भाग-4
चंचल साली जी के अंगों पर आइसक्रीम
श्रेणी : जीजू और सालीजी
पढ़ने का समय: 3 मिनट | शब्द: 484
सुबह में ओफीस जल्दी पहुंच गया l पत्नी की दो छुट्टियां थी l उसका साली जी के साथ शॉपिंग जाने का प्लान था l
मैं ओफीस में बैठा सोच रहा था l साली जी भी हस्तमैथुन करती थी l मुझे यकीन नहीं हो रहा था लेकिन मैंने खुद देखा था, बो कोई सपना तो था नहीं l सालीजी का कोई बॉयफ्रेंड नहीं होगा l शायद बह अपना कौमर्य खोना नहीं चाहती थी l
फिर मेरा सहकर्मी मेरे कमरे में आया। मैं काम में व्यस्त हो गया।
शाम को मैं घर लौटा। तरोताजा होने के बाद मैं लिविंग रूम में आया और टीवी देखने लगा। बीबी रसोई में खाना बना रही थी l
साली जी कमरे में आई,उसके हाथ में दो आइसक्रीम की कोन थी l
“जीजू, मुझे पता है आपको स्ट्राबेरी पसंद है” मुझे एक आइसक्रीम देते हुए कहाँ l
फिर बह मेरे बाईं ओर कुर्सी पर बैठ गयी और अपने पैर मेज पर रख दिए l हम आइसक्रीम खाने लगे ।
आज उसने छोटा काला टॉप और स्लेटी पायजामा पहना हुआ था l टॉप और पायजामे के बीच उसका गोरा पेट नज़र आ रहा था और गहरी नाभि उसे और अधिक आकर्षक बनाती थी l उसके लंबे बाल उसके कंधों पर थे, शरीर के साथ हिलते स्तन बता रहे थे कि आज फिर वो कैद से मुक़्त हैं l
“जीजू, आपका दिन कैसा रहा?” उसने पूछा।
“अच्छा था, लेकिन बहुत काम था।” मैंने उसे देखते हुए कहा।
फिर उसकी आइसक्रीम का दूध उसके पेट पर गिरने लगा, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। वह टीवी देखती रही। मुझे यकीन था कि उसे पता था। दूध उसके अंडरवियर की तरफ बढ़ने लगा। फिर वह खड़ी हुई और उसे साफ करने के लिए टिश्यू पेपर लिया।
“ओह, ये तो मेरे अंडरवियर के अंदर चला गया!” वह हंस पड़ी।
मैं अवाक रह गया और उसे अपना पेट साफ करते हुए देखता रहा।
वह अपना हाथ और टिशू पेपर अपने पेट के नीचे, शायद जननांगों के बालों के पास, घुमा रही थी। उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि मैं उसके सामने बैठा हूँ।
उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। फिर वह सोफे पर बैठ गई। मुझे लगा कि उसने मेरे पायजामे को देखा। मैं असमंजस में पड़ गया। क्या वह मुझे उत्तेजित करने की कोशिश कर रही थी। कुछ भी निश्चित नहीं था इसलिए मैंने चुप रहने का फैसला किया।
फिर उसने अपना हाथ अपने पेट पर फेरना शुरू कर दिया। वह बेचैन लग रही थी। कभी-कभी वह फिर से अपना हाथ अपने पेट के नीचे ले जाती है। उसका पायजामा अब उतना टाइट नहीं था। ऐसा लगता है जैसे वह अपने शरीर को छूकर आनंद ले रही हो। तब मैंने कहा,
“मुझे लगता है सलीजी तुम्हें फिर से नहाने जाना चाहिए। तुम्हारे पेट पर अभी भी चीनी और दूध लगा होगा।”
“जीजू,……… मैं फिर से नहीं नहाना चाहती। मैं सिर्फ अपना पेट धो लूंगी।” वह मुस्कुराई और नहाने के कमरे में चली गई।
मैंने अपना हाथ ढीला छोड़ लिया और यह उसके स्तनों को जोर से छू गया और वे तेजी से हिले l हमारी आंखे मिली l फिर बह चुप चाप कुर्सी पर बैठ गई l