भाग-5
जीजू का साहसिक कदम साली जी के साथ
श्रेणी : जीजू और सालीजी
पढ़ने का समय: 4 मिनट | शब्द: 503
मे अपने कार्यालय में बैठा एक कहानी पढ़ रहा था l उस कहानी में जीजू साली के यौन संबंध के बारे में बताया गया था l आज कल में ऐसा ही कुछ तलाश रहा था l
लेखक बताते थे ” यदि सालीजी के मजाक में यौन संकेत हैं, तो यह समझा जाना चाहिए कि वह जीजू के साथ यौन संबंध बनाना चाहती है और उसे एक सुरक्षित व्यक्ति मानती है। वह जानती है कि जीजू के साथ उसका रिश्ता बहुत संवेदनशील है l”
“तो में उसका वो सुरक्षित लक्ष्य हूँ” में मन ही मन मुस्कुराय l रिश्ते की दीवार पार करना मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन उसका आकर्षक शरीर और कार्य मुझे व्याकुल करते थे l हर दिन में खुद पर से नियंत्रण खोता जा रहा था l लेकिन मुझे यकीन था कि वो खुद कुछ नहीं कहेगी l अगर मुझे वह चाहिए तो मुझे ही कुछ करना होगा, मगर क्या?
लेखक ने कहानी में बताया कि जीजू उसी तरह प्रतिक्रिया दे सकते हैं जैसे वह कर रही थी l
शाम को घर पर मै हमेशा की तरह ड्राइंगरूम में टीवी देख रहा था l
“जीजू, आपको कुछ चाहिए? ” साली जी ने मुस्कुरा कर पूछा l
“मुझे तो बहुत कुछ चाहिए।” मैंने कहा, जैसा कि लेखक ने अपनी किताब में कहा था ।
“जीजू, मुझे बताओ तुम क्या चाहते हो।”
“आओ बैठ जाओ ” मैंने उसे देखते मुस्कुरा कर कहा l
वह मेरे दाहिनी और कुर्सी पर बैठ गई l
“आप का दिन कैसा रहा? सालीजी , कुछ स्लिम लग रही हो,नो आइसक्रीम टुडे?”
मैंने चुप्पी तोड़ते हुए पुछा l वो झट से खड़ी हुई l
“स्लिम ,कहा से? जीजू l” उसने अपना शरीर घुमाकर कहा, मे चुप चाप उसे देखता रहा l फिर बह मेरे नज़दीक आई और मेरी दाहिंना बाजू जोर से खींचते बोली,
“बताओ ना जीजू l”
मुझे लगा कि वह मुझे छूने का बहाना ढूंढ रही थी l
मैंने अपना हाथ ढीला छोड़ लिया और यह उसके स्तनों को जोर से छू गया और वे तेजी से हिले l हमारी आंखे मिली l फिर बह चुप चाप कुर्सी पर बैठ गई l में अपने हाथ की मालिश करने लगा जैसे कि चोट लगी हो l में मन ही मन में मुस्कुरा रहा था l
“सॉरी साली जी,चोट तो नहीं आई?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा l वह चुप चाप बैठी रही l मुझे कुछ सफलता महसूस हुई l बह सिर झुकाये मुस्कुरा रही थी l
फिर हम खाना खाने रसोई में चले गये l साली जी मेरे सामने जा बैठी l साली जी भी कोई कम बोल्ड नहीं थी l जब भी में उस तरफ देख रहा होता वह अपने शरीर को थोड़ा जोर से हिलाती l आम तौर पर वह घर पर ब्रा तो पहनती नहीं थी l
अब मुझे एक बात पक्की लग रही थी। उसे पता था कि मैं उसके शरीर को और अधिक देखना चाहता हूँ। और मुझे उसकी ओर से कोई आपत्ति भी नहीं दिखी।
दरअसल, वह हमेशा मुझसे आगे रहती थी। मेरे सामने अंडरवियर और पायजामा में हाथ डालना कोई छोटी बात नहीं थी।
वो मेरी शर्ट साफ करने लगी, फिर पायजामा छूने लगी l मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह इस अवसर का लाभ उठाना चाहती थी। मैं खुद को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा था