाले थे कि अचानक अंदर से एक आवाज आई।
यह मोनिज की पत्नी की आवाज थी।