प्यासी नौकरानी हीरी -भाग 11

प्यासी नौकरानी हीरी -भाग 11

प्यासी नौकरानी हीरी -भाग 11

जानकी एकदम चुपचाप बैठी थी। राजन मन ही मन बातें कर रहा था। अब मिस जानकी  के पास कहने को कुछ नहीं था क्योंकि उसकी योनि खुली हुई थी और उसके वीर्य से भरी हुई थी।  जब वे अपने घर के पास पहुँचे, तो राजन ने कहा, “जानकी, हीरी को कुछ मत बताना। मैं उसे सही समय पर बता दूँगा।” जानकी ने धीरे से हाँ कहा। 

फिर उसने कहा, “सर, क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूँ?”

 “हाँ जानकी। क्यों नहीं?” 

जानकी कुछ देर चुप रही। “सर, क्या आप अब भी मुझसे शादी करना चाहते हैं?”

“हाँ, कुछ नहीं बदला है। मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और मैं हमेशा तुम्हारे परिवार के साथ खड़ा रहूँगा।”

“ठीक है सर, मैं अपनी माँ को कुछ नहीं बताऊँगी।” जानकी ने धीरे से कहा। अब वह काफी सहज महसूस कर रही थी।

राजन अपने घर आया। हीरी उनका इंतज़ार कर रही थी। “सर, जानकी आप के साथ  कैसी रही?” 

“हीरी। वह बहुत अच्छी है, वह अपने घर जाना चाहती थी । मैंने उसे वहाँ छोड़ दिया।” 

“अच्छा ठीक है सर। आपको कुछ चाहिए या मैं घर जाऊँ?”

 “हीरी, घर जाओ, मैं अब थक गया हूँ। मुझे सोना है। कल फिर मिलेंगे और बात करेंगे।”

दो दिन बाद जानकी राजन के घर आई। 

“हैलो सर,” जानकी ने धीरे से कहा। राजन ने देखा कि जानकी बहुत अच्छे से सजी-धजी थी। उसकी त्वचा दमक रही थी।

 “हैलो जानकी। कैसी हो? इधर आओ और बात करो।” राजन उसे अंदर ले गया। उसने उसे जोश से चूमा। जानकी ने भी साथ दिया। राजन ने उसके स्तनों को सहलाया और कहा, “मैं तुम्हें बहुत याद कर रहा था।” जानकी शर्मा गई और मुस्कुराई। 

राजन ने उसका सूट उठाया और उसकी योनि को छुआ। “चलो बेडरूम में चलते हैं।”

 जानकी समझ गई कि राजन क्या चाहता है। उसने चुपचाप अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर लेट गई। राजन ने उसे फिर से चूमा और धीरे-धीरे अपना लिंग उसकी योनि में डाला। इस बार राजन ने उसके साथ प्यार और जुनून से संभोग किया। कोई आक्रामकता नहीं, कोई चोट नहीं। उसने उसके स्तनों और होंठों को कई बार चूमा। जब राजन ने अपनी वीर्य से उसकी योनि भर दी, तो जानकी बहुत संतुष्ट और खुश दिखी।

राजन ने उसे फिर चूमा और कहा, “मुझे माफ़ करना जानकी। पिछली बार मैं बहुत आक्रामक हो गया था। मुझे तुम्हारी कसी हुई योनि बहुत पसंद है। तुम्हारा शरीर अद्भुत है। 

जानकी, कल तुम और हीरी नए घर में शिफ्ट होने वाले हो। एक साल बाद वो घर हमेशा के लिए तुम्हारे का  परिवार बन जाएगा। हीरी उसकी  मालिक होगी , मैं नहीं।” 

“शादी के बारे में आप क्या ख्याल है,सर ? क्या हमारी शादी दो महीने में होने वाली है?” 

“जानकी, मैं भी तो चाहता हूँ, लेकिन एक छोटी सी समस्या है। मैंने अपनी बहन से हमारी शादी के बारे में बात की। उसने कहा कि उसने किसी धार्मिक व्यक्ति से पूछा है। यह  साल मेरी शादी के लिए अच्छा नहीं है, अगले साल फरवरी के बाद का समय मेरे लिए अच्छा रहेगा। इसलिए हमें कुछ महीने और इंतजार करना होगा।” 

जानकी ने कहा कि वह समझती है क्योंकि उसका परिवार भी इन बातों पर विश्वास करता है।

“लेकिन हम शादीशुदा जोड़े की तरह रहेंगे। आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।”  जानकी राजन की बात समझ गई। उसने उसे चूमा और कहा, “मुझे तुम्हारा लिंग और वीर्य फिर से चाहिए।” 

राजन ने चतुराई से शादी का विचार टाल दिया। अब वह जानकी और हीरी दोनों के साथ शारीरिक संबंध का आनंद ले रहा था। एक रात  राजन ने हीरी को जानकी के साथ अपने यौन संबंध के बारे में बताया। हीरी ने कोई आपत्ति नहीं जताई।

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