प्यासी नौकरानी हीरी – भाग 7

प्यासी नौकरानी हीरी - भाग 7

प्यासी नौकरानी हीरी - भाग 7

हीरी घर गई और जानकी से राजन के साथ जाने को कहा। लेकिन जानकी ने कहा कि वह शादी से पहले उसके साथ नहीं जाना चाहती। मुझे उसके साथ सहज महसूस नहीं होता। कभी-कभी मुझे लगता है कि वह खतरनाक है। हीरी अपनी बेटी की बात सुनकर हैरान रह गई। “तुम ऐसा क्यों कह रही हो? मूर्ख मत बनो। देखो, वह एक अमीर आदमी है। अगर उसकी तुमसे शादी हो जाती है, तो सब कुछ तुम्हारा हो जाएगा। मैं वहां नौकरानी की तरह नहीं, बल्कि मालकिन की तरह रहूंगी। अगर वह कुछ भी गलत करेगा, तो हम उससे सीधे बात कर सकते हैं। उसे हमारी बात माननी ही पड़ेगी।”

जानकी भी अपनी माँ की बात सुनकर हैरान थी। वह तो उसकी सारी संपत्ति की मालकिन बनने की सोच रही थी।वह हंसते हुए बोली, “माँ, तो यही है आपकी योजना?” 

“हाँ बेटा। वह अविवाहित है, उसे तुमसे प्यार हो गया है। यह प्यार हमारी जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकता है। तुम्हें ऐसा मौका दोबारा जिंदगी में नहीं मिलेगा। अपने पिता को देखो। वह शराब पीने के सिवा कुछ नहीं करते । तुम्हारे बारे में सोचकर ही डर लगता है। मैं नहीं चाहती कि तुम्हारी जिंदगी मेरी जैसी हो।”

ठीक है माँ, मैं उसके साथ चलूँगी। मैं वही करूँगी जो आप कहेंगी। जानकी ने विनम्रता से कहा।

हीरी खुश थी कि जानकी राजन के साथ जाने के लिए राजी हो गई। उसने जानकी से फिर कहा कि वह राजन की बात माने और उसे गुस्सा न दिलाए। राजन हर जगह उनकी मदद कर रहा था। हीरी के शब्दों से पता चलता है कि वह चाहती थी कि जानकी राजन की बात माने। क्या वह चाहती थी कि अगर राजन उसकी योनि चाहे तो वह मना न करे? हीरी अच्छी तरह जानती थी कि राजन जवान लड़कियों के लिए पागल था।। अगर उसे कभी मौका मिला तो वह जानकी की योनि को नहीं छोड़ेगा। फिर भी उसने जानकी को उसके साथ अकेले जाने की अनुमति देने का फैसला किया। शायद संपत्ति के लालच ने उसे अंधा बना दिया था। राजन एक चतुर व्यापारी था, लेकिन हम सब जानते हैं कि जब कुछ लोग गलत प्यार में पड़ जाते हैं तो वे सब कुछ खो देते हैं। हीरी भी राजन के साथ एक अच्छा खेल खेलने की कोशिश कर रही थी।

दोपहर का समय था। राजन के लिए आज का दिन बहुत खास था। उसे पता था कि आज उसे जानकी की योनि पाने का सुनहरा मौका मिलेगा। लेकिन उसे सावधान रहना होगा क्योंकि जानकी गुस्सैल लड़की थी। वह बहुत जल्दी गुस्सा हो जाती थी और सीधे उसके मुंह पर ही बुरी-बुरी बातें कह देती थी। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका था। इसीलिए राजन उसकी योनि खोलकर उसे उससे बात करना सिखाना चाहता था। उसे पता था कि जब उसका  वीर्य उसकी योनि में जाएंगे तो वह चुप रहना सीख जाएगी।

फिर हीरी और जानकी राजन के घर के अंदर आईं। जानकी ने खूबसूरत काला पंजाबी सूट पहना हुआ था। उसकी युवा त्वचा काले रंग में दमक रही थी। “सर, जानकी आपके साथ चलने को तैयार है। वह आपसे बात भी करना चाहती है। मैं यहीं रुकूंगी।” 

“ठीक है हीरी, लेकिन वापस आने में देर लग सकती है क्योंकि हमें कुछ होटल देखने हैं।”

 “कोई बात नहीं सर, जानकी अब आपकी है। मुझे चिंता नहीं है।” जानकी एकदम शांत थी। वह राजन की कार में बैठ गई। वे चलने लगे।

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