समीर की हिम्मत: उसने खुद ये शब्द कहने का फैसला क्यों किया

समीर ने खुद उन शब्दों को बोलने का फैसला किया

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

समीर का कठिन विकल्प

समीर ने उन शब्दों को याद रखने की कोशिश की। वह जानता था कि ये कुछ शब्द उसकी जिंदगी बदल सकते हैं। बाबा के इन शब्दों ने उसके मन में आशा की किरण जगा दी थी। हर बार जब वह उन शब्दों को पढ़ता, लिली का चेहरा उसकी आंखों के सामने आ जाता। उसे लगता था कि अगर वह सही तरीके से अपनी बात कह पाया, तो शायद लिली के साथ उसका रिश्ता एक नया मोड़ ले लेगा। वह इन शब्दों को बार-बार दोहराता, जैसे कोई मंत्र हो, ताकि वह घबराए नहीं।

देर रात तक वह लगातार उन्हीं शब्दों को दोहराता रहा।

दोपहर का समय था। सूरज की तपिश बढ़ रही थी, लेकिन समीर के दिल में एक अलग ही हलचल थी। वह अपने घर के बाहर लिली का इंतजार करने लगा। उसे पता था कि लिली आज दोपहर करीब एक बजे आएगी। वह बार-बार घड़ी देख रहा था।

कुछ देर बाद उसने उसे आते देखा। लिली को देखते ही समीर का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। जब वह पास आई, तो समीर घबराहट में अपने सारे शब्द भूल गया। उसने जो सोचा था, उसके विपरीत उसने अजीब बात कह दी, “तुम्हें कपड़े पसंद हैं, तुम्हें अंडरवियर पसंद नहीं हैं।” लिली ने उसकी बात सुनी, वह पहले तो हैरान हुई, फिर खिलखिलाकर हंस पड़ी और वहां से चली गई। समीर वहीं खड़ा रह गया, उसे समझ आ गया था कि उसने सब कुछ गलत बोल दिया था। लिली ने उसे हैलो  तक नहीं कहा। वह बस पीछे से उसकी आकर्षक चाल को  देखता रहा।

वह घर लौट आया और खुद को कोसने लगा। उसे समझ आ गया था कि लिली के पास होने पर वह नर्वस हो जाता है और कुछ भी सही से नहीं बोल पाता। 

फिर उसने सोचा कि अगर वह इन शब्दों को कागज पर लिखकर लिली को देने की कोशिश करे तो कैसा रहेगा। यह आसान था, लेकिन इसमें जोखिम भी था। अगर लिली ने उसका पेपर नहीं उठाया या उसे लेने से इनकार कर दिया, तो वह फिर से असफल हो जाएगा।

नहीं नहीं, मुझे  अब और समय बर्बाद नहीं करना । मुझे एक अच्छा विकल्प ढूंढना होगा जो विफल न हो।



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