भाभी और देवर की वह शांत सुबह

भाभी और देवर की वह शांत सुबह

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

भाभी को मिला देवर का खास तोफा

सुबह का समय था। अंजलि ने चाय बनाई और अपने देवर समित के कमरे में गई। समित आमतौर पर देर तक सोता था और दोपहर के बाद काम पर जाता था। जब अंजलि उसके कमरे में दाखिल हुई, तो वह अभी भी बिस्तर पर था। उसकी आँखें बंद थीं। अंजलि को पक्का पता नहीं था कि वह सो रहा है या नहीं। जैसे ही वह उसे जगाने के लिए आगे बढ़ी, अचानक उसकी नज़र उसके पजामे पर पड़ी।

उभरा हुआ पजामा देखकर अंजलि चौंक गई और उसके मुँह से अनजाने में ही “ओह!” निकल गया। उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उसने पहले कभी पजामे में ऐसा उभार नहीं देखा था। वह स्तब्ध होकर देखती रही; सुबह-सुबह समित पूरी तरह उत्तेजित था। अंजलि के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। उसने चाय की ट्रे एक तरफ रख दी और बिस्तर के किनारे बैठ गई। समित की आँखें अभी भी बंद थीं। अंजलि कई दिनों से अकेली सो रही थी और उसके भीतर दबी हुई तड़प उसे बेचैन कर रही थी।

कुछ दिन पहले उसने समित को अपने भाइयों से उसके बारे में बात करते हुए सुना था। उसके भाई उसे चेतावनी दे रहे थे कि वह उनसे पहले भाभी को हाथ न लगाए, क्योंकि वे खुद पहले उसे पाना चाहते थे। उन्होंने हँसते हुए कहा था कि अगर समित ने पहले पहल की, तो भाभी उन्हें कभी पसंद नहीं करेंगी। तब समित ने जवाब दिया था कि यदि उसका साइज़ इतना बड़ा है तो वह कुछ नहीं कर सकता; यह भाभी पर निर्भर करता है कि वह पहले किसे पसंद करती हैं। 

आज सब कुछ अंजलि के सामने था।

वह मन ही मन सोच रही थी कि क्या करना सही रहेगा—समित को छूना या पहले उसे जगाना। उसके भीतर एक द्वंद्व चल रहा था, जहाँ इच्छा और नैतिकता के बीच एक महीन रेखा थी।

अचानक उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई—क्या पता समित सहमत न हो? हो सकता है कि वह बस अपने भाइयों के साथ मज़ाक कर रहा हो, और यह सब सिर्फ एक गलतफहमी हो। 

फिर उसने सोचा कि बिना सहमति के किसी को छूना अनैतिक है। समित अभी भी गहरी नींद में था। वह दबे पाँव बिस्तर के पास आई और धीरे से उसके बगल में लेट गई। उसने अपना हाथ उसकी छाती पर रखा और उसे हल्के से झकझोर कर जगाने लगी। 

समित ने अपनी आँखें खोलीं। जैसे ही उनकी नज़रें मिलीं, अंजलि ने बिना एक शब्द कहे अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। समित ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और अपना हाथ उसकी कमर और पेट पर फेरा। अंजलि के गले से एक दबी हुई आह निकली। समित ने उसे अपनी बाहों में कसकर भर लिया।

कुछ ही पलों में, कमरा अंजलि की उत्तेजित आवाज़ों से गूँजने लगा। उसकी आवाज़ में समर्पण और तीव्र भावनाएँ थीं। जब समित शांत हुआ और कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया, तो अंजलि की आँखें खुशी और तृप्ति से नम थीं। उसने धीरे से कहा, “समित, यह अद्भुत था।”

समित मुस्कुराया और बोला, “भाभी, मेरे बिस्तर पर आने के लिए आपका शुक्रिया। मुझमें आपको छूने की हिम्मत नहीं थी, भले ही मैं हर रात आपके ख्यालों में खोया रहता था। मैं सो नहीं रहा था और जानता था कि आप मुझे देख रही थीं। मैं बस यही प्रार्थना कर रहा था कि आप वापस न जाएँ।” 

अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब बातें करने में समय बर्बाद मत करो। मैं तुम्हारे साथ हूँ। मुझे जाने मत दो। मुझे आपका सुपर किंग पसंद आया।”

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