किसी को नहीं बताओगे
श्रेणी: विशेष कहानियाँ
पढ़ने का समय: 3 मिनट | शब्द: 335
युवावस्था के भय और इच्छाएँ
मीना और शालू बगीचे में एक बेंच पर बैठी थी और स्कूल के बारे में बात कर रही थी । तभी उन्होंने पेड़ों के पीछे से कुछ अजीब आवाजें सुनीं।
“शालू ,वहाँ क्या है? चलो देखते हैं।” मीना ने उस तरफ देखते हुए कहा।
“नहीं नहीं मीना। चलो किसी और जगह बैठते हैं।” शालू ने थोड़ा डरते हुए कहा।
“डरो मत। चलो धीरे-धीरे चलते हैं और देखते हैं।” वे चुपचाप एक पेड़ के पास गए और देखने की कोशिश करने लगी । वहाँ दो लड़के थे और वे हस्तमैथुन कर रहे थे। लड़कियाँ मुस्कुराईं और एक-दूसरे को देखने लगीं।
लड़के पूरे मूड में थे। उनके हाथ उनके तेजी से चल रहे थे। जब लड़कों ने अपना चेहरा घुमाया, तो लड़कियां दंग रह गईं, एक शालू का भाई था और दूसरी मीना का। वे वापस आई और फिर से बेंच पर बैठ गई।
“शालू लड़कों को लड़कियाँ की जरूरत है। क्यों नहीं तुम मेरे भाई को दे दो और मैं तुम्हारे भाई को दे दूं।” मीना मुस्कुराई और बोली l
“मुझे तुम्हारा भाई पसंद है लेकिन तुम वादा करो कि तुम किसी को नहीं बताओगे l”
“तुम भी किसी को नहीं बताना ,शालू” उन्होंने एक दूसरे से वादा किया और घर को चली गई । कुछ दिनों के बाद जब शालू मीना के भाई के साथ थी , तो उसने कहा, “तुमसब कर सकते हो रोहन लेकिन वादा करो कि तुम किसी को नहीं बताओगे, मीना के भाई को भी नहीं।”
“मैंने शालू वादा किया। मैं किसी को नहीं बताऊंगा।” रोहन ने उसके बदन को सहलाते हुए कहा।
जब मीना अरवीन के घर गई तो उन्होंने एक दूसरे को चूमा और बिस्तर पर चले गए।
“क्या तुम मेरे साथ वो सब करना चाहते हो या सिर्फ बात करना।” मीना ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“अगर तुम सहमत हो तो मुझे वो सब चाहिए।” परवीन ने उसके हाथ पकड़ते हुए कहा।
“हम कर सकते हैं लेकिन अगर तुम वादा करो कि तुम किसी को नहीं बताओगे। शालू के भाई को भी नहीं।”
परवीन ने हां कहा और उसे छूने लगा।