खूबसूरत लड़की नूर की उलझन
श्रेणी: प्रेम और रिश्ते
पढ़ने का समय: 18 मिनट | शब्द: 2136
यह कहानी एक ऐसी युवती के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने परिवार की गरिमा की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। रिश्तों की जटिलताएँ और गलतफहमियों का जाल उसके जीवन को एक ऐसे मोड़ पर ले आता है जहाँ उसे एक असामान्य निर्णय लेना पड़ता है।
नूरा अपने कमरे में नए कपड़े पैक कर रही थी। वह अपने दोस्त को उपहार देना चाहती थी, तभी गोपाल उसके कमरे में आया और उसे पीछे से पकड़ लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा l
“तुम क्या कर रहे हो?, माँ, पापा जी, घर पर हैं, और तुम्हारी पत्नी भी!” नूरा ने उसे चेतावनी दी । उसे उसका छूना पसंद आ रहा था , वे दो महीने बाद मिले थे l
“क्या तुम्हें सच में मेरी याद आती है! ” नूरा ने प्यार से पूछा l
“हाँ प्रिय, मैं कभी नहीं चाहता तुम शादी करो और मुझे छोड़ कर चली जाओं!” गोपाल ने गंभीरता से कहा l
नूरा इक्कीस साल की जवान खूबसूरत लड़की थी, लंबे बाल, पतला शरीर l वह गोपाल से प्यार करती थी, वह भी उससे प्यार करता था लेकिन गोपाल पहले से ही शादीशुदा था l मीरा उसकी पत्नी थीं, नूरा और मीरा भी करीबी दोस्त थी l
नूरा का विवाह करीब दो माह पहले दूसरे गांव में हो गया था, उसका पति विदेश में नौकरी करता था, वह अपनी सास और ससुर के साथ रहती थी। गोपाल और मीरा उससे मिलने उसके घर आये थे l जब मीरा उनके साथ बात करने में व्यस्त थी, तो गोपाल चुपके से नूर के कमरे में चला गया था।
नूरl गोपाल के छोड़ना चाहती थी लेकिन उसका पति उसके साथ नहीं था, वह अब भी गोपाल को याद करती थी और उससे मिलना चाहती थी l उसने कई बार अपनी सहेली मीरा को मिलने के लिए बुलाया था ताकि वह गोपाल से मिल सके। मीरा को उनके गुप्त रिश्ते के बारे में पता नहीं था।
गोपाल अभी भी उसे छू रहा था। तभी उन्होंने बाहर कुछ आवाज सुनी l गोपाल उसे छोड़कर दूर खड़ा हो गया l नूरा ने कपड़े का पैकेज लिया और अपने कमरे से बाहर आई ,गोपाल उसके पीछे था l
नूरा पापाजी(ससुर )को अपने कमरे की खिड़की के बाहर देखकर दंग रह गई। उसके हाथ में फोन भी था और वह उसे गंभीरता से देख रहा था l नूरा बहुत डर गई थी और वह वहां से चली गई। उसे लगा कि उसके ससुर ने उसे गोपाल के साथ देख लिया था और शायद उन्होंने अपने फोन से उसकी तस्वीर भी खींच ली थी।
वह जानती थी, उसका ससुर वीडियो रिकॉर्ड करने में बहुत अच्छा था । अगर उसके ससुर ने वह वीडियो उसके पति को दिखा दिया, तो उसका तलाक निश्चित था। यह उसके परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका था l
वह गोपाल से कोई बात नहीं कर पाई थी, मीरा उसके साथ थी। वे अब अपने घर के लिए निकल चुके थे। नूर गहरे संकट में थी,तलाक हुआ तो मीरा को भी उनके रिश्ते का पता चलेगा, वह अच्छी दोस्त को भी खो देगी l
वह भी सोच रही थी कि पापाजी के लिए भी उससे या उसके बेटे से बात करना आसान नहीं होगा l यह उनके लिए भी एक बड़ा झटका था। दो महीने के विवाह के बाद कोई भी तलाक नहीं चाहता था l
वह जानती थी कि उसके पास ज्यादा समय नहीं था , उसे जल्दी से कुछ करना होगा, उसे हर सबूत मिटाना होगा और पापाजी को भी सहमत करना होगा l उसका पति आम तौर पर हर सप्ताहांत फोन करता था इसलिए उसके पास अभी भी पाँच दिन थे।
उसकी सासु नौकरी पर थी और सुबह घर से निकलती और करीब चार बजे वापस आती थी l ससुर सेना से सेवानिवृत्त था । वह घर से प्रॉपर्टी डीलर का काम कर रहा था। वह पचपन वर्ष का हृष्ट-पुष्ट स्वस्थ व्यक्ति था l
उसने ससुर जी को उत्तेजित करने का सोचा l यदि वह उसकी ओर आकर्षित हो जाता है तो वह अपनी समस्या का समाधान कर सकती थी और गोपाल से भी खुलकर मिल सकती थी।
सुबह जब उसकी सासू नौकरी पर चली गई और ससुर अपने कमरे में काम कर रहा था । नूर ने ससुर को उत्तेजित करने का फैसला किया l उसने चाय का कप लिया और उसका दरवाज़ा खटखटाया l
“अंदर आएं!” बह बोला l
“आपके लिए चाय,पापा जी!” उसने धीरे से कहा l
“अंदर आओ, नूर।”
उसने नूर की ओर देखा, उसके बाल खुले हुए थे, उसका गाउन उसके गोरे शरीर को उजागर कर रहा था। गाउन के नीचे उसके स्तन आजाद थे। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। कोई भी पुरुष कल्पना कर सकता था कि वह क्या चाहती है। लेकिन नूर ने इससे पहले कभी ऐसा कुछ नहीं किया था। ससुर को नहीं लगा कि वह उन्हें उत्तेजित करना चाहती है। लेकिन उसकी निगाहें उसके शरीर पर टिक गईं।
“पापा जी,चाय!” उसने थोड़ा शरमाते हुए कहा l
“हां,हां मेज़ पर रख दो , मुझे इसकी ज़रूरत थी!” उन्होंने मेज की ओर इशारा करते हुए कहा।
“पापा जी आप बहुत मेहनत करते!, मैं कुछ अपकी मदद करू?”
वह सामने दूसरी कुर्सी पर बैठ गई और न्यूज पेपर देखने लगी l
“आज मेरे पास ज्यादा काम नहीं है नूर!” उसने चाय पीते हुए कहा l
“नहीं,नहीं आप हमेशा काम करते हो, किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करते,जब तक आपकी चाय खत्म नहीं होती,मैं कहीं नहीं जाऊंगी!”
उसने अपना सिर हिलाया और अपने बाल पीछे फेंक दिये। वह अपने नग्न शरीर को और अधिक दिखाने की कोशिश कर रही थी। ससुर जी सब कुछ अनदेखा करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें बहुत असहज महसूस हो रहा था। शायद उनकी बूढ़ी पत्नी में अब वह आकर्षण नहीं रहा था। नूर गोरे, आकर्षक शरीर वाली एक युवा लड़की थी।
उसने चाय ख़त्म की और नूर कप लेकर चली गई l
वह भ्रमित था, नूर तो कभी उसके पास भी नहीं आती थी और वह हमेशा उसके देखने से पहले ही खुद को ढक लेती थी। ”आज इस लड़की को क्या हुआ?” उसने फुसफुसाते हुए कहा। फिर उसने सोचा, शायद वह अपने पति के स्पर्श को याद कर रही है।
वह और काम नहीं कर सका और लिविंग रूम में आ कर टीवी देखने लगा l नूर अपने बेडरूम में थी। वह बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसे टीवी की आवाज़ सुनाई दी l वह समझ गई कि ससुर जी लिविंग रूम में हैं। नूर जानती थी कि उसे इस आदमी को उत्तेजित करने के लिए और बहुत कुछ करना होगा।
बेडरूम का दरवाजा खुला था, वह बिस्तर पर थी l ससुर केवल उसके पैर ही देख सकता था। वह बिस्तर पर थोड़ा नीचे सरक गई। अब ससुर को उसका आधा शरीर दिखाई देने लगा। फिर उसने अपने पैर उठाने शुरू कर दिए। हर बार जब वह अपना पैर उठाती, तो उसका गाउन उसकी कमर पर गिर जाता। इससे उसकी लंबी , गोरी टांगे नितंबों तक दिखाई देने लगती। कई बार ससुर ने उसे नजर अंदाज किया, लेकिन उसकी छोटी तंग पैंटी और गोरी त्वचा उसकी उत्तेजना को बढ़ा रही थी।
उसने टीवी बंद किया और बेडरूम में चला गया। वह बहुत बेचैन महसूस कर रहा था। वह जनता था ,नूर को क्या चाहिए। लकिन वह उस को पकड़ नहीं सकता था। वह उसका ससुर था। नूर तो युबा थी। गलतियां कर सकती थी l
नूर अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई थी। वह जानती थी कि उसका ससुर परेशान और बेचैन है। उसे यकीन था कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने उसे गोपाल के साथ देखा था।
“वह बूढ़ा आदमी था और उसने जीवन में उसके जैसी कई लड़कियों को देखा होगा। यह संभव नहीं था कि वह आज की उसकी हरकतों के कारण बेचैन हो।” वह फुसफुसाई। नूर को कोई और विकल्प नहीं दिख रहा था। उसने सोचा कि उसे उत्तेजित करना जारी रखना चाहिए।
वह फिर उसके कमरे में गई और पूछा, “पापा जी, आप ठीक हैं?”
“हाँ नूर, मैं ठीक हूँ,” उन्होंने आँखें खोलते हुए कहा। वह बिस्तर पर लेटा हुआ था।
“नूर,तुम्हारी दोस्त कैसी है? तुम उससे बात कर रही थीं।”
“हाँ पापा जी। वह ठीक है। वह अपने सास-ससुर की मदद कर रही थी। उसने मुझे भी कहा कि मुझे पापा जी का ख्याल रखना चाहिए।”
“हां नूर, उसके पति गोपाल ने भी मुझे बताया था कि वह उसके माता-पिता का बहुत अच्छे से ख्याल रखती है।”
“हाँ पापाजी, वह भी मुझसे यही कह रही थी।”
“ मैं नूर अपने बेटे को फोन करने की सोच रहा हूं, मुझे उससे कुछ ज़रूरी बात करनी है।”
नूर कांपने लगी। उसे पता था कि उसके बुरे दिन दूर नहीं हैं। उसने गोपाल के साथ गलती कर दी थी।
उसने धीरे से कहा, “पापा जी, वो सिर्फ सप्ताहांत में ही खाली रहते हैं।”
“ हाँ नूर, लेकिन मुझे कुछ ज़रूरी बात करनी है, मैं जल्दी बात करना चाहता हूँ।” ससुर सोच रहा था, नूर अपने पति को याद कर रही है। अच्छा होगा अगर वो कुछ छुट्टियाँ लेकर वापस आ सके।
नूर और भी बेचैन हो गई। कुछ भी उसके पक्ष में नहीं हो रहा था।
“पापाजी, क्या आपको और चाय चाहिए? आप थके हुए लग रहे हैं।”
“ नूर, मुझे थोड़ी शराब पीनी है।”
“ ठीक है पापाजी। मैं आपके लिए गिलास और बोतल लाती हूँ।” नूर के लिए यह कोई नई बात नहीं थी। उसने पहले भी कई बार दिन में उन्हें शराब पीते देखा था।
ससुर ने शराब पीना शुरू कर दिया, नूर अपने कमरे में वापस आ गई।
“अब मैं क्या करूँ? काश वो खूब शराब पी ले। तब उसे बहकाना आसान हो सकता है।” वह फुसफुसाई l फिर वह नहाने गई। उसने एक सुंदर ब्लाउज और स्कर्ट पहनी। वह खुद को तैयार करने लगी। शायद आज उसे मौका मिल जाए। खुद को संवारने के बाद उसने अपने ब्लाउज का ऊपरी बटन खोला और उसके कमरे में चली गई। वह अभी भी शराब पी रहा था।
“पापा जी, आपको कुछ चाहिए?” उसने पूछा।
“नूर, इधर आओ, मेरे साथ बैठो। मुझे कुछ बात करनी है।” नूर डर गई और उसके पास बिस्तर पर बैठ गई।
“नूर, शायद तुम्हें मेरा दिन में शराब पीना पसंद नहीं है, लेकिन कुर्सी पर बैठते कभी-कभी मेरी कमर में दर्द होने लगता है। शराब से मुझे आराम मिलता है।”
नूर ने तुरंत कहा, “पापा जी, अगर आपको कहीं भी दर्द हो तो मैं मालिश कर सकती हूँ।”
“नहीं नहीं नूर, तुम्हारी माँ (सास) शाम को मेरी पीठ की मालिश करेंगी। उन्हें मालिश करना आता है।”
नूर को मौका दिखा। उसने फिर कहा, “पापाजी, मम्मी दिन भर काम करती हैं, वो थक जाती होंगी। मैं भी कोशिश करना चाहती हूँ। मेरे पास करने को कुछ नहीं है।”
ससुर मुस्कुराए और बोले, “ठीक है, अगर तुम कोशिश करना चाहो तो।” नूर ने देखा कि वह पहले ही कई गिलास पी चुके हैं। लेकिन उसे आश्चर्य हुआ कि उसने उसके खुले ब्लाउज पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
ससुर ने अपने कपड़े नहीं उतारे, बस पीठ के बल लेट गए। नूर थोड़ी परेशान हो गई। मन ही मन उसने कहा, “ये कैसा बूढ़ा आदमी है? कुछ भी समझ नहीं रहा।”
उसने अपना हाथ उसकी शर्ट के नीचे रखा और उसकी पीठ की मालिश करने लगी। वह मालिश कम ,उसे उत्तेजित ज्यादा कर रही थी।
कुछ मिनट बाद ससुर मुस्कुराए और बोले, “नूर, ऐसे नहीं। तुम्हें मालिश सीखनी चाहिए।” उन्होंने नूर का हाथ हटाया और बैठ गए। नूर चुपचाप उनके पास बैठी रही। उन्होंने गिलास में थोड़ी और शराब डाली और जल्दी से पी गए।
“नूर, कोई बात नहीं। तुमने सब ठीक किया। चिंता मत करो।” फिर नूर ने साहस दिखाया और आगे बढ़ने का फैसला किया। ससुर नशे में थे।
वह उसके पास पीठ के बल बिस्तर पर लेट गई। फिर उसने अपने ब्लाउज का पीछे का हुक खोलकर अपनी पूरी पीठ नंगी कर ली।
“कृपया मुझे मालिश करना सिखाओ पिताजी ,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। ससुर ने उसकी नंगी पीठ को देखा। उसकी स्कर्ट उसके नितंबों पर गिर रही थी, जिससे उसके अंतर्वस्त्र की झलक दिख रही थी। वह अपना संयम खो बैठा और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। धीरे-धीरे उसके हाथ स्कर्ट के नीचे जाने लगे। नूर की खामोशी धीरे-धीरे मधुर चीखों में बदलने लगी। दो शरीर एक होने लगे।
नूर अपनी योजना के अंतिम बिंदु पर पहुँच गई थी । उन्होंने कुछ घंटे बिस्तर पर बिताए। जब सब कुछ फिर से शांत हो गया, तो नूर ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“ससुर जी,मैं जानती हूं आपको मेरा और गोपाल का पिछले सप्ताह एक साथ कमरे मे मिलना पसंद नहीं,यह एक गलती थी। मैंने फैसला कर लिया है कि मैं उससे दोबारा बात नहीं करूंगी। मैं तुम्हारे साथ खुश हूं, तुमने तो कमाल कर दिया।”
ससुर ने उसके नग्न शरीर पर हाथ फैलाते हुए कहा। “नूर, वे अच्छे लोग हैं। वे तुम्हारे दोस्त हैं। मुझे कोई समस्या नहीं है। मैंने तुम्हारे और गोपाल के बीच कभी कुछ गड़बड़ नहीं देखी। तुम्हें क्यों लगता है कि मैं कुछ गलत समझ रहा हूं? मैंने तो तुम्हारे और गोपाल के बीच कुछ भी नहीं देखा। उनसे मिलते रहें l ”
“इसका मतलब,पापा जी को मेरे और गोपाल के बारे में कुछ नहीं पता । उनहोंने कुछ भी रिकार्ड नहीं किया था l” नूर फुसफुसाई और अपने आप पर हसीं, लकिन अब बहुत देर हो चुकी थी l वह जानती थी, जब भी ससुर चाहे, उसे उसकी बात माननी होगी।
जब उसने पेंटिंग की ओर देखा, तो वह यह देखकर दंग रह गई l यह बिल्कुल स्पष्ट उसकी नग्न पेंटिंग थी । उसने ध्यान से देखा, उसके बाएं स्तन पर निशान था, यह पेंटिंग में भी था।