रहस्यमयी लड़की का खुला राज़ – उस रात की कहानी

रहस्यमयी लड़की का खुला राज़ - उस रात की कहानी

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

अनिल और उसके दोस्त ने हिम्मत दिखाई और उस रहस्यमयी लड़की को पकड़ लिया।

आधी रात का समय था। आसमान में पूरा चाँद चमक रहा था और उसकी हल्की रोशनी पूरे मोहल्ले में फैल रही थी। अनिल और मोटू अपने कमरे की खिड़की पर खड़े होकर बाहर देख रहे थे। उनकी नज़रें पड़ोसी के बगीचे पर टिकी हुई थीं।

जब उन्होंने उस रहस्यमयी लड़की को बगीचे में फूलों की ओर जाते देखा, तो उनकी आँखें चमक उठीं। उसने फिर  वही किया।  अपने सारे कपड़े उतार दिए और छोटी सी बिकिनी पहनकर हरी घास पर लेट गई।

अनिल ने धीरे से कहा, “मोटू, वही लड़की है जिसके बारे में मैं बता रहा था। मुझे समझ नहीं आता—वह असली है या कोई रहस्य। कभी‑कभी लगता है जैसे वह भूत हो… लेकिन दिखती बहुत सुंदर है। मैंने  मकान‑मालिक चरण से पूछ था। उस घर में उसके जैसी कोई जवान लड़की नहीं रहती।”

“चलो बाहर चलते हैं और घर के बाहर उसका इंतज़ार करते हैं। अगर वह असली लड़की है, तो कुछ देर बाद वह ज़रूर घर से बाहर निकलेगी।”  मोंटू ने कहा l 

वे नीचे आए और घर के बाहर सड़क के किनारे पेड़ के पास छिपकर खड़े हो गए। अंधेरा था और सड़क सुनसान।

एक घंटे से ज़्यादा इंतज़ार करने के बाद, घर का दरवाज़ा धीरे से खुला। वही लड़की बाहर निकली और सड़क पर चुपचाप चलने लगी। अनिल और मोटू उसके पीछे‑पीछे चलने लगे।

जब लड़की को एहसास हुआ कि कोई उसके पीछे है, तो उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। करीब पंद्रह मिनट बाद वह एक छोटे से घर के सामने रुकी और अंदर जाने लगी।

अनिल ने हिम्मत करके धीरे से पूछा, “हेलो… आप कौन हैं?”

लड़की ने उन्हें नज़रअंदाज़ किया और अंदर चली गई, लेकिन अनिल और मोटू भी उसके पीछे उसके  घर में पहुँच गए। लड़की घबरा गई और तुरंत लाइट जला दी।

लाइट जलते ही तीनों एक‑दूसरे को देखकर हैरान रह गए। वह रानी थी।

अनिल ने आश्चर्य से पूछा, “रानी? तुम बगीचे में क्या कर रही थीं?”

रानी मुस्कुराई और बोली, “अंदर आइए अनिल जी।”

अनिल और मोटू का डर एक पल में गायब हो गया।

रानी ने समझाया, “मैंने आपसे कहा था कि मैं कोई भी काम कर सकती हूँ। चरण जी एक बूढ़े पेंटर हैं। वह चाँदनी रात में बगीचे में एक महिला की पेंटिंग बनाना चाहते थे। मैं बस उनकी मदद कर रही थी।”

अनिल और मोटू एक‑दूसरे को देखकर मुस्कुराए l 

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