शाम को बस में

शाम को बस में

श्रेणी: विशेष कहानियाँ

पढ़ने का समय: 3मिनट | शब्द:334 

कभी-कभी सच्चाई पर्दों के पीछे छिपी होती है।

   शाम का वक्त था। रागु काम से वापस लौट रहा था, बस काफी भीड़-भाड़ वाली थी। वह सीटों के बीच खड़ा था, सामने दो घंटे की लंबी यात्रा  थी। यह सफर उसे आरामदायक नहीं लग रहा था, लेकिन उसके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था।

खड़े-खड़े उसकी नजर पास ही बैठी एक लड़की पर पड़ी। वह लगभग तीस साल की लग रही थी, हेडफोन पहने हुए थी और उसकी आँखें बंद थीं। शायद वह इस शोरगुल भरी बस में संगीत सुनकर खुद को दुनिया से दूर कर रही थी। रागु की नजरें अनजाने में उसके उभरे हुए ब्रा पर टिक गईं। खिड़की से आती हवा उसकी कमीज़ को धीरे-धीरे छू रही थी, जिससे उसकी ब्रा के साथ बदन  दिखाई दे रहा था।

रागु के लिए यह यात्रा अचानक दिलचस्प हो गई। उसे लगा कि लड़की उसकी पोशाक या उसकी नजरों की परवाह नहीं कर रही थी। वह पूरी तरह से संगीत में खोई हुई थी। मन ही मन रागु ने फुसफुसाया, “वह बहुत मासूम लेकिन आकर्षक लग रही है। ऐसी गर्लफ्रेंड पाना आसान नहीं।”

उस लड़की को देखते हुए समय के गुजरने का एहसास तक नहीं हुआ। बस जब रुकी, यात्री बाहर निकलने लगे। रागु बस में कुछ देर रुकना चाहता था, ताकि वह देख सके कि लड़की किस दिशा में जा रही थी । उसे उम्मीद थी कि शायद किसी दिन उनका  मिलन फिर हो।

जब वह बस से बाहर आया, तो उसने देखा कि लड़की बस के बाहर खड़ी थी। उसने धीरे-धीरे उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए उसके पास जाने का फैसला किया। जैसे ही वह उसके पास पहुंचा, लड़की ने अचानक कहा, “रुको ।”

रागु ठिठक गया, यह उसके लिए बिलकुल अप्रत्याशित था। वह धीरे से बोला, “जी मैडम?”

लड़की ने गंभीर स्वर में कहा, “मुझे पता है कि तुम बस में क्या देख रहे थे। क्या तुम कुछ पैसे खर्च कर सकते हो? हम आज साथ सो सकते हैं।”

रागु इस बात को सुनकर स्तब्ध रह गया। वह बिना कुछ कहे बस को जाते हुए देखने लगा l

संदेश में उसके छोटे भाई की पत्नी की बिना कपड़ों वाली तस्वीर थी।और पूछा रही थी  कि वह अब कैसी दिखती है।

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