समीर ने बताई इच्छा -नूर शर्माई - भाग 7
समीर बिस्तर पर लेटा किताब पढ़ रहा था। नूर उसके पास ही फर्श साफ कर रही थी।
“समीर, तुम क्या पढ़ रहे हो? सफाई में मेरी मदद क्यों नहीं करते?” नूर ने उसे देखते हुए कहा।
“नहीं, मैं कुछ साफ नहीं करूंगा। मेरी परीक्षा है।”
“तुम क्या पढ़ रहे हो? मुझे दिखाओ।” नूर ने उत्सुकता से पूछा।
“मैं लड़कियों के बारे में पढ़ रहा हूँ।”
“क्या? लड़कियों के बारे में क्या पढ़ रहे हो?”
“ये तुम्हारे लिए नहीं है। तुम सफाई जारी रखो।”
“ नहीं नहीं। मैं जानना चाहती हूँ। बताओ।” नूर ने उसके पास बिस्तर पर बैठते हुए कहा।
“मैं मानव शरीर के अंगों के बारे में पढ़ रहा हूँ, लेकिन यहाँ लड़कियों और पुरुषों के सभी अंग नहीं दिखाए गए हैं। नूर, ऐसा क्यों?”
नूर हंसते हुए बोली, “वे चाहते थे कि बाकी तुम खुद देखो।
“हां, लेकिन मैं लड़कियों के अंग कैसे देख सकता हूं?” समीर ने उत्सुकता से पूछा।
नूर कुछ देर चुप रही। “जब तुम्हारी गर्लफ्रेंड या पत्नी होगी , तो तुम उसे बता सकते हो कि तुम क्या देखना चाहते हो।”
“नूर, मैं अभी बच्चा हूँ। अगर मैं अभी देखना चाहूँ तो “समीर ने किताब एक तरफ रखते हुए पूछा।
“मुझे नहीं पता कैसे मुमकिन है।”
“ नूर, तुम मेरी प्यारी बहन हो, क्यों न तुम मुझे वो दिखाओ जो मैं देखना चाहता हूँ? मैं किसी को नहीं बताऊँगा । मैं सफाई में तुम्हारी मदद भी करूँगा।”
नूर मुस्कुराई और शर्मा गई। “नहीं नहीं… मुझे सफाई करनी है। माँ गुस्सा हो जाएँगी।” वह फिर से सफाई करने लगी। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। उसके मन में कई अजीबोगरीब इच्छाएं उठने लगीं। समीर उसे देख रहा था। वह जानती थी कि वह उसके गुप्त अंगों के बारे में सोच रहा है और उन्हें देखना चाहता है।