भाभी और उनके तीन देवर-फिर वो बारिश

भाभी और उनके तीन देवर-फिर वो बारिश

श्रेणी : इंटरैक्टिव कहानियाँ

भाभी की अनकही चाहत

अंजिल अपने शयनकक्ष की खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर देख रही थी। आसमान में काले घने बादल छाए हुए थे और बहुत तेज बारिश हो रही थी। बारिश की बूंदें खिड़की के कांच से टकराकर नीचे गिर रही थीं। तभी उसकी नजर मुख्य दरवाजे की ओर गई, जहां उसका छोटा देवर अमित दौड़ते हुए घर की तरफ आ रहा था। वह सिर से पैर तक पूरी तरह भीगा हुआ था और उसके कपड़े शरीर से चिपक गए थे। 

अमित को इस हालत में देखकर अंजिल के मन में एक अजीब सी हलचल और उत्तेजना दौड़ उठी। उसका पति पिछले कई दिनों से काम के सिलसिले में शहर से बाहर गया हुआ था, और वह रोज रात को अकेले सोकर थक चुकी थी। उसके तीनों देवर हमेशा किसी न किसी बहाने से उसके आसपास ही घूमते रहते थे। फिर वे उसके शरीर को और अधिक देखने का अवसर तलाशते  थे। 

अंजिल सावधान रहती  थी। वह उन्हें उत्तेजित नहीं करना चाहती थी। वह जानती थी कि अगर वे उसे पकड़ लेते हैं, तो वह कुछ नहीं कर पाएगी। यह उसके लिए दर्दनाक हो सकता था । वे जवान और मजबूत दिखते थे। 

दरअसल, अंजिल भी वही चाहती थी जो वे चाहते थे। वह उनसे संबंध बनाना चाहती थी, लेकिन वह किसी भी तरह का जबरदस्ती  संबंध नहीं चाहती थी। वह उनसे एक-एक करके मिलना चाहती थी, एक साथ नहीं।

शायद वे अंजिल के अकेलेपन और उसकी खामोश पीड़ा को अच्छी तरह समझते थे।

कुछ दिनों पहले जब अंजिल ने रसोई के पास खड़े होकर चुपके से अपने देवरों की बातें सुनी थीं। वे आपस में अंजिल के सौंदर्य की चर्चा कर रहे थे। वे खुलकर बात कर रहे थे कि भाभी का कौन सा अंग उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। वे यह भी कह रहे थे कि भाभी उन्हें अपने शयनकक्ष में क्यों नहीं बुलातीं? वह  रोज़ अकेले सोती हैं। हम सब साथ में अच्छा समय बिता सकते थे। तब बड़े देवर ने कहा कि औरतें हमारी तरह नहीं सोचतीं। उनमें पुरुषों से ज़्यादा आत्मनियंत्रण होता है।

अंजिल को उनकी बातें सुनकर गुस्सा नहीं आया, बल्कि उसे उनकी पसंद बहुत दिलचस्प और उत्तेजक लगी। वे बेसब्री से उसके शयनकक्ष में आने के निमंत्रण का इंतजार कर रहे थे।

उस रात अंजिल ने आगे बढ़ने का फैसला किया। वह जानती थी कि वे सिर्फ बातें कर सकते हैं, उसे छू नहीं सकते। उसे खुद रिश्ते की शुरुआत करने के लिए सही समय और परिस्थिति ढूंढनी होगी।

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