प्यासी नौकरानी हीरी-भाग 10

भाग-10

राजन ने उसकी वर्जिनिटी छीन ली। जानकी चिल्लाई

श्रेणी : प्यासी हिरी

पढ़ने का समय: 5 मिनट | शब्द: 686

जानकी जान गई  कि वह वही करेगा जो वह करना चाहता है। उसके साथ सहयोग करना कहीं बेहतर होगा।

“कृपया सर, मुझ पर क्रोधित न हों। आप जो चाहें करें, लेकिन धीरे-धीरे करें। आप जानते हैं कि यह मेरा पहला अनुभव है और आपका अंग इतना बड़ा और मोटा है।” जानकी ने विनम्रता से कहा।

राजन मुस्कुराया और बोला, “मैं भी चाहता हूँ कि हम दोनों आनंद लें। मैं तुम्हें चोट नहीं पहुँचाना चाहता। मेरे साथ आनंद लो।” 

उसने अपना लिंग उसके मुँह के पास लाकर कहा, “इसे चाटो।” जानकी ने चुपचाप अपना मुँह खोला और चाटने लगी ।

जानकी, इसका स्वाद कैसा है? 

नमकीन और सख्त है, लेकिन मुझे पसंद है। वह मुस्कुराई। 

राजन ने उसकी योनि को छुआ। वह गीली हो रही थी। जानकी उत्तेजित  होने लगी थी । उसकी योनि के होंठ खुलने लगे। जब राजन ने उसकी क्लिटोरिस को छुआ तो वह चिल्लाई… “आह… आह… सर…मुझे कुछ अजीब सा लेकिन अच्छा सा एहसास हो रहा है… आह।”

“चलो मैं तुम्हारी योनि चाटता हूँ। तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा।” राजन उसके पैरों में आ गया और उसकी योनि और भगशेफ चाटने लगा। “आह… आह… सर, मुझे अभी आपका लिंग चाहिए… अभी डालिए… जानकी चिल्लाई।”

राजन ने देखा कि उसकी योनि लिंग ग्रहण करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। उसने अपना लिंग उसकी योनि के पास लाया। जैसे ही लिंग उसकी योनि के होंठों को छूआ, जानकी उत्तेजना से कांपने लगी।

राजन लिंग अंदर डालने  लगा । जानकी चिल्लाने लगी, “आह…आह…धीरे करो सर।” 

फिर राजन ने अपना लिंग पूरी तरह से उसकी योनि में डाल दिया। वह उसके छोटे पेट पर लेट गया। उसका भारी शरीर उसके पेट पर दबाव डालने लगा। जानकी चिल्लाई, “प्लीज सर, आप बहुत भारी हैं। मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।”

राजन को याद आया। जब वह  उस पर चिल्लाई  थी , “ तुम्हें इसके लिए कुछ सजा  तो मिलनी चाहिए।”

वह लगातार उसके स्तनों और पेट को दबाता रहा।। उसका लिंग पहले से ही उसकी योनि में गहराई तक जा चुका था। जानकी का शरीर बिस्तर में धंसने लगा।

“सर, मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। आप बहुत भारी हैं। कृपया मेरे शरीर को इस तरह न दबाएं।” जानकी ने फिर से प्रार्थना की। इस बार राजन को एहसास हुआ कि वह सचमुच मुसीबत में है।

राजन कई महीनों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। वह उसे अपने भारी शरीर के नीचे कुचलना चाहता था। वह लगातार दबाता रहा। “सर, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्या आप मुझे मारना चाहते हैं?” जानकी चिल्लाई। 

राजन ने उसके शरीर को दबाना बंद कर दिया। जानकी ने गहरी सांस ली।  लिंग अभी भी उसकी योनि में हिल रहा था। वह अभी भी उसके शुक्राणुओं का इंतजार कर रही थी।

 फिर राजन ने उसकी जांघ पर  कुछ बार चुटकी काटी। “मैं चाहता हूँ कि तुम और चिल्लाओ। मैं तुम्हारी कामुक आवाज सुनना चाहता हूँ।” 

जानकी पहले से ही चिल्ला रही थी। अब उसकी आवाज में आनंद से ज्यादा दर्द था।

उसने फिर से उसकी जांघ पर  कुछ बार चुटकी काटी। जब उसने देखा कि जानकी की ताकत खत्म हो रही  है। वह सहन नहीं कर पा रही । उसने उसके शरीर को छोड़ दिया और अपना लिंग उसकी योनि में धकेलने लगा। 

जानकी बहुत थक चुकी थी। वह उसके  लिंग की गति भी सहन नहीं कर पा रही थी। राजन अपनी गति बढ़ा रहा था क्योंकि उसका वीर्य निकलने ही वाला था। वह जानकी को आनंद देने के लिए उसके साथ यौन संबंध नहीं बना रहा था। वह बस उसकी कुंवारी योनि को खोलकर उसे सबक सिखाना चाहता था। उसने यह सफलता पूर्वक कर दिखाया।  फिर उसने अपनी गाढ़ी वीर्य से उसकी योनि भर दी। 

उसने अपना लिंग बाहर निकाला और बिस्तर से नीचे उतर आया। न चुंबन, न गले लगाना, न तारीफ। वह वॉशरूम गया और अपना चेहरा धोया। 

“चलो अब घर चलते हैं।”  जानकी ने अपना चेहरा ठीक किया और कपड़े पहने। उसने अपनी योनि के बाहर कुछ वीर्य देखा। वह समज गई  कि राजन ने वीर्य को उसकी योनि में डाला दिया । उसने  कोई कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया । उसने अपने कपड़े पहने और चुपचाप राजन के साथ चलने लगी।

┃भाग – 11┃

जानकी समझ गई कि राजन क्या चाहता है। उसने चुपचाप अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर लेट गई।

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