कहानी का प्रभाव

कहानी का प्रभाव

श्रेणी: विशेष कहानियाँ

पढ़ने का समय: 3 मिनट | शब्द: 291 

कुछ विचित्र घटनाएं हमारे विचारों को कैसे प्रभावित करती हैं।

   सुबह की हल्की धूप बगीचे के शांत कोने में फैल रही थी, और वीरू अपनी किताब में डूबा था। वह एक ऐसी कहानी पढ़ रहा था, जिसमें एक लड़का अपनी सहपाठी से धीरे-धीरे प्यार करने लगता है। कहानी की शुरुआत एक लाइब्रेरी से हुई , जहाँ वह एक दोपहर बैठा था। अचानक, वही लड़की लाइब्रेरी में आई और उसके पास आकर बैठ गई। उनकी आँखें धीरे-धीरे मिलने लगीं।

जब लड़की को लगा वह उसमे रुचि ले रहा है l उसने  अपनी कामुक  हरकतों से उसे और आकर्षित करने की कोशिश की—अपने शरीर को हल्के-हल्के हिलाना, होंठों को एक अनोखे अंदाज में घुमाना। लेकिन लड़के  की दिलचस्पी सिर्फ शारीरिक आकर्षण में नहीं थी; उसे प्यार, समझदारी और मीठी बातों का एहसास चाहिए था। उसे लगा कि लड़की केवल शरीरक भूख के लिए ही सभ कर रही है, जबकि वह उससे कहीं ज्यादा गहराई चाहता था।

कहानी पढ़ते- पढ़ते, वीरू अपने ही सहपाठी के बारे में सोचने लगा, जिसे वह दिल से पसंद करता था। उसने मन ही मन सोचा, “अगर वह भी ऐसा ही व्यवहार करेगी तो वह निश्चित रूप से उसे  सब कुछ देगा। उसका शरीर प्रतिक्रिया करने लगेगा। वह अपने जज़्बातों में खो गया।

तभी, अचानक एक हल्की आवाज ने उसे हिला दिया—”हेल्लो।” उसने सिर उठाया और देखा कि एक जवान लड़की गुलाबी खूबसूरत फ्रॉक में मुस्कुराते हुए उसके सामने खड़ी थी। वह उसकी वही सहपाठी थी, जो बिल्कुल उस कहानी की लड़की जैसी ही लग रही थी।

वीरू आश्चर्य से खड़ा हो गया। कहानी के विषय में खोया हुआ, वह उसकी ब्रा ओर बदन को देखने लगा।  लड़की ने उसकी निगाहें महसूस की और थोड़ा शर्माते हुए बोली, “मुझे लगा तुम मुझसे बात करना चाहते हो।”

फिर वह धीरे-धीरे चलने लगी, और वीरू बस उसे देखते रह गया l

रागु की नजरें अनजाने में उसके उभरे हुए ब्रा पर टिक गईं। खिड़की से आती हवा उसकी कमीज़ को धीरे-धीरे छू रही थी, जिससे उसकी ब्रा के साथ बदन  दिखाई दे रहा था।

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