भाग-6

रसोई में हलचल तौलिये में सालीजी

श्रेणी : जीजू और सालीजी

पढ़ने का समय: 5 मिनट | शब्द: 576

सुबह के 8 बजे थे,में अभी भी बिस्तर पर था l बीबी काम पर जल्दी चली गई थी l आज साली जी कि साथ पुस्तकालय जाना था,शायद बह अभी भी सो रही थी l मैंने बिस्तर पर ही कुछ काम करने लगा, लैपटॉप मेरे पास में ही था l कुछ काम करने पश्चात् मैंने रसोई में जाकर चाय बनाने जाने लगा l

साली जी पहले से ही रसोई में थी, चाय का पानी उबल रहा थाl में उसके पीछे जा खड़ा हुआ l

“गुडमॉर्निंग जीजू” उसने मुस्कुराते हुए कहाँ l

“गुडमॉर्निंग ” तुम इतना जल्दी उठ गई,मैंने उस  की तरफ देखते हुए कहा l

“हा,जीजू में रात ठीक से सो नहीं सकी l”

“क्या हुआ तुम ठीक तो हो?”

“हां जीजू,बहुत अच्छी l”

शायद मेरी पत्नी ने उससे कहा था चाय कि लिए l मैं चुप चाप उसके पीछे खड़ा उसकी हिलते नितंब देख रहा था l पाजामा आज भी दरार में फ़स रहा था l

“जीजू मुझे वह सफ़ेद जार देना l ” उसने अपना हाथ उठाते हुऐ कहा l

में उससे लम्बा था l मेरा शरारती मन हमेशा उसे छूने के कारण ढूंढ़ने में लगा रहता था l मैंने जानबूझकर दूसरा हल्दी बाला जार गिरा दिया, कुछ हल्दी हमारे ऊपर आ गिरी l

“ओह जीजू!” बह चिल्लाई l

वो मेरी शर्ट साफ करने लगी, फिर पायजामा छूने लगी l मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह इस अवसर का लाभ उठाना चाहती थी। मैं खुद को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा  था । जब मुझे लगा कि मैं अपनी उत्तेजना को नियंत्रित नहीं कर पा रहा  हूँ, तो मैंने कहा, “सालीजी, मैं नहाने जा रहा  हूँ, मैं जल्दी ही पजामा बदल लूँगा ।”

सालीजी मुस्कुराईं और रुक गईं। मैंने सोचा, “अगर वह इतनी आगे बढ़ गई  तो मुझे रुकने की क्या जरूरत है?” फिर मैंने कहा,

“अरे सलिजे तुम्हरी पीठ पर भी है” में उसकी पीठ मर हाथ फेरने लगा, वह थोड़ा झुकी l अब उस की नितंब  मेरी तरफ थे l फिर उसने अपने नितंबों से मुझे छूना शुरू कर दिया। मेरी उत्तेजना फिर से बढ़ने लगी। कुछ मिनटों बाद मेरा लिंग लगभग उसके नितंबों के बीचोंबीच पहुँच गया । मुझे यकीन था कि वह इसे महसूस कर रही थी। वह अभी भी अपने नितंबों को पायजामे पर दबा रही थी। यह सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा।

वह चुपचाप उबलती चाय को देख रही थी और मेरा दबा रही थी l शायद वह मेरी  परीक्षा लेना चाहती थी। लेकिन मैंने उतना ही किया जितना उसने किया।

“जीजू तुम अपने कपड़े बदल लो, में चाय लाती हूँ” उसने सीधी खड़े होते कहा l

मैंने स्नान किया और कपड़े बदले, फिर मै मेज की ओर जाने लगा , वह मेज़ पर बैठी थी, उसने नाश्ता भी तैयार कर लिया था l

नाश्ते के बाद मैंने ऑफिस का कुछ काम करने लगा । वह नहाने चली गई। सब कुछ सामान्य लग रहा था।

वाशरूम का दरवाज़ा पास में ही था, में आसानी से देख सकता था l वह अंदर गई लेकिन उसने दरवाज़ा पूरी तरह से बंद नहीं किया l मेरी उत्तेजना फिर बढ़ने लगी l 

“उसने दरवाजा बंद क्यों नहीं किया? क्या वह मेरी उत्तेजना को और बढ़ाना चाहती है?” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।

फिर उसने अपनी ब्रा बाहर टोकरी में फ़ेंक दी, फिर पैंटी,फिर बाक़ी सबकुछ l मैंने सिर्फ उसका हाथ देखा। फिर पानी गिरने लगा। दरवाजा अभी भी खुला था। मुझसे दो मीटर दूर वह नग्न थी, लेकिन रिश्तों की दीवार बहुत बड़ी थी।

तुम्हारी दीदी तो एकदम परफेक्ट है l लेकिन वह घर पर बहुत ज्यादा कपड़े पहनती हैं l हम अकेले रहते हैं, कुछ छोटे कपड़े पहन ले, कुछ मूड बना रहे, जे क्या? लंबी शर्ट और पायजामा, वह पैंटी भी तो पहन सकती हैं l

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