भाग-1
नटखट साली जी और उसके चंचल अंग
श्रेणी : जीजू और सालीजी
पढ़ने का समय: 8 मिनट | शब्द: 1099
दोपहर का समय था मै l अपनी बीबी के साथ सुसराल जा रहा था l हमारी शादी को दो ही महीने हुऐ थे l ससुर को गुजरे कुछ वर्ष हुऐ थे l ऐक छोटी साली थी l मेरी सास एक स्कूल में खेल शिक्षिका थीं l हमारा घर सुसराल से काफ़ी दूर था l मेरे पास कुछ छुट्टियां बाकी थी और बीबी तो पहले से ही तेयार बैठी थी l
मुझे बहा जाना कुछ ज्यादा अच्छा नहीं लगता था, ससुर ज कोई साला तो था नहीं l अपने साथ लैपटॉप रख लिया था कुछ ऑफिस का काम करलूँगा,बोर होने से तो अच्छा l
बीबी बोली अजी लंच हम माँ के घर पर ही करेंगे, मैने फोन पर बोल दिया था l रास्ते मे हम कहीं रुके नहीं,कुछ घंटे मे ही हम पहुंच गए l सासु और साली जो पहले से हमारी इंतजार कर रही थी l नमस्कार किया और अंदर बैठने को कहा,पहली बार सुसराल आया था, चुप रहना ही ठीक लगा l
बीबी बोली,माँ हम पहले लंच करेंगे बहुत भूख लगी है l मैने भी बिना कुछ कहे सिर हिला दिया l
साली मज़ाक मे बोली, “आई! हमारे जीजा जी को बहुत भूख लगी है क्या दीदी खाना नहीं देती l”
साली जी कोई अठारह वर्ष की थी l फुटबॉल खेलती थी l अच्छा आकर्षक शरीर था।
मैने मुस्कराते हुऐ बोला, “नहीं,नहीं साली जी, तुम्हारी दीदी तो बहुत अच्छा खाना बनाती है, बो तो हमे आप सब से मिलने की जल्दी थी इस लिए हम कही रुके नहीं l”
साली ने मुस्कराते हुऐ बाहे आगे बड़ाई और मुझे हल्का सा बांहों मे पकड़ लिया, जैसे ही उसका शरीर मेरे साथ टच हुआ मेरे अंदर ऐक बिजली सी दौड़ी l
“खाना तेयार है” सासु ने आवाज़ लगाई l बीबी जो वाशरूम मे थी बो भी अब बहार आ गई , हम सब खाना खाने चलने लगे l
मेज़ पर साली जी और सासु जी मेरे सामने बैठी थी और बीबी मेरे बगल मे l मेरी भूख तो साली जी को देख कर ही उड़ गई थी l टॉप में उसके फ्री स्तन मुझे आकर्षित कर रहे थे। मेरी उन्हे और देखने की इच्छा बढ़ती जा रही थी l मैं बही खाना ले रहा था जो उसके नज़दीक था l बीबी जो क़ल फूलों का बगीचा थी अब ऐक सूखे फूल से बी कम नजर आ रही थी l
“जीजा जी कहा खो गय,कैसा लगा हमारा खाना?” साली जी मेरी और देख कर बोली l
“चुप कर,बहुत बोलने लगी है l” मेरे कुछ बोलने से पहले बीबी बाेल पड़ी l
मन ही मन मे थोड़ा डरा,कही साली को पता तो नहीं चल गया मै कहा देख रहा था l फिर मैंने सोचा, यह तो सामान्य बात है। हर लड़की जानती है कि लड़के हमेशा उनके शरीर पर ध्यान देते हैं।
सभी खाना खा कर उठ गए l मैने क्या खाया बो सब तुम्हे पता चल ही गया होगा l
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शाम का समय था l मै और मेरी बीबी छत पर टहल रहे थे l
“क्या, चाय बनाऊ जीजा जी?” साली जी पूश्ती छत पर आई l
मेरे ना कहने पर बह छत पर ऐक कोने मे खड़ी होकर नीचे देखने लगी l उसकी गोल नितंब तंग पजामा से साफ नज़र आ रहे थे l पजामा बीच फ़सा हुआ था,बीच की गहरी दरार बहुत आकर्षक थी।
अचानक उसने नीचे कुछ देखा और बह अपनी ऐक टांग को मोड़ने लगी और उसके नितंबों का एक हिस्सा ऊपर – नीचे होने लगा । सालीजी की हरकतें मेरा ध्यान खींच रही थीं, इससे मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी।
मेरी पत्नी को मेरी स्थिति समझ आने से पहले ही मैं फ्रेश रूम में चला गया।
कुछ मिनट बाद जब मैं बाहर आया। साली जी कूदती हुई पास आ कर बोली “जीजू नीचे आइसक्रीम बाला आया है चोलो आइसक्रीम खाते है l”
“हां हां चलो l” हम सब नीचे उतरने लगे l
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सूरज छिप गया था और अंधेरा छा रहा था, मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था।
छत पर दो बैडरूम थे और बीच मे वाशरूम था जिसका दरबाजा दोनों बेडरूम को जाता था l बीबी ने ऊपर सोने का निर्णय लिया l वह नहीं चाहती थी कि बिस्तर पर हमारी आक्रामक गतिविधियों को कोई सुने।
सालजी की गतिविधियां और शरीर अभी भी मेरे दिमाग में घूम रहा था।l बीबी वाशरूम से बाहर आई और मेरे पास बिस्तर पर बैठ गई l
“क्या बात है? आज तो बड़े मूड मे लगते हो l” उसने मेरी पजामा की ओर देखा और कहा।
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सुबह लगभग पांच का समय था मेरी आँख खुली l कमरे मे कुछ रौशनी आ रही थी l बीबी पूरी नींद मे थी l मन ही मन मे मैं सोच रहा था ,सोती हुई बीबी कितनी अच्छी लगती थी l
फिर मै बेड से बिना कोई शोर किए वाशरूम की तरफ बढ़ा l जैसे ही मेने वाशरूम मे प्रवेश क्या तो देख कर चौंक गया l सामने साली जी ब्रश ले कर खड़ी थी l उसने सिर्फ अंतर्वस्त्र पहन रखे थे, जिनसे उसका लगभग पूरा शरीर दिख रहा था। मैं उसके अंगों के आकार का आसानी से अनुमान लगा सकता था। वह भी मुझे ऐसे देख रही थी जैसे उसे मेरे वहां आने की कोई उम्मीद न हो।
मैं भी पूरी तरह नग्न था और मैंने देखा कि वह मेरी टांगों के बीच ध्यान से देख रही थी। मुझे अभी भी थोड़ी उत्तेजना थी, जैसा कि हर पुरुष को सुबह होती है। जब हमरी नज़र मिली तो बह अपने कमरे मे भाग गई l
मै अपने कमरे मे बापस बिस्तर पर लेट गया l मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था।
“कितने बज़ गए l” बीबी ने आँखें खोलते पूछा l
“छह” वह जाग गई, फिर हम नाश्ते के लिए नीचे की ओर चलने लगे।
अब साली जी की बातो मे पहले बाला जोश नहीं था l उसकी आँखों मे तो शर्म थी लेकिन बॉडी मे लचक कहीं अधिक थी l मुझे पूरा यकीन था कि मेरा नग्न शरीर भी उसके दिमाग में घूम रहा होगा। उसने मुझे बहुत ध्यान से देखा और वह आसानी से उसके आकार का अंदाजा लगा सकती थी।
नाश्ते के बाद हम जाने के लिए तैयार थे। मेने अपना बैग उठाया l साली जी ने पहले बहन को और फिर मुझे बाहो मे लिया l
सासु जी बोली, ” कुछ दिन और रुक जाते हमें और अच्छा लगता l”
“हा,हा” साली जी भी बोल पड़ी l
“अरे आप भी आये हमारे “मैंने सालिजी को देखते हुए कहा।
“हाँ,में अपनी गर्मी की छुट्टियों में आऊंगी “साली जी ने मेरी और हल्का मुस्कराते हुए बोला l मुझे ऐक उम्मीद की किरण नजर आई l फिर हम गाड़ी में बैठ घर को जाने लगे l
उसने मेरी ओर देखा, फिर अपने सूट की और देखा l वह मुस्कुराई l उसने कुछ भी छिपाने की कोशिश नहीं की। मुझे लगा कि वह अब फूल और धीरे-धीरे इकट्ठा करने लगी है।