कुंवारी मीना जो कौमार्य खोने से डरती थी-भाग-2

भाग-2

मीना का सेक्सी सपना

श्रेणी : कुंवारी मीना

पढ़ने का समय: 10 मिनट | शब्द: 1202

मीनू 18 साल की जवान लड़की थी, वह कॉलेज में पढ़ रही थी, उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था। कठोर लिंग की पहली झलक ने उसे पूरी तरह से बेचैन कर दिया था l इससे पहले उसे हमेशा अपनी योनि को छूने में बुरा लगता था, लेकिन आज अलग दिन था। उसका हाथ बार-बार उसकी भगशेफ पर चलना चाहता था l

शाम हो चुकी थी, वह बिस्तर पर लेटी हुई थी, उसने अपना अंडरवियर उतारा और सामने वाले शीशे के पास गई। उसकी योनि  पूरी तरह से लंबे बालों से ढकी हुई थी, धीरे-धीरे उसने बालों को किनारे की तरफ धकेलने लगी l  

योनि में फिर से  हलचल शुरू हो गई। उसने अपनी उंगली से इसके छोटे से छेद को छुआ, यह बहुत छोटा लग रहा था। “इतना बड़ा लिंग इस छोटी सी योनि में कैसे प्रवेश कर सकता है।” वह फुसफुसाई, उसे याद आया कि एक बार उसकी मां ने उसे चेतावनी दी थी कि वह योनि में उंगली न डाले, अन्यथा उसका कौमार्य भंग हो जाएगा।

“ये कौमार्य का क्या झंझट? मैं तो बस चाहती हूँ कि कोई मुझे उंगलियों से सहलाए और मेरे अंदर तक ले जाए, आह…आह,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी उंगलियाँ फिर से उसकी योनि और भगशेफ पर चलने लगीं। बीच-बीच में वह आईने में अपनी हरकतों को देखती रहती।

कुछ देर बाद, वह बिस्तर पर लेट गई। उसने अपने पैर फैलाए और आँखें बंद कर लीं। धीरे-धीरे, उसने अपनी उंगलियाँ अपनी क्लिटोरिस पर फेरनी शुरू कीं, आनंद लेते हुए। किसी को पता नहीं चला कि कब, परमानंद के क्षण में, वह गहरी नींद में सो गई। उसके पैर अभी भी फैले हुए थे, उसकी युवा, कोमल त्वचा मंद रोशनी में चमक रही थी। उसके गुप्तांग के बाल अपनी सामान्य स्थिति में लौट आए थे।

गहरी नींद में वह एक सपनों की दुनिया में चली गई, उसने खुद को कुछ पेड़ों के पास छोटी सी सड़क पर चलते हुए पाया। वह एक छोटी सी जगह थी जहाँ कई विक्रेता कुछ बेच रहे थे। वह एक ठेले के पास गई जहाँ मध्यम आयु की महिला कुछ बेच रही थी।

उसने  ठेले को देखा और पूछा, “बहन आप क्या बेच रहे हैं।”

 विक्रेता ने कहा, “लिंग, मीठे लिंग, देखो मैडम वे बहुत ताजा हैं।” उसने एक लंबा मोटा लिंग उठाया, उसका सिर नारियल की तरह लंबे बालों से भरा था। उसने मीना को पेश किया। 

“बहन मैं इसके साथ क्या करूँगी, मैं अपनी वर्जिनिटी नहीं खोना चाहती।” मीना ने उत्सुकता से कहा।

“मैडम आप इसे भून सकती हैं, सूप बना सकती हैं। कुछ लोग इसे पकौड़े में भी डालना पसंद करते हैं। आप जो चाहें कर सकती हैं, यह बहुत स्वादिष्ट बनेगा। मैं आज बहुत सस्ते में बेच रही  हूँ, इसे खरीद लो”

मीना को समझ में नहीं आया कि वह क्या बात कर रही थी। उसे ऐसे मानव लिंग कहां से मिले।

मीना कुछ कह पाती, उससे पहले ही दुकानदार ने दो बड़े लिंग एक थैले में डालकर उसे बेचने के लिए रख दिए।

“रुको, रुको बहन, तुम्हें पता है औरतें  लिंग कहां डालती हैं। मैं लिंग नहीं पकाऊँगी ।”

“मैडम , औरतें अपने लिंग कहां डालती हैं?” दुकानदार ने उत्सुकता से पूछा। मीना ने अपना पजामा नीचे खींचकर अपनी योनि दिखाई, “यहाँ, यहीं।”

विक्रेता महिलाएं उसके पास आईं और उसकी योनि को ध्यान से देखा। “वाह, यह बहुत सुंदर और छोटी है, मैं इसे मैं अभी डालना  चाहती हूँ।” मीनू हँसी।

फिर महिलाओं ने अपनी  सलवार नीचे कर दी, मीना उसकी योनि देखने के लिए उत्सुक थी, लेकिन वह देखकर दंग रह गई। उसका   लिंग मूली के जैसे बड़ा, लंबा और सफेद था। उसने मीना को  पकड़ा  और जमीन पर गिरा दिया, फिर उसकी  टांगें पूरी तरह से खोल दीं l उसका मोटा लंबा सफ़ेद लिंग उसके सामने था। वह महिला खुशी से उछल रही थी। उसका लिंग मीना की योनि  के अंदर जाने के लिए तैयार था।

जैसे ही महिला ने  लिंग योनि के पास लाई मीना जोर से चिल्लाई, वह बहुत डर के साथ जाग गई। सपना खत्म हो गया था, उसने भयभीत आँखों से चारों ओर देखा। कमरा खाली था, वह बिस्तर से नीचे आई और थोड़ा पानी पिया, फिर अपना अंडरवियर वापस पहन लिया, उसका दिल  तेजी से धड़क रहा था,नींद कहीं गायब हो गई थी l  उसने घड़ी की ओर देखा, 2 बजकर 10 मिनट हो रहे थे। वह वापस बिस्तर पर आ गई और सपने के बारे में सोचने लगी। डर से उसकी योनि  पूरी तरह सूख चुकी थी।

फिर उसने कुछ आवाजें सुनी, यह उसके माता-पिता के कमरे से आ रही थी। उसे आश्चर्य हुआ कि वे अभी भी क्यों जाग रहे थे। कुछ मिनटों के बाद, उसने अपनी माँ को चिल्लाते हुए सुना, “आह आह, धीरे, धीरे।” वह हँसी, वह जानती थी वह क्या कर  रहे थे। वह देखना चाहती थी लेकिन उसे डर था कि अगर उन्हें पता चल गया तो क्या होगा।

यह पहली बार नहीं था जब उसने अपनी मां को चिल्लाते हुए सुना था। वह जानती थी कि उसके पिता एक मजबूत आदमी है। उसने कभी भी उनकी सेक्स देखने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन आज स्थिति अलग थी। उसकी अपनी योनि  इतनी गर्म थी। वह किसी भी यौन गतिविधियों की ओर आसानी से आकर्षित हो रही थी। 

उसे स्टोर रूम की छोटी खिड़की याद आई। वह खिड़की काफी ऊंची थी और हमेशा खुली रहती थी। वह आसानी से देख सकती थी कि उनके बेडरूम में क्या चल रहा है। उसने पहले भी कई बार अपनी माँ को नग्न और अपनी योनि को शेव करते हुए देखा था l लेकिन उसकी माँ ने उससे कहा था कि अभी वह अपनी योनि के बाल न काटे , शायद शादी के बाद वह ऐसा कर सकती है। 

मीना को अपने पिता को नग्न देखने की कोई इच्छा नहीं थी। वह सिर्फ उनका सेक्स और धक्का देखना चाहती थी।

उसकी माँ की चिल्लाहट उसे और अधिक बेचैन कर रही थी। वह धीरे से अपने बिस्तर से नीचे उतरी और स्टोर रूम में चली गई। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। वह एक लकड़ी के बक्से पर खड़ी हो कर  अंदर देखने लगी। 

उसकी माँ की टांगें ऊपर थीं। पिता का बड़ा नितम्ब उनके बीच में था। वह उसे बहुत तेजी से आगे-पीछे कर रहा था। वे तेजी से सांस ले रहे थे। शायद वे अपने चरमोत्कर्ष के बहुत करीब थे। बिस्तर भी हिल रहा था।

“क्या सेक्स सच में इतना आक्रामक होता है?” मीना ने फुसफुसाते हुए कहा। उनका चेहरा लाल हो गया था, वो उनकी हर हरकत को देख रही थी। मंद रोशनी में भी उनके गीले शरीर चमक रहे थे। उसकी माँ का शरीर कांप रहा था। उसके पिता बार-बार उसके धड़कते स्तनों को चूम रहे थे। तभी अचानक उसकी माँ चिल्लाई, “आह, आह। तेज़, प्यारे, मैं चरम सुख तक पहुँच रही हूँ। तेज़।” सब कुछ बहुत तेज़ी से होने लगा। फिर उसके पिता उसकी माँ पर गिर पड़े। उनके शरीर आपस में चिपक गए।।

सब कुछ शांत हो गया। मीना को केवल उनकी भारी साँसें सुनाई दे रही थीं। एक पल के लिए उसे लगा कि जब उसके पिता बिस्तर पर आएंगे तो वह उन्हें देख लेगी। फिर शर्म की एक अजीब सी भावना उसके मन में फैल गई। उसने बक्से से नीचे उतरने का फैसला किया। वह अपने पिता को नग्न नहीं देखना चाहती थी। वह अपने कमरे में लौट गई।

┃भाग – 3┃

जब उसने अपने अंडरवियर उतारा  तो सब कुछ बदल गया। उसका बड़ा, लंबा, सख्त लिंग तीसरे पैर की तरह नीचे सरक गया।  मेरी आँखें चौड़ी हो गईं। मैं चीख पड़ी, “ओ!”, मेरे शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गई।

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