जब जीजू की पत्नी ने अपने पति और बहन की बातें सुनीं

जब जीजू की पत्नी ने अपने पति और बहन की बातें सुनीं

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

जीजू की पत्नी ने एक अजीब फैसला लिया – वह अपनी बहन के साथ उनके रिश्ते को रोकना नहीं चाहती थी।

जीजू और सालीजी रसोई में बैठकर धीरे‑धीरे बातें कर रहे थे।  मीना काम से जल्दी घर आ गई। वह इतनी चुपचाप अंदर आई कि जीजू और सालीजी को पता भी नहीं चला। दोनों अपनी बातों में इतने खोए हुए थे कि उन्होंने उसे देखा तक नहीं।

मीना दरवाज़े के पास  खड़ी रही और उनकी सारी बातें सुनती रही। उसने एक गहरी साँस ली और मन ही मन कहा 

“एक दिन तो ऐसा होना ही था…l ”

उसे पता था कि सालीजी जो कह रही थीं, वह सच था। वह अपने पति के साथ खुश नहीं थी। यह शादी उसके लिए अब सिर्फ एक बोझ बन चुकी थी— एक ऐसा बोझ जिसे वह सिर्फ परंपरा और परिवार की इज़्ज़त के लिए ढो रही थी।

उसे लगा कि उसकी बहन उससे कहीं ज़्यादा साहसी है।  वह जानती है कि उसे क्या चाहिए। वह लोगों की बातों और समाज के डर के खिलाफ जाने की हिम्मत रखती है।

मीना के मन में एक सवाल उठा—“मैं ऐसा क्यों नहीं कर सकती? मैं अपने लिए खुशी क्यों नहीं ढूँढ सकती?”

उसने धीरे से फुसफुसाया, “शायद मुझे भी एक बार फिर कोशिश करनी चाहिए…”

मीना ने मन ही मन फैसला कर लिया। वह न तो अपनी बहन को रोकेगी और न ही उनके रिश्ते का खुलासा करेगी।

उसे पता था कि अगर तलाक हुआ, तो उसका पति आसानी से किसी और को ढूँढ लेगा। लेकिन अगर उसकी बहन और उसका पति एक‑दूसरे को सच में समझते हैं और प्यार करते हैं, तो उन्हें रोकना गलत होगा।

हर इंसान को खुशी से जीने का हक है—यह बात मीना अब समझ चुकी थी।

मीना ने लंबी सांस ली और अपनी नम आंखों को पोंछा। वह हल्की मुस्कान के साथ रसोई में आई और उनके साथ चाय पीने बैठ गई।

“मुझे माफ़ करना, मनोज,” मीना ने धीरे से कहा, “मैं काम पर चली गई थी… और तुमने घर का सारा काम अकेले किया।”

मीना के मुँह से “माफ़ करना” सुनकर जीजू हैरान रह गया । उसे  याद नहीं था कि मीना ने कभी पहले उनसे माफ़ी 

माँगी थी। 

मीना ने यह दिखाने की कोशिश की कि उसने कुछ नहीं सुना और वह अभी काम से आ रही है।

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