नूर और समीर की एक सुबह - भाग 40
सुबह हो चुकी थी। समीर अभी भी बिस्तर पर था। नूर उसे जगाने के लिए उसके कमरे में आई। परिवार में सभी जानते थे कि अगर कोई समीर को नहीं जगाएगा तो वह बारह बजे तक सोता रहेगा।
“समीर, उठो! नौ बज चुके हैं!” नूर चिल्लाई।
समीर ने आँखें खोलीं। “नूर, आज स्कूल नहीं है, मैं और सोना चाहता हूँ।”
“ नहीं नहीं, अभी उठो। मुझे तुम्हारा कमरा साफ़ करना है।”
“ नूर, इसे देखो!” समीर ने अपनी से उंगली लिंग की ओर इशारा करते हुए कहा ,
” क्या है?” नूर मुस्कुराई।
“देखो, यह फिर से सख्त हो गया है। हर सुबह मुझे यह सख्त लगता है। क्या तुम्हें भी ऐसा ही महसूस होता है?”
“मेरे पास लिंग नहीं है, तुमने कल रात देखा था ना?”नूर मुस्कुराई।
“आह, हाँ। तुम्हारे पास वहाँ कुछ नहीं था। केवल दो होंठ और एक छोटा सा छेद। लेकिन नूर, कभी-कभी लिंग इतना सख्त क्यों हो जाता है? मैं नरम लिंग के साथ भी आराम से बाथरूम जा सकता हूँ।”
“तुम ने गांवों में देखा होगा जब लोग गायों के थनों से दूध निकालते हैं। उनके थन दूध से बड़े और मोटे हो जाते हैं। आपका लिंग भी हर सुबह दूध से भर जाता है लेकिन कोई उसे निचोड़ता नहीं । फिर बाद में वह स्वयं ही नरम और छोटा हो जाता है।”
“तुम हर सुबह मेरे लिंग को क्यों नहीं निचोड़ती? मैं चाहता हूँ कि तुम फिरोज की बहन की तरह निचोड़ो।”
“मैं तुम्हारा लिंग निचोड़ना चाहती हूँ, लेकिन जब हम घर पर अकेले हों, तब। इसमें समय लगता है। फ़िरोज़ के माता-पिता सुबह जल्दी घर से निकल जाते हैं। वे घर पर अकेले होते हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं।” नूर बिस्तर पर बैठते बोली l
“हाँ, तुम सही कह रही हो नूर।”
“ चलो, मैं सुबह की मालिश कर देती हूँ। इसे बाहर निकालो।” समीर ने अपना पजामा नीचे खींच लिया। नूर ने उसका लिंग पकड़ लिया। “वाह, यह तो फिर से लोहे की छड़ जैसा है, मोटा और सीधा।” उसने धीरे-धीरे मालिश करना शुरू कर दिया।
“नूर, अगर हम साथ सोएं तो तुम कभी भी मेरे लिंग की मालिश कर सकती हो। तुम बहुत अच्छी मालिश करती हो। कभी-कभी मेरा मन करता है कि मैं तुम्हारे स्तन चूसूँ, लेकिन माँ हमेशा घर पर रहती है। वह पिताजी की तरह कोई काम क्यों नहीं ढूंढ लेती?”
“आप सही कह रहे हैं। समीर,आपको माँ से बात करनी होगी। मुझे तो डर लगता है।”
तभी माँ चिल्लाई, “नूर, समीर, आओ और चाय पी लो।” उनका खेल खत्म हो गया।