रानी रात में उससे मिलने आई। लेकिन चाँद निकला नहीं

रानी रात में उससे मिलने आई। लेकिन चाँद निकला नहीं ।

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

रानी को लगा कि अनिल रात में शारीरिक संबंध बनाना चाहता है।

शाम का समय था। रानी फिर से अनिल के कमरे में आई और बोली, “अनिल जी, अगर आपको रात में मेरी मदद की ज़रूरत हो, तो मैं आ जाऊँगी। मुझे आपकी मदद करने में खुशी होगी। लेकिन मैं नहीं चाहती कि किसी को इस बारे में पता चले। अगर आप चाहें तो मैं लगभग ग्यारह बजे आ जाऊँगी। मेरी एक गुज़ारिश है कि मुझे शराब पीना पसंद नहीं है।”

अनिल की आँखें चमक उठीं। उसे यकीन था कि वे दोनों मिलकर उस लड़की का राज़ पता लगा सकते हैं, लेकिन उसने तय किया कि अभी रानी को उस राज़ वाली लड़की के बारे में कुछ नहीं बताएगा। उसने खुशी-खुशी रानी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

लगभग ग्यारह बजे अनिल की धड़कनें तेज़ होने लगीं। आसमान में चाँद नहीं था और कुछ काले बादल इधर-उधर घूम रहे थे। अनिल को उम्मीद थी कि बारह बजे के बाद चाँद दिखाई देगा।

बाहर घुप अंधेरा था। तभी उसने रानी को एक बड़े, लंबे कोट में लिपटे हुए अपने घर की ओर आते देखा। वह धीरे-धीरे उसके कमरे में आई। उन्होंने दरवाज़ा बंद कर लिया।  रानी ने अपना लंबा कोट उतारा,  वे बिस्तर पर बैठकर बातें करने लगे। 

रानी ने शरारत भरे अंदाज़ में कहा, “तो, आप क्या  चाहते हैं, मैं वह करने को तैयार हूँ, अनिल जी।”

अनिल ने खिड़की से आसमान की ओर देखा। चाँद नहीं था। 

“रुको रानी , जब आसमान में चाँद निकलेगा, तो मैं तुम्हें सब कुछ दिखाऊँगा।”

रानी मुस्कुराई। “ठीक है, चलो बिस्तर पर लेटकर बात करते हैं, मुझे बहुत सी बातें पूछनी हैं।” 

वे बिस्तर पर लेट गए। अनिल चाँद और उस रहस्यमयी लड़की के बारे में सोच रहा था। रानी को अनिल के प्लान के बारे में कुछ पता नहीं था। वह अनिल के और करीब आने लगी। धीरे-धीरे कमरे का तापमान बढ़ने लगा। कमरा उनकी तेज़ साँसों से भरने लगा। 

वे किसी और ही दुनिया में खोने लगे। 

सुबह के चार बजे जब अनिल की नींद खुली, तो वह रानी की बाहों में था। उसने आसमान की ओर देखा; चाँद नहीं था और अभी भी अंधेरा था। उसने रानी को जगाया। रानी ने अपना लंबा कोट फिर से पहन लिया।

 “धन्यवाद अनिल जी, आप बहुत अच्छे हैं। अगर आपको मेरी मदद की ज़रूरत हो, तो मैं फिर आ सकती हूँ। लेकिन सूरज उगने से पहले मुझे जाना होगा।”

अनिल के पास कहने के लिए कुछ नहीं था। उसने बस मुस्कुराकर उसे चूमा। रानी चली गई। 

उस रात चाँद की रोशनी नहीं थी; अनिल को यकीन था कि वह रहस्यमयी लड़की नहीं आई होगी।

अनिल को लगा कि शायद रानी उसकी मदद नहीं कर पाएगी। उसने अपने एक दोस्त मोटू से बात करने का फ़ैसला किया, जो फ़िलॉसफ़ी का  प्रोफ़ेसर था।

आगे पढ़िए : अनिल और उसके दोस्त मोटू की बातचीत। रहस्यमयी लड़की और रानी
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