भाग-6
राहुल के कामुक सपने में साधना
श्रेणी : यौन सपने
पढ़ने का समय: 8 मिनट | शब्द: 909
गरम दोपहर थी। राहुल बिस्तर पर था। वह सोच रहा था कि वह साधना को कैसे पा सकता है। सोचते-सोचते उसकी आंखें बंद हो गईं और वह सपनों में खो गया।
उसने देखा कि साधना चुपचाप उसके कमरे में आई और उसके बिस्तर पर बैठ गई। वह कुछ मिनट तक चुपचाप बैठी रही। फिर उसने पूछा, “राहुल जी क्या आप मुझे पसंद करते हैं?”
“हाँ, लेकिन सच कहूँ तो मुझे आपके नितंब बहुत पसंद हैं। जब आप चलती हैं तो कोई भी पुरुष उत्तेजित हो सकता है।”
“मैं तुम्हें अपना सब कुछ देना चाहती हूँ, मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ, अगर तुम चाहो तो।” साधना ने शर्माते हुए कहा।
“तुम नीले पंजाबी सूट में बहुत खूबसूरत लग रही हो। लेकिन तुम्हारे नितंब टाइट पजामा में और भी अच्छे लग रहे थे।”
“मुझे पता था कि तुम सुबह मेरे नितंबों को देख रहे थे। मुझे पसंद था । कल मैंने भी पजामा में तुम्हारा कठोर लिंग देखा था । मुझे यकीन नहीं मेरे लिए था लेकिन अच्छा लग रहा था। मैं पकड़ना चाहता थी l“ साधना हँसी।
“तुम चाहो तो अभी पकड़ सकते हो, ये तयार है। पर मैं भी कुछ पकड़ना चाहता हूँ।” राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा।
“तुम क्या पकड़ना चाहते हो, राहुल जी ?”
“मेरे सामने आओ। मैं तुम्हें बताता हूँ।” साधना बिस्तर से उठी और शर्माते हुए राहुल के सामने खड़ी हो गई।
राहुल ने धीरे से उसकी कुर्ती ऊपर उठाई। नाभि के आसपास पेट की नरम त्वचा उजागर हुई। सलवार कूल्हे के चारों ओर कसी हुई थी । सफेद नाला उसकी सलवार में गिर रहा था। राहुल ने धीरे से उसकी सलवार बेल्ट को छुआ और सलवार से नाला बाहर निकाला।
“आह!! आप क्या करना चाहते हैं।” साधना ने गंभीरता से कहा। उसका चेहरा लाल हो गया ।
राहुल ने उसका नाला खींच दिया। उसकी सलवार खुल गई ,सफेद अंडरवियर और ऊपर से योनि के कुछ बाल उजागर होने लगे। उसने उसकी सलवार को पैरों तक सरका दिया। साधना ने तुरंत अपना हाथ अंडरवियर पर रखा और घूम गई। राहुल के सपनों का नितंब उसके सामने थे। लेकिन वह अभी भी सफेद अंडरवियर से ढका हुआ था। उसने कुछ देर तक देखा और फिर अंडरवियर को नीचे धकेलने की कोशिश की। साधना ने उसे रोक दिया।
“आह!! आह!! क्या सब कुछ अभी करना चाहते हो ,राहुल जी।”
“मुझे नहीं पता पर मैं अब तुम्हारे नंगे नितंबों को छूना चाहता हूँ l ” राहुल ने ज़ोर से उसका अंडरवियर नीचे सरका दिया। साधना धीरे से चिल्लाई पर उसने उसे रोका नहीं। राहुल ने धीरे धीरे उसके नितम्बों को सहलाना शुरू कर दिया। साधना का शरीर कांपने लगा। राहुल ने कुछ वक्त अपनी उंगली नितम्बों की मध्य रेखा और गुदा के आस-पास घुमाई, फिर उसने पीछे से उसकी योनि को पकड़ा और दबाया।
“आप क्या कर रहे है राहुल जी?” साधना धीरे से चिल्लाई, उसकी आवाज कामुकता से भरी थी।
राहुल ने उसकी चिल्लाहट को अनदेखा किया और उसकी योनि और नितंबों को छूता रहा । उसका लिंग पूरा उत्तेजित था । तभी साधना बिस्तर पर गिर पड़ी, राहुल ने उसके पैरों से उसकी अंडरवियर और सलवार निकाल दी। साधना की आँखें बंद थीं। होंठ थोड़े खुले हुए थे, योनि बालों के बीच चमक रही थी। टांगें और ज़्यादा खुल रही थीं। ऐसा लग रहा था कि वो लंबे और सख्त लिंग का बेसब्री से इंतज़ार कर रही है। राहुल ने अपना लिंग बाहर निकाला और साधना की टांगों में आ गया।
तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया, राहुल ने अपनी आँखें खोली और चारों ओर देखा, कमरा खाली था। उसका कठोर लिंग उसके पजामा से बाहर था, उसने तुरंत उसे अंदर छिपा लिया और कहा, “अंदर आओ माँ।”
साधना चाय लेकर अंदर आई। उसने राहुल की तरफ देखा। “क्या आप सो गए थे राहुल जी ?” राहुल ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। उसने वैसा ही नीला सूट पहना हुआ था जैसा उसने सपने में देखा था। उसने कांपते होंठों से उससे पूछा, “तुमने कपड़े कब बदले?”
“माँ ने काम शुरू करने से पहले कपड़े बदलने के लिए कहा , टाइट पजामा उन्हे अच्छा नहीं लगता। इसीलिए मैं आपके लिए चाय जल्दी नहीं ला सकी।”
“कोई बात नहीं,” राहुल उसके नीले सूट को देख , वह उलझन में था।
साधना ने जैसे ही चाय टेबल पर रखी और बाहर जाने लगी, राहुल बोला, “रुको साधना, ये चाय किसने बनाई,”
साधना रुकी और बोली, “मैंने बनाई है क्योंकि माँ आराम कर रही हैं।”
“आह ठीक है, आओ और मेरे साथ बैठो, मैं कुछ कहना चाहता हूँ l”
साधना गंभीर चेहरे के साथ बैठ गई। राहुल ने उससे पहले कभी इस तरह बात नहीं की थी। राहुल ने कुछ देर तक उसके चेहरे को देखा, दोनों की नज़रें मिलीं। साधना ने अपनी नज़रें नीचे कर लीं। राहुल लगातार उसका चेहरा देख रहा था l
साधना की बेचैनी बढ़ने लगी. “क्या मैंने कुछ ग़लत किया राहुल जी ?” उसने कांपते होंठों से पूछा।
“आप चाय बहुत अच्छी बनाती हैं, माँ से भी अच्छी। धन्यवाद। एक और बात, आप नीले रंग की ड्रेस में बहुत सुंदर लग रही हो ।”
साधना की आँखें खुशी से चमक उठीं। वह मुस्कुराई और शर्मा गई। यह कुछ ऐसा था जो वह राहुल से सुनना चाहती थी। वह कुछ भी जवाब नहीं दे सकी और मुस्कुराते हुए पूछा।
“क्या मैं अब जा सकती हूँ।” राहुल ने उसके चेहरा देखा , वह उस पर प्यार से गिर रही थी। वह बस मुस्कुराया। साधना गहरी मुस्कान के साथ चली गई। राहुल खुश और सहज महसूस कर रहा था, उसने वह किया जो उसने पहले कभी किसी अन्य लड़की के साथ नहीं किया था।
┃भाग – 7 ┃
रात का समय था, राहुल बिस्तर पर लेटा हुआ था। वह सोच रहा था कि उसकी माँ ने शाम को क्या कहा था।