भाग-3
चंचल साली जी की अनोखी रात
श्रेणी : जीजू और सालीजी
पढ़ने का समय: 5 मिनट | शब्द: 612
शाम को लगभग आठ बजे हम बाज़ार से बापस आये l साली जी को कुछ शॉपिंग करनी थी l डिनर तो हम ने रेस्टोरेंट में कर लिया था l फिर सभी फ्रेश हो गए और बाते करने लगे l साली जी मेरे सामने बैठी थी और बीबी बगल में l साली जी नाईट सूट मे बहुत आकर्षक लग रही थी l जब भी वह हिलती-डुलती थी, नाइटसूट से उसके निपल्स दिख जाते थे। उसने शर्ट के नीचे कुछ नहीं पहना था। शर्ट के सभी बटन कसकर बंद थे। शायद उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसकी बहन वहीं बैठी थी।
मेरी बीबी जानती थी मैं रात को सोने से पहले चाय पीता था l बो रसोईघर की और चली l रास्ते में बह फूलों का गमला बनाने लगी जो साली जी के ठीक पीछे था l मैं उसे देखने लगा, साली जी को लगा शायद मैं उस की तरफ़ देख रहा था l उसने मुझे देखा, फिर खुद को जांचा l
मेरे पास कारण था मैं ऐसे ही देखता रहा l बह चुपचाप सिर झुकाये बैठी रही, कभी-कभी वह मेरी ओर देख लेती थी l हमारी पिछली मुलाकातों के बाद शायद उसे लगने लगा मुझे उसके स्तन देखना पसंद है। उसने उन्हें छीपाने की कोई कोशिश नहीं की l उसका चेहरा लाल हो रहा था और उसकी सांसें तेज हो रही थीं, जिससे उसकी कमीज ऊपर उठ रही थी। फिर उसने मुज़से पूछा,
“क्या सब ठीक है जीजू ?”
“हा,आज वे बहुत सुन्दर लग रहे है” मैंने फूलों को देखते हुए कहा l
यह सुनिश्चित करने के लिए कि मैं उसे देख रहा हूँ या नहीं। उसने अपना सिर पीछे घुमाया और फूलों को ठीक कर रही अपनी बहन को देखा।
वह मुस्कुराई और बोली, “हाँ, ये फूल बहुत सुंदर हैं।”
मैंने कुछ नहीं कहा, मैं खुश नहीं थी क्योंकि उसे मेरा रहस्य पता चल गया था l
हमने चाय पी और सोने चले गए।
रात के करीब एक बजे थे, बीबी गहरी नींद में सों रही थी l मेरा कुछ ऑफिस का काम बाक़ी था मुझे नींद नहीं आ रही थी l मैं ड्राइंग रूम में आ कर सोफे पर बैठ गया l में अक्सर ऐसा करता था l कभी कभी बीबी भी उठ जाती और मेरी सहायता करती थी l
मैंने अपना लैपटॉप खोला और कुछ ईमेल लिखें l फिर मेरा ध्यान सालीजी के कमरे की खिड़की पर गया , अंदर धीमी रौशनी थी l शायद बह फोन पर होंगी सोच कर मै अपने काम में व्यस्त हो गया l
मेरा बेचैन मन मुझे उसे देखने के लिए मजबूर कर रहा था l बीबी गहरी नींद में थी l में साली जी के कमरे की खिड़की के पास पंहुचा l मेरा दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था मेने खिड़की में लगे दोनों पर्दे के बीच पतली रेखा से भीतर देखा l साली जी के हाथ में फोन था l उसकी सफेद पेंटी फोन की रौशनी में चमक रही थी, दूसरा हाथ पेट पर था जिससे बह ऊपर – नीचे हिला रही थी l कभी कभी वह ब्रा में हाथ डालती थी l
मुझे लगा कि शायद बह पोर्न देख रही थी l मैं कुछ देर देखता रहा l फिर उसने अपना हाथ अपनी पैंटी के अंदर डालना शुरू कर दिया। मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। अब मुझे यकीन हो गया था कि वह कुछ खास देख रही है।
धीरे-धीरे उसने अपना हाथ तेजी से हिलाना शुरू कर दिया। उसके होंठ खुल गए और वह तेजी से सांस लेने लगी।
“तो सालिजी भी हस्तमैथुन कर रही हैं।” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
फिर उसने अपने दोनों हाथ बेड पर फैला दिए और फ़ोन कि लाइट बंद हो गई l
मैं सोफे पर वापस आ गया और फिर से अपना काम करने लगा l
आज उसने छोटा काला टॉप और स्लेटी पायजामा पहना हुआ था l टॉप और पायजामे के बीच उसका गोरा पेट नज़र आ रहा था और गहरी नाभि उसे और अधिक आकर्षक बनाती थी l