नूर का जन्मदिन का उपहार - भाग 14
शाम का समय था। नूर और समीर लिविंग रूम में टीवी देख रहे थे। समीर ने पूछा, “नूर, मेरा जन्मदिन अगले हफ्ते है। तुम मेरे लिए क्या तोहफा खरीदना चाहती हो?”
नूर हंस पड़ी और बोली, “मैं तुम्हें बार्बी डॉल गिफ्ट करने की सोच रही हूं।”
“क्यों डॉल, नूर?” समीर ने उत्सुकता से पूछा।
“आप लड़कियों के अंग देखना चाहते हैं। आप उन्हें देख और छू सकते हैं। गुड़िया में सभी महिला अंग होंगे।”
“नहीं नहीं, मैं गुड़िया के अंगों को छूना नहीं चाहता, मैं तुम्हारे जैसे असली लड़की के अंग देखना चाहता हूँ।”
नूर हंसते हुए बोली, “अगर तुम्हें असली लड़की चाहिए तो खुद ढूंढ लो।”
समीर चुप हो गया। कुछ मिनट बाद उसने कहा, “नूर, क्यों न मैं तुम्हें नग्न देख सकूँ? जब हम छोटे थे, तो हम हमेशा साथ नहाते थे। क्यों न हम फिर से साथ नहाएँ?”
नूर मुस्कुराई और शरमाई। “समीर, हम अब बच्चे नहीं रहे। अब तुम बड़े हो गए हो। हम साथ में नहा नहीं सकते।”
“माँ हमेशा कहती है कि मैं बच्चा हूँ। अब तुम भी मुझे पसंद नहीं करती । मैं तुम से बात नहीं करूंगा।” समीर ने गुस्से से अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया। नूर ने उसकी तरफ देखा। वह मुस्कुराई और टीवी देखती रही। मन ही मन वह सोच रही थी कि क्यों न वे फिर से एक साथ नहाएं और एक-दूसरे को देखें। समीर ने उसे वादा किया कि वह किसी को नहीं बताएगा। अचानक उसे उत्तेजना महसूस होने लगी, उसकी योनि में भी हलचल होने लगी। समीर का लिंग भी अब बड़ा होगा।अगर वे एक दूसरे को छू लें तो क्या होगा? समीर अक्सर उसकी टाइट अंडरवियर देखता था । यह सोचते ही उसकी योनि गीली हो गई और प्रतिक्रिया करने लगी।
समीर अभी भी गुस्से में बैठा था। नूर उसके पास गई और उसे अपनी बाहों में भर लिया। “समीर, तुम मेरे अच्छे भाई हो, जानते हो ना?” समीर का सिर नूर के स्तनों पर टिक गया और वह दबने लगे । नूर ने उसे नहीं हटाया । दरअसल, उसे उसका स्पर्श अच्छा लग रहा था। शायद समीर को पता ही नहीं था कि क्या हो रहा है।
“गुस्सा मत करो, मैं इस बारे में सोचूंगी, जो तुम चाहते हो? ठीक है,” नूर ने कहा। समीर मुस्कुराया और उसे कसकर गले लगा लिया।