भाग-12

साली जी और जीजू बगीचे में

श्रेणी : जीजू और सालीजी

पढ़ने का समय: 7 मिनट | शब्द: 960

सुबह के 8 बज रहे थे l मैं अभी भी बिस्तर पर था l पत्नी नौकरी पर चली गई l 

मैंने उससे कहा था आज  मुझे ऑफिस देर से जाना है l उसने मुझसे कहा, साली जी को बाजार ले जाना , घर पर वह अकेली बोर होती होंगी l मैं भी यही चाहता था l मैं सोच रहा था कि मैं उसे कहाँ ले जाऊँ l मिस एक्स ने  भी मुझसे कहा था कि उसे वहाँ ले जाओ जहाँ तुम उसे उत्तेजित कर सको।

ऐसी कौन सी जगह हो सकती थी ?मैं सोच ही रहा था  तभी सालिजी मेरे कमरे में  आई ।

“गुडमॉर्निंग जीजू “

“गुडमॉर्निंग, आ जाइए “मैंने बिस्तर पर हाथ रखते हुए  कहा l

“जीजू अगर मैं वहां लेट गईं  तो मैं फिर सो जाऊंगी, नहीं, नहीं मुझे नाश्ता तैयार करना है l”

“हम नाश्ता  तो बाहर भी खा सकते हैं l”

“नहीं,नहीं जीजू, बाहर लंच होगा ” वह अपने नितंब हिलाते हुए रसोई की ओर चली गई। 

मैं सोच रहा था कि अगर साली जी  बगल वाले बिस्तर पर सोतीं तो कैसा होता।

रिफ्रेश होने के बाद मैं बाहर आया l सालीजी  मेज पर मेरा इंतजार कर रही थी। नाश्ता तैयार था l

“जीजू  हम कहां जाएंगे?”

“तुम कहाँ जाना चाहती हो? सालीजी l”

“कही भी,जहाँ आप चाहें l”

मैं कहना  तो चाहता था बैडरूम मे लेकिन मुझमें अभी  हिम्मत नहीं थी l मिस एक्स तो यही कहना चाहेंगी l

“मार्केट हॉल के पास एक बगीचा है ,वहां चलते हैं” मैंने चाय पीते हुए कहा l

“हाँ, हाँ जीजू, वह बहुत सुंदर है,वहा हम आइसक्रीम भी खरीद सकते हैं l “

“जीजू मैं जल्दी से नहा लेती हूँ फिर हम चलते हैं l” फिर वह वाशरूम की तरफ़ जाने लगी l

अगर उसने फिर से दरवाज़ा बंद नहीं किया तो l मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा l अगर सालीजी ने अपनी ब्रा और पैंटी बाहर फेंक दी , फिर क्या मैं वह कर सकता था जो मिस एक्स ने कहा था? उसने तो यह भी कहा था , मौके बर्बाद मत करो l मेरे मन में कई बातें घूमने लगीं। मैं बेसब्री से इंतजार करने लगा कि सालिजी क्या करने वाली  हैं।

साली जी  नहाने चली गई l उसने वही किया । दरवाज़ा थोड़ा खुला छोड़ दिया और फिर अपनी ब्रा और पैंटी बाहर टोकरी के पास फेंक दी l


मेरा चेहरा लाल हो रहा था l अगर मुझे सालिजी चाहिए तो मुझे वही करना होगा जो मिस एक्स ने कहा था। मैंने सोचा।

मैं खड़ा हुआ और उसके वॉशरूम की ओर जाने लगा l फिर मैंने साली जी की आवाज सुनी l

“जीजू, आप कहाँ हैं?, क्या आप शॉवर में आ सकते हैं?”

मैं रुक गया, मुझे अपने कान पर विश्वास नहीं हो रहा था। “क्या साली जी मेरे साथ नहाना चाहती थी?” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।

उसने पहले ही अपनी ब्रा और पैंटी बाहर फेंक दी थी l सालीजी तो पूरी नंगी होगी l मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था l मैंने दरवाज़ा खोला,

“क्या हुआ?” 

सालीजी सफेद तौलिये में थीं l जिसने उसके शरीर का मध्य भाग ढका हुआ था l 

“जीजू, देखो न ,शावर हिल नहीं रहा, मै कैसे नहा सकती हुं?”

मेने शावर चेक किया, वह तो ठीक था, ऊपर, नीचे जा रहा था l

“अब ठीक है सालीजी “मेने बोला और बाहर की और जाने लगा l

“रुको जीजू! मैं चेक करना चाहती हुं l”

उसने शॉवर खोल दिया l पानी उस पर गिरने लगा l  उसके काले बाल पानी से भीगने लगे l 

गीला तौलिया उसके स्तनों  से फिसलने लगा l  शरीर पर हर जगह पानी था l फिर उसने अपनी नजरें मेरी तरफ घुमाईं l
मेरा चेहरा लाल था l मेरी उत्तेजना ने सारी सीमाएं पार कर दीं थी। उसने मेरे पायजामे पर नजर डाली। मैं कुछ भी छिपा नहीं सका। दरअसल, मैं कुछ छिपाना भी नहीं चाहता था। मैं चाहता था कि वह आज  देखे जो वह देखना चाहती थी। वह मुस्कुराई और बोली,

“जीजू,अब  ठीक है!”

मैं वॉशरूम से बाहर आया और उसकी ब्रा और पैंटी को टोकरी में रख दिया l

“थैंक्यू जीजू ” वह नहाते बोली,दरवाज़ा अभी भी थोड़ा खुला था l

मैं अपने कमरे में वापस आ गया, उसका गीला शरीर अभी भी मेरी आँखों में घूम रहा था। 

नहाने के बाद हम बाहर निकल गये l

बगीचे में चलते-चलते हम एक कोने पर पहुँचे । बगीचे के एक तरफ एक छोटे नग्न लड़के की मूर्ति थी,वो छोटा सा फव्वारा था,लड़के के लिगं से पानी आ रहा था l

“ये पहले तो नहीं था, उन्होंने यहां क्यों रखा?, कई महिलाएं यहां आती हैं” मैंने उस स्टेचू की तरफ देख कर कहा l

“हाँ जीजू, उन्हें थोड़ा बड़ा बनाना चाहिए था, ये तो बहुत छोटा है l “

“क्या “?
सालीजी  जोर से हंसी l शायद वह बड़ा देखना चाहती थी l 

फिर हमने  आइसक्रीम खरीदी l वहां बहुत सारे लोग थे l हम थोड़ी शांत जगह ढूंढने लगे l 

बगीचे के कोने पर एक बड़ा पेड़ था, हम वहाँ जा बैठे l वहाँ कुछ  लड़कियाँ और लड़के बैठे थे लेकिन हमारे करीब नहीं थे l

“जीजू देखो बहुत सारी खूबसूरत लड़कियाँ हैं, अगर किसी ने तुम्हें प्रपोज़ कर दिया तो?”

“मैं उसे होटल में ले जाऊंगा और उसके साथ दिन बिताऊंगा l  लेकिन कोई हमारे पास नहीं आएगी l  उन्हें लगता है कि हम कपल हैं ” मैंने मुस्कराते हुऐ कहा l

“वाओ जीजू!, होटल लेकर जाओगे l “

“हाँ, निश्चित रूप से l” वह चुप हो गयी l

“साली जी आप तौलिये में बहुत सुन्दर लग रही थी l “

“जीजू सुन्दर और सेक्सी बोलो, तुम भी कभी तौलिया लगाना”, वह मुस्कुराते हुऐ बोली l

“मैं आपकी तरह तौलिया क्यों पहनूँ, सालीजी?”

“मुझे नहीं पता। शायद बहन को ऐसा पसंद हो।” 

“जीजू मुझे भूख लग रही है, चलो लंच के लिए चलते हैं l”

फिर हम दोपहर के भोजन के लिए निकल गये l

मेरी आंखे चमक उठी l यह तो संभव था l मैं उसका ऑनलाइन दोस्त बन सकता था l अब मुझे उसका फेसबुक ढूंढना था, मुझे यकीन था मैं अपनी पत्नी के फोन से उसे ढूंढ पाऊंगा l

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