खामोश रात – जीजू सालीजी के कमरे में

खामोश रात - जीजू सालीजी के कमरे में

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

बेडरूम में जीजू और सालीजी का ड्रामा

रात के सन्नाटे में जब पूरा घर गहरी नींद में सोया हुआ था, तब मनोज  दबे पांव  सालीजी के कमरे की तरफ बढ़ा । कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और अंदर मद्धम रोशनी जल रही थी। 

आज रात वह भी खुद को रोक नहीं पाया और उसके मन में सालीजी को करीब से देखने और उन्हें चूमने की तीव्र इच्छा जाग उठी । जैसे ही वह  कमरे के अंदर दाखिल हुया ,सालीजी बिस्तर पर लेटी हुई थीं, लेकिन वे सो नहीं रही थीं। वे जीजू का ही इंतजार कर रही थीं। 

जैसे ही मनोज उस के करीब पहुंचा और उसे  चूमने के लिए आगे झुका , सालीजी ने फुर्ती से उसका हाथ पकड़ लिया। उसके चेहरे पर एक शरारती और गहरी मुस्कान थी। उसने जीजू को अपनी ओर खींचा और उसे अपने साथ बिस्तर पर सोने के लिए मजबूर करने लगीं। जीजू  भावनाओं में इतना डूब गया था कि कोई  भी विरोध करने में असमर्थ था।

सालीजी उसे  लगातार चूमने लगीं और प्यार से छूने लगीं, जिससे जीजू की धड़कनें और तेज हो गईं। सालीजी के इस आक्रामक और प्यार भरे व्यवहार से वह अचानक डर गया , क्योंकि उसे डर था कि उसकी पत्नी (सालीजी की दीदी) किसी भी समय जाग सकती थी और उन्हें इस हालत में पकड़ सकती थी । 

उसने सालिजी का हाथ पकड़कर उनसे बात करने की कोशिश की। वह अभी भी नशे में थी। जीजू ने फुसफुसाते हुए कहा, “मुझे जाना होगा , अगर तुम्हारी दीदी जाग गईं तो बहुत अनर्थ हो जाएगा।” लेकिन सालीजी उसकी एक न सुनने को तैयार थीं और उन्हें अपनी बांहों में कसती जा रही थीं। मनोज  का दिल डर के मारे तेजी से धड़क रहा था।

 फिर बाहर उन्हें किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

सालीजी ने तुरंत जीजू को छोड़ दिया। वह अलमारी के पीछे छिप गया। सालीजी मुस्कुरा रही थीं और उन्हें बिस्तर पर आने का इशारा कर रही थीं। जीजू उन्हें चुप रहने के लिए कह रहे थे। यह नाटक कुछ देर तक चलता रहा। फिर सालिजी अपने कमरे के दरवाजे के पास आईं। उन्होंने बाहर देखा। वहां कोई नहीं था, सब कुछ एकदम शांत लग रहा था।

फिर वह जीजू के पास गई और धीरे से बोली, “सब ठीक है? सुबह बात करेंगे।” 

जीजू दरवाजे की ओर चलने लगा ।

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