मीना का सच — टूटे रिश्ते और नए फैसले
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
“वह हमेशा तुम्हारा दामाद ही रहेगा।”मीना ने मन ही मन सोचा
मीना ने काफ़ी सोचने के बाद तय किया कि अब उसे अपने परिवार से सच बोलना ही होगा।
रविवार था। वह अपने माता‑पिता के साथ बैठी थी। वे हैरान थे कि मीना घर क्यों आ गई है, जबकि उसकी बहन जीजू के घर अकेली है।
मां ने धीरे से पूछा, “मीना… मनोज के साथ सब ठीक है न?”
मीना ने गहरी सांस ली और बोली,
“माँ… हमने तलाक लेने का फैसला कर लिया है। हमारा रिश्ता कई सालों से ठीक नहीं चल रहा।”
यह सुनकर सब चौंक गए।
मां ने गंभीर आवाज़ में कहा,
“मीना, शादी और तलाक कोई खेल नहीं है। परिवार की इज़्ज़त इन बातों से जुड़ी होती है। तुम्हें मनोज से बात करके रिश्ता बचाने की कोशिश करनी चाहिए।”
मीना ने सिर हिलाया।
“नहीं माँ… अब बहुत देर हो चुकी है। यह सिर्फ मनोज की गलती नहीं है। मैं भी थक चुकी हूँ। हम दोनों बस निभा रहे थे, जी नहीं रहे थे।”
“क्या मनोज का किसी और औरत से रिश्ता था?” मां ने पूछा,
“माँ… मुझे नहीं पता। और अब मुझे इससे फर्क भी नहीं पड़ता।”
मां ने फिर पूछा, “क्या तुम्हारा किसी और से रिश्ता है?”
मीना कुछ देर चुप रही। फिर धीरे से बोली,
“माँ… हमारा रिश्ता दो साल से टूट चुका था। हम साथ नहीं सोते थे। इस दौरान मनोज का छोटा भाई रवि मुझे काम पर छोड़ता था। हम बात करते थे… और एक दिन हम एक‑दूसरे के करीब आ गए।”
मां की आँखें फैल गईं।
मीना ने आगे कहा,
“अजीब है माँ… लेकिन मैं और रवि एक‑दूसरे को मनोज से ज़्यादा समझते हैं। हमने शादी करने का फैसला किया है। और मनोज भी तलाक चाहता था। हम दोनों पहले ही इस बारे में बात कर चुके हैं।”
मां गुस्से में बोली,
“मनोज के पास और क्या रास्ता बचा था? तुम्हारा रिश्ता उसके भाई से है!”
मीना शांत आवाज़ में बोली, “माँ… मनोज को मेरे और रवि के बारे में कुछ नहीं पता था। तलाक का फैसला सिर्फ हमारे टूटे हुए रिश्ते की वजह से है।”
मां कुछ देर चुप रही। फिर बोली,
“ठीक है मीना… अगर तुमने सोच‑समझकर फैसला किया है, तो हम तुम्हारा साथ देंगे। मनोज अच्छा लड़का था… हमें उसे दामाद बनाकर खुशी हुई थी।”
मीना ने मन ही मन सोचा—
“वह हमेशा तुम्हारा दामाद ही रहेगा।”