ऑनलाइन प्रेमिका लीना
श्रेणी : प्रेम और रिश्ते
पढ़ने का समय: 6 मिनट | शब्द: 903
रविवार की खूबसूरत सुबह थी। लीना घर के पिछवाड़े में खिले फूलों को देख रही थी। उसका दमकता चेहरा बता रहा था कि उसकी रात एकदम परफेक्ट थी। उसकी कमर पर लिपटा छोटा कपड़ा धीरे-धीरे हवा में उड़ रहा था, जिससे उसके गोरे, नंगे नितंब झलक रहे थे। ताजा धूप उन्हें और भी आकर्षक बना रही थी।
सैम पीछे बैठा हुआ था और उसके उड़ते हुए कपड़ों को देख रहा था। आम तौर पर वह वहां बैठकर ताजे फूलों को देखता था, लेकिन आज फूलों की रानी स्वयं वहां मौजूद थी। वह सोच रहा था कि कुछ लड़कियां नग्न अवस्था में कितनी खूबसूरत दिखती हैं।
सैम तीस वर्ष का अविवाहित युवक था। कुछ महीने पहले उसने इंटरनेट पर एक साथी की तलाश शुरू की थी। लंबे समय तक उसे कोई खास सफलता नहीं मिली। उसने सोशल मीडिया पर कई महिलाओं से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन अक्सर उसे कोई जवाब नहीं मिलता था। कई बार तो बातचीत “हैलो” से आगे ही नहीं बढ़ पाती थी।
एक दिन उसने अपने एक दोस्त से अपनी ऑनलाइन खोज के बारे में बात की। दोस्त ने हँसते हुए कहा, “सैम, इंटरनेट पर गंभीर रिश्ता ढूँढ़ना आसान नहीं है। वहाँ लोग अक्सर अलग-अलग वजहों से आते हैं।”
सैम को अक्सर ऑनलाइन आकर्षक युवतियों की प्रोफाइल दिखाई देती थीं और वह उनसे बातचीत शुरू करने की कोशिश करता था, लेकिन कोई उसमें रुचि नहीं दिखाता था । लीना भी उन्हीं में से एक थी। उसने सैम के शुरुआती संदेशों का कभी जवाब नहीं दिया था। फिर भी सैम को उसका बात करने का अंदाज़, उसकी पोस्टें और उसका व्यक्तित्व पसंद था। जब भी वह उसे ऑनलाइन देखता, उससे संपर्क करने की कोशिश करता, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती।
एक दिन सैम ने उसे दस डॉलर का एक छोटा-सा ऑनलाइन उपहार भेजा। उसे उम्मीद थी कि शायद इस बहाने बातचीत शुरू हो सके। अगले दिन जब उसने लीना को “हैलो” लिखा, तो इस बार तुरंत जवाब आया।
“हैलो, सैम जी। आप कहाँ से हैं?” लीना ने पूछा।
सैम ने बताया कि वह स्वीडन में रहता है, स्टॉकहोम के पास।
“ओह, तो हम एक-दूसरे से बहुत दूर नहीं हैं,” लीना ने उत्तर दिया।
सैम को खुशी हुई कि आखिरकार लीना उससे बात कर रही थी। उसे महसूस हुआ कि लीना पैसों की तलाश में थी रिश्ते के लिए नहीं । लेकिन उसे लीना पसंद थी। वह उसे बेहतर तरीके से जानना चाहता था।
उस दिन के बाद से दोनों की नियमित बातचीत होने लगी। सैम समय-समय पर उसे छोटे-छोटे उपहार भेज देता था। कुछ ही हफ्तों में लीना ने अपना व्हाट्सऐप नंबर भी उसके साथ साझा कर लिया, हालांकि उसने यह शर्त रखी कि वह केवल संदेश भेजे, कॉल न करे।
दो महीने इसी तरह बीत गए। फिर एक दिन लीना ने कहा, “सैम, अगर तुम मेरे यात्रा और रहने का खर्च उठा सको, तो हम मिल सकते हैं। मेरी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।”
लीना एक जवान लड़की थी, उसने अपनी उम्र पच्चीस बताई, लेकिन सैम को यकीन नहीं था। शायद वह अठारह या उन्नीस साल की थी। सैम तीस साल का था और उसने उसे अपनी उम्र बता दी थी । शायद लीना ने सोचा कि अगर उसने अठारह कहा तो सैम उसे पसंद नहीं करेगा।
लीना पड़ोसी देश में रहती थी, इसलिए यात्रा का खर्च बहुत अधिक नहीं था। सैम ने कुछ देर सोचने के बाद उसकी बात मान ली।
शुक्रवार को वह हवाई अड्डे पर लीना को लेने पहुँचा। पहली बार आमने-सामने मिलने पर दोनों थोड़े संकोच में थे, लेकिन जल्दी ही सहज हो गए। उन्होंने दो रातें साथ बिताईं। आज रविवार की सुबह थी। शाम को उसे वापस जाना था।
“आज उसका उसके साथ आखिरी दिन है। इसीलिए वह अंडरवियर नहीं पहनना चाहती थी,”सैम मन ही मन सोच रहा था। वह उसके साथ भरपूर आनंद लेना चाहता था। धीरे-धीरे वह उत्तेजित होने लगा।
लीना अभी भी फूलों को मंत्रमुग्ध होकर निहार रही थी। सैम धीरे-धीरे उसके पास आया और से पीछे से पकड़ लिया।
“क्या सोच रही हो, लीना?” उसने नरम स्वर में पूछा।
लीना ने फूलों पर से नज़र हटाए बिना कहा, “बहुत दिनों बाद इतने ताज़े और खूबसूरत फूल देख रही हूँ। इन्हें देखकर मन को अजीब-सी शांति मिल रही है।”
सैम हल्का-सा मुस्कुराया। वह उसके और करीब आया और उसकी गर्दन पर एक कोमल चुंबन रखकर बोला, “तुम भी तो ऐसे ही एक खूबसूरत फूल हो।”
लीना की आँखों में क्षणभर के लिए उदासी उतर आई।
“एक बार मेरी माँ ने भी यही कहा था,” वह धीमे स्वर में बोली, “कि मैं किसी सुंदर फूल की तरह हूँ। लेकिन ज़िंदगी ने मुझे कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया।”
सैम ने उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया।
“लीना, हर इंसान को कभी न कभी रुककर नई शुरुआत करनी पड़ती है। मुझे नहीं लगता कि तुम इस तरह की ज़िंदगी और लंबे समय तक जीना चाहोगी।”
लीना ने गहरी साँस ली।
“मैं रुकना चाहती हूँ, सैम,” उसने स्वीकार किया, “लेकिन अकेले नहीं कर सकती। मैं उतनी मज़बूत नहीं हूँ जितना तुम समझते हों । मुझे किसी के सहारे की ज़रूरत है।”
सैम ने उसकी ओर देखते हुए कहा, “अगर तुम चाहो, तो मैं तुम्हारा वह सहारा बन सकता हूँ। तुम्हारे साथ चल सकता हूँ।”
लीना उसकी ओर मुड़ी। उनकी नज़रें मिलीं। उन आँखों में उसे पहली बार अपनापन और भरोसा दिखाई दिया।
सैम ने उसके होंठों को चूमा और कहा, “लीना, मैं नहीं चाहता कि तुम वापस जाओ।”
लीना ने नज़रें झुका लीं और हल्के से सिर हिलाकर अपनी सहमति जता दी।
उसकी कमर पर लिपटा छोटा कपड़ा धीरे-धीरे हवा में उड़ रहा था, जिससे उसके गोरे, नंगे नितंब झलक रहे थे। ताजा धूप उन्हें और भी आकर्षक बना रही थी।