मीना ने उन्हें घर में अकेले छोड़ने का फैसला किया।
श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ
पत्नी ने पति और बहन को एक-दूसरे को समझने के लिए समय देने का फ़ैसला किया।
समीर ने उसे सच बताने का फैसला किया। “बाबा, मेरी जिंदगी में बहुत सारी परे
अपने पति और बहन के रिश्ते के बारे में जानने के बाद मीना असहज महसूस कर रही थी। वह गुस्से में तो नहीं थी, लेकिन तलाक की बात करना भी उसके लिए आसान नहीं था। उसे यह भी नहीं पता था कि उनका रिश्ता कितना गहरा है। लेकिन वह जानती थी कि उसकी बहन को अच्छी तरह पता है कि उसके लिए, हमारे परिवार के लिए और मेरे लिए क्या अच्छा है।
उनकी शादी कई सालों से ठीक नहीं चल रही थी। वे सिर्फ पारिवारिक सम्मान और रीति-रिवाजों के कारण साथ थे। उनके बीच न तो प्यार था और न ही कोई भावना। वास्तव में वे अपना जीवन व्यर्थ ही बर्बाद कर रहे थे।
अब मीना मनोज के साथ एक कमरे में नहीं रहना चाहती थी। वह किसी को भी मनोज और उसकी बहन के रिश्ते के बारे में भी नहीं बताना चाहती थी।
उसने सोचा कि क्यों न उन्हें घर पर अकेले रहने का समय दिया जाए। अगर वे सचमुच एक-दूसरे को पसंद करते हैं और एक नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं, तो मनोज निश्चित रूप से तलाक के बारे में बात करना चाहेगा।
दोपहर बाद जब वह काम से लौटी तो उसने मनोज से कहा, “मनोज, मुझे काम के सिलसिले में यात्रा करनी है। मुझे अपने सहकर्मियों के साथ कुछ समय रुकना होगा। अगर आप चाहें तो रिया यहीं रुक सकती है, वह रसोई में आपकी मदद करेगी।
मनोज ने उससे कोई सवाल नहीं पूछा, जैसा कि वह हमेशा करता था। उसने बस हां कह दी।
मीना ने फिर पूछा, “मनोज, क्या तुम चाहते हो कि रिया तुम्हारे साथ रहे? मैं उससे बात कर लेती हूँ।”
मनोज ने कहा, “यह तुम पर निर्भर करता है, अगर तुम चाहो तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।”
“मुझे यकीन है कि उसे यहाँ रहना अच्छा लगेगा। वह तुम्हें पसंद करती है। मुझे आज शाम को जाना होगा। मेरे सहकर्मी मुझे लेने आएंगे।” मीना ने बताया l
“ठीक है। तुम रिया से बात करो। क्या तुम्हें कहीं मेरी मदद की ज़रूरत है?”
“नहीं मनोज, मुझे लगता है मैं खुद संभाल लूंगी।” मीना ने कहा और रिया के कमरे में चली गई।
मनोज थोड़ा हैरान हुआ। मीना काम की वजह से पहले कभी बाहर नहीं गई थी। लकिन उसके लिए रिया के साथ रहना ज्यादा महत्वपूर्ण था। मीना अब उसका अतीत थी।
शानियां हैं, लेकिन अभी मैं अपनी पड़ोसिन लिली के बारे में सोच रहा हूँ। मैं उसे पाना चाहता हूँ, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि कैसे।”
बाबा मुस्कुराए और बोले, “क्या तुम उससे प्यार करते हो या सिर्फ उसके शरीर को चाहते हो?”
समीर ने अपनी नज़रें झुका लीं और धीरे से बोला, “सिर्फ उसके शरीर को।”
“अच्छा, तो तुम उस सुंदर कन्या को कुछ बार और सुंदर बनाना चाहते हो?”
समीर हँस पड़ा और बोला, “बाबा, आप सब जानते हैं। मैं उसे छूना चाहता हूँ।”
बाबा चुप हो गए।
समीर बेसब्री से उनके जवाब का इंतजार करने लगा। वह जानता था कि कुछ बाबाओं के पास लोगों को प्रभावित करने की अद्भुत शक्तियाँ होती हैं। उसे उम्मीद थी कि बाबा का सुझाव लिली को उसके करीब लाने में मदद करेगा।
बाबा ने कहा, “ठीक है, तो तुम्हें मेरी मदद चाहिए?” समीर की आँखें चमक उठीं।
बाबा ने आगे कहा, “लेकिन मुझे भी बदले में कुछ चाहिए। तुम्हें उसे एक दिन के लिए मेरी झोपड़ी में मेरे साथ अकेले छोड़ना होगा।”
समीर हैरान होकर बोला, “क्या बाबा! वह मेरी है। मैं उसे आपके साथ कैसे छोड़ सकता हूँ?”
बाबा ने शांत भाव से कहा, “यह फैसला तुम्हें करना है। मैं कल फिर यहीं मिलूँगा।” इतना कहकर बाबा वहाँ से चले गए।