अनकही चाहत-तीन देवरों के साथ कुछ पल

अनकही चाहत-तीन देवरों के साथ कुछ पल

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

उस शाम जब  समय थम गया

अंजिल ने अपना सिर मेज़ से उठाया। उसने खिड़की के बाहर देखा। उसकी खिड़की पर सूरज की रोशनी कम हो रही थी। उसने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया; वह बार-बार उसके ब्लाउज़ से खिसक रहा था। उत्तेजना की किसी अनजान लहर के कारण उसका ब्लाउज़ और भी ज़्यादा तंग हो रहा था। 

उसके तीनों देवर अपने कमरे में बातें  कर रहे थे। वे उसका सम्मान करते थे, लेकिन कुछ दिनों से अंजिल को लग रहा था कि उनका नज़रिया बदल रहा है। वे उससे कुछ ज़्यादा की उम्मीद कर रहे थे—कुछ ऐसा जो सेक्स से जुड़ा था। 

अंजिल भी उन्हें पसंद करती थी; वे जवान और मज़बूत थे। उनका बड़ा भाई घर पर नहीं था। अंजिल कई महीनों से अकेली सो रही थी और पिछले कुछ दिनों से उसे अकेलापन महसूस हो रहा था।

एक दिन अंजलि ने छिपकर अपने शरीर के बारे में उनकी बातें सुनीं। किसी को उसके आकर्षक कूल्हे और चलने का अंदाज़ पसंद था, तो किसी को उसके होंठों और स्तनों को चूमना अच्छा लगता था। उस दिन के बाद अंजिल फिर से अपने शरीर का अधिक ध्यान रखने लगी । वह अपनी त्वचा और संवेदनशील अंगों को मुलायम बनाने के लिए तेल का इस्तेमाल करती  और जहां जरूरत होती  वहां शेव भी करती ।

वह खुद को तैयार कर रही थी, लेकिन उसे पता नहीं था कि किसके लिए। उसका पति तो आ नहीं रहा था। उसे यह भी यकीन था कि उसके  देवर उसे छुएगे  नहीं।

आज उसके बेचैन मन को ऐसा लग रहा था जैसे वे बिस्तर पर उसका इंतज़ार कर रहे हों। उसके मन में एक डर भी था। क्या होगा अगर वे तीनों उस पर हावी हो गए ? क्या वह उन सभी को संतुष्ट कर पाएगी ? अगर वे उसके शरीर को ज़ोर से नोचने लगे ? क्योंकि जब बिस्तर पर एक लड़की के साथ तीन मर्द हों, तो उनका जोश और आक्रामकता बढ़ सकती थी।

इन सवालों का जवाब जाने बिना, अंजलि की नज़रें बार-बार उनके  के कमरे की ओर जा रही थीं। उसकी  तीव्र प्यास और उत्तेजना  उसे सभी रीति-रिवाजों और डर को तोड़ने के लिए मजबूर की रही थी। वह टेबल से उठी और अपने कमरे में चली गई। उनके  के कमरे में जाने से पहले उसने खुद को तैयार किया।

“देवर जी, आप क्या कर रहे हैं? क्या आप मेरे बारे में बात कर रहे थे ?” वह मुस्कुराई और उनके पास बिस्तर पर बैठ गई। 

समित ने कहा, “नहीं-नहीं भाभी जी, अब हमे  बातें  उत्तेजित नहीं करती ।” वह उसका मंझला देवर था। सब हँस पड़े। 

“मुझे बताइए कि आप मेरे बारे में क्या बात कर रहे थे? मैं भी सुनना चाहती हूँ।” अंजिल ने अपने ब्लाउज़ से साड़ी का पल्लू गिराते हुए कहा। उसका ब्लाउज़ बहुत टाइट लग रहा था। उसके ऊपर के दो बटन पहले से ही खुले हुए थे। किसी को नहीं पता था कि अंजिल ने उन्हें खुद खोला था या वे अपने आप खुल गए थे। तीनों ने एक साथ उसके ब्लाउज़ की ओर देखा। अंजलि मन ही मन मुस्कुराई।

“हाँ, तो आप मेरे बारे में क्या बात कर रहे थे?” अंजिल ने फिर पूछा। 

“भाभी, हमारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है; हम तो बस वैसे ही बात कर रहे थे जैसे लड़के अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में करते हैं।”  समित ने कहा—वह उनका छोटा देवर था।

फिर वह अपने तीनों देवरों के बीच बिस्तर पर लेट गई। “तुम्हारा बिस्तर बहुत सख़्त है, तुम इस पर कैसे सोती हो?” देवरों की आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने अंजिल को पहले कभी इस तरह लेटे हुए नहीं देखा था। उनकी नज़रें उसके शरीर पर घूमने लगीं। साड़ी का पल्लू बिस्तर पर गिर गया था। उसके आधे खुले ब्लाउज़ से उसका मुलायम शरीर और भी साफ़ दिख रहा था। पतली कमर के बीच उसकी गहरी नाभि देवरों की उत्तेजना बढ़ा रही थी।

“देवर जी, कुछ तो कहिए।” अंजिल पेट के बल लेट गई। उसके बड़े-बड़े गोल नितंब उनके सामने थे। उसकी पीठ लगभग नंगी थी।

“हमें समझ नहीं आ रहा कि क्या बात करें। हमने पहले कभी आपका शरीर इतने करीब से नहीं देखा। हम चाहते हैं…l”  संजू ने कहा , वह उसका बड़ा देवर था।

अंजिल मुस्कुराई और अपने कूल्हों को एक तरफ खिसकाया। “तो तुम क्या चाहते हो…?”

अमित ने कहा, “हम तुम्हारे शरीर को छूना चाहते हैं… लेकिन हमें डर लग रहा है…l” 

अंजिल हंसी और फिर पीठ के बल लेट गई। उसने बिस्तर पर अपने हाथ फैला दिए। वह खुद को उन्हें सौंपने के लिए तैयार थी। 

“आओ और मुझे जैसे चाहो, वैसे छुओ।”

तीनों देवरों ने एक-दूसरे की ओर देखा। सब कुछ साफ़ था; भाभी ने उन्हें अपनी इच्छा बता दी थी।

अमित, जो सबसे छोटा और सबसे चंचल था, अंजलि के बिल्कुल करीब सरक कर आया। उसने अपनी नजरें उसकी आँखों में डालीं और धीरे से मुस्कुराया। “तुम आज बहुत शांत लग रही हो,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। अंजिल ने उसकी ओर देखा और हल्का सा हँस पड़ी। 

अमित ने बिना किसी देरी के झुककर उसके होंठों को बहुत ही कोमलता से चूम लिया। यह चुंबन धीमा था, लेकिन इसमें एक ऐसी गर्माहट थी जिसने कमरे के माहौल को एकदम से बदल दिया।

वहीं दूसरी तरफ, संजू ने धीरे से अपना हाथ अंजलि के पेट पर रखा और अपनी उंगली से उसकी नाभि को छुआ।  उसका स्पर्श हल्का था, लेकिन उसमें एक अधिकार और अपनापन था। अंजलि ने एक गहरी सांस ली और अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे संजू के हाथ की वह गर्माहट महसूस हो रही थी जो उसके शरीर में एक सिहरन पैदा कर रही थी। 

समित, जो अब तक चुपचाप उन्हें देख रहा था, उसने अंजलि का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसकी उंगलियों को हल्के से सहलाने लगा।

उनके बीच की दूरी अब लगभग खत्म हो चुकी थी। कमरे की उस धुंधली रोशनी में उनकी सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। अमित का चुंबन अब और गहरा हो रहा था, और संजू का हाथ अब उसके पेट पर धीरे-धीरे घूमने लगा था। उन सबके बीच एक ऐसा मौन था, जिसमें ढेर सारी बातें और इच्छाएं छिपी हुई थीं। 

अंजलि ने अपनी आँखें खोलीं और एक-एक करके तीनों के चेहरों को देखा। उनकी आँखों में उसके लिए बेइंतहा प्यार और एक ऐसी प्यास थी, जिसने अंजलि के दिल की धड़कनों को और तेज कर दिया। समित ने उसके हाथ को अपनी ओर खींचते हुए उसके गले पर एक हल्का सा चुंबन दिया, जिससे अंजलि के पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। अब यह सिर्फ एक शुरुआत थी; उनके बीच का वह खिंचाव अब एक ऐसी लहर बन चुका था जिसे रोकना नामुमकिन था।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनके स्पर्श और अधिक बेबाक होने लगे। फिर अमित अंजलि के  ब्लाउज के बाकी बटन खोलने लगा, जबकि संजू के हाथों की गर्माहट अब उसके पेट से नीचे की ओर सरकने लगी थी। 

अंजलि ने कोई विरोध नहीं किया, फिर संजू  उसके बहुत संवेदनशील अंगों को छूने लगा।अंजलि समझ गई कि अब उसे कपड़ों की ज़रूरत नहीं है। उसने अपनी साड़ी खोलने की कोशिश की, जो संजू के हाथों से पहले ही ढीली हो चुकी थी

कपड़े धीरे-धीरे बिस्तर पर बिखरने लगे l अमित की चंचलता अब एक गहरे जुनून में बदल चुकी थी, और संजू का ठहराव अब एक उग्र इच्छा में। समित ने अंजलि के कानों में कुछ मीठे शब्द कहे, जिसने उसे पूरी तरह से उनके हवाले कर दिया। वे चारों अब एक-दूसरे के साथ पूरी तरह से एक हो चुके थे, जहाँ सिर्फ प्यार, समर्पण और एक-दूसरे की चाहत बची थी।

बिस्तर की उन सिलवटों के बीच, वे बारी-बारी से संबंध बनाने लगे। अंजिल के खुले हाथ और पैर सबका स्वागत कर रहे थे। तीनों देवरों का अंदाज़ और आकार अलग-अलग था, जिससे उसे कई तरह का आनंद मिल रहा था।अंजिल आज थकना नहीं चाहती थी। देवर उसके शरीर को अपनी मर्ज़ी से घुमा रहे थे।

कोई उसके पैर ज़्यादा से ज़्यादा फैलाना चाहता था, कोई उसके पैर उठाना चाहता था, और समित, जिसे हमेशा उसके कूल्हे पसंद थे, उसने पीछे से उसे छूने की कोशिश की।

हर स्पर्श में एक नया एहसास था और हर चुंबन में एक नया वादा। कमरे की वह ठंडी हवा अब उनकी शरीर की गर्माहट से तपने लगी थी, और वे इस जादुई पल में पूरी तरह डूब गए, जहाँ दुनिया की बाकी हर चीज़ उनके लिए बेमानी हो गई थी।

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