रानी और अनिल की फिर मुलाक़ात – एक नया ड्रामा

रानी और अनिल की फिर मुलाक़ात-एक नया ड्रामा

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

अनिल ने रानी की मदद लेने के बारे में सोचा, लेकिन उसने कुछ और  समझ लिया।

उस रहस्यमयी लड़की ने अनिल को पूरी तरह उलझन में डाल दिया था। वह रात भर सो नहीं पाया। उसके मन में बस एक ही सवाल घूम रहा था— वह लड़की कौन है और वह बगीचे में क्या कर रही थी?

अनिल ने सोचा कि इस राज़ को जानने के लिए रानी से मदद ली जा सकती है। रानी ने कल ही कहा था कि अगर उसे अच्छे पैसे मिलें, तो वह कुछ भी करने को तैयार है। अनिल को लगा कि शायद वही इस रहस्य को सुलझाने में उसकी मदद कर सकेगी।

अगली सुबह लगभग दस बजे रानी उनके घर आई। अनिल अपने कमरे में सामान ठीक कर रहा था।

रानी ने दरवाज़े पर खड़े होकर पूछा, “अनिल जी, क्या आप आज वापस जा रहे हैं?”

अनिल मुस्कुराया, “नहीं‑नहीं रानी, मैं कुछ दिन और रुकूँगा।”

रानी ने राहत की सांस ली। “अच्छा हुआ… मैं तो घबरा गई थी। मैं आपसे बहुत‑सी बातें करना चाहती थी।”

अनिल हँस पड़ा। “आओ, बैठो। क्या बात करना चाहती हो?”

रानी ने थोड़ा झिझकते हुए पूछा, “अनिल… क्या आप भूत‑प्रेत में यकीन करते हैं?”

अनिल चौंक गया। वह भी रात की उसी घटना के बारे में बात करना चाहता था।

“हाँ रानी जी, मुझे लगता है कि कुछ चीज़ें हमारी समझ से बाहर होती हैं। क्या आपको कोई अनुभव हुआ है?”

रानी ने सिर हिलाया। “नहीं, बस… कल रात मैं भूतों पर एक किताब पढ़ रही थी, तो सोचा आपसे पूछ लूँ।”

अनिल कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “रानी, मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। असल में यह एक छोटा‑सा काम है। अगर तुम चाहो तो, इसके पैसे भी मिलेंगे।”

रानी की आँखें चमक उठीं। “मैंने कल ही कहा था कि मैं कुछ भी कर सकती हूँ। जब कहोगे, मैं तैयार हूँ।”

अनिल ने गहरी सांस ली। अब उसे लगा कि वह इस रहस्य के करीब पहुँच सकता है।

उस ने रानी की ओर देखते हुए कहा, “रानी, तुम्हें रात को आना होगा। मैं तुम्हें पैसे दूँगा, वादा करता हूँ।”

रानी ने तुरंत सिर हिलाया। “अनिल जी, मैं पैसों की कोई बात नहीं । आपको मुझे कुछ भी देने की ज़रूरत नहीं है… क्योंकि मैं भी आपको पसंद करती हूँ। लेकिन दिक्कत यह है कि मैं रात में नहीं आ सकती। मैं दिन में फ्री रहती हूँ, हम कहीं भी मिल सकते हैं।”

अनिल ने थोड़ा परेशान होकर कहा, “नहीं‑नहीं रानी जी… मुझे आपकी मदद रात में ही चाहिए—जब आसमान में चाँद चमक रहा हो और उसकी रोशनी हर तरफ फैली हो।”

रानी हल्के से हँस पड़ी। “आप बहुत रोमांटिक हैं, अनिल जी। मुझे भी चांदनी रात में किसी के साथ रहना अच्छा लगता है… लेकिन अभी मैं रात में नहीं आ सकती।”

अनिल ने विनती की, “रानी, प्लीज़… बस एक रात के लिए।”

रानी ने कुछ पल सोचा और बोली, “ठीक है… लेकिन मैं वीकेंड पर आ सकती हूँ। आज या कल नहीं। लेकिन अगर आप चाहें तो हम दिन में किसी भी समय मिल सकते हैं। मैं अभी भी फ्री हूँ। माँ थोड़ी देर में बाहर जा रही हैं। अब यह आप पर है। मैं तैयार हूँ।” रानी खड़ी हुई और उसका बिस्तर ठीक करने लगी।

अनिल ने सिर हिलाया। “नहीं रानी जी… मुझे तो आप रात में ही चाहिए।”

रानी ने कंधे उचकाए। “तो फिर आपको इंतज़ार करना पड़ेगा, अनिल जी।”

“ठीक है रानी जी, बाद में बात करते हैं।” रानी चुपचाप कमरे से बाहर चली गई। वह निराश लग रही थी।

रानी के जाने के बाद अनिल समझ गया कि वह आज उसकी मदद नहीं कर पाएगी। उसे इस रहस्य को जानने के लिए कोई और तरीका ढूँढना होगा।



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