विजेश ने खोला अपना राज-एक और नया प्रयोग - भाग 16
विजेश का राज:
यह फिर से सोमवार था। पूनम विजेश के बिस्तर पर नग्न लेटी हुई थी। “मैं सोच रही हूँ,” पूनम ने विजेश के लिंग को कोमलता से सहलाते हुए कहा, “जब तुम पैदा हुए होगे, तो हर कोई तुम्हारे लिंग को देख रहा होगा। यह तुम्हारी बाहों से भी बड़ा होगा।”
विजेश के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। “जब मैं बच्चा था तब यह बड़ा नहीं था,” उसने हँसते हुए कहा, उसकी हँसी किसी झरने की तरह गूंज रही थी। “मुझे याद है जब मैं लगभग 12-13 साल का था, मैंने अपने घर के बाहर एक घोड़े को देखा था। उसका लिंग… वह अद्भुत था! इतना लंबा ।” उसने पूनम की ओर देखा, वह उत्सुकता से सब कुछ सुन रही थी । “मैंने अपने दोस्त से पूछा कि घोड़े का लिंग इतना लंबा क्यों होता है। उसने कहा, ‘शायद उसका मालिक हर रोज उसकी मालिश करता होगा।” विजेश का गला थोड़ा काँप गया। “उस दिन के बाद, मैंने सोचा, मैं भी अपना लिंग लंबा करूँगा। मैंने मालिश करना शुरू कर दिया। और अब,” उसने पूनम की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह परिणाम है।”
पूनम की आँखें चमक उठीं। “आपने सही किया , मुझे आपके लिंग का आकार पसंद है।” वह हँसी l
“मुझे खुशी है कि आपको मेरे लिंग का आकार पसंद आया, मेरी पत्नी जैसी कई लड़कियां हमेशा डरती हैं। एक रात मेरी पत्नी ने कहा कि अगर वह मेरे लिंग के आकार के बारे में जान गई होती तो वह मेरे साथ कभी शादी नहीं करती।”
पूनम जोर से हंस पड़ी। “शायद इसीलिए वह तुम्हारे साथ कुछ नया नहीं करना चाहती थी।”
“ हां, मैं भी यही सोचता हूं। एक दिन मैंने उससे गुदा मैथुन के बारे में पूछा तो वह चिल्लाई और बोली, क्या वह मुझे मारना चाहते हो ?” पूनम अभी भी उसके लिंग को छू रही थी और उसके साथ खेल रही थी। धीरे-धीरे यह फिर से कठोर हो रहा था।
एक नया प्रयोग:
“पूनम जी, आपके स्तन भी बड़े और भरे हुए हैं। उनके तीखे छोटे निप्पल सुंदर और सेक्सी लगते हैं। अगर आप अनुमति दें तो मैं आपके स्तनों और निप्पलों के साथ कुछ नया आज़माना चाहता हूँ।” विजेश ने उसके निप्पलों को चूमते हुए कहा।
पूनम की आँखें आश्चर्य से फैल गईं, “आप क्या करना चाहते हैं? दूध तो आएगा नहीं।”
विजेश मुस्कुराया, उसकी आँखों में शरारत की चमक थी। वह कुछ बर्फ के टुकड़े लाया और पूनम के निप्पलों पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा।
“आप क्या कर रहे हैं… आह… आह!! मुझे बहुत ठंड लग रही है,” पूनम चिल्लाई, उसकी आवाज़ में कंपकंपी थी, लेकिन विजेश ने अपना काम जारी रखा। धीरे-धीरे, उसके निप्पल सख्त होने लगे, जैसे कि वे किसी अदृश्य कलाकार के हाथों में आकार ले रहे हों, और थोड़ी देर में वे पत्थर की तरह सख्त हो गए।
विजेश ने उन्हें अपने होंठों में ले लिया और उन्हें चाटना शुरू कर दिया। पूनम आनंद से चिल्लाई, एक ऐसी ध्वनि जो उसके भीतर सोई हुई भावनाओं को जगा रही थी। उसकी योनि, एक नाजुक गुलाब के फूल की तरह, तेजी से खिल गई, नई खुशबू और जीवन से भर गई। पूनम समझ गई कि विजेश ने उसके निप्पलों को ठंडा क्यों किया था; कठोर निप्पलों को चाटना एक अद्भुत, अप्रत्याशित अनुभव था, जो उसे ज्ञात सभी संवेदनाओं से परे था।
उसने अपने शरीर में एक अजीब प्रवाह महसूस किया, एक ऐसी ऊर्जा जो सीधे उसके दिमाग और योनि में प्रवाहित हो रही थी । हर स्पर्श, हर चुंबन, एक नई दुनिया का द्वार खोल रहा था, जहाँ इंद्रियाँ सामान्य से कहीं अधिक तीव्र थीं, और भावनाएँ अकल्पनीय ऊँचाइयों पर पहुँच रही थीं। विजेश ने निप्पलों को तब तक चाटा जब तक वे गर्म होंठों से फिर से नरम नहीं हो गए। पूनम ने अपनी आँखें बंद कर, इस अविश्वसनीय, अलौकिक एहसास का आनंद लिया, जो उसे उसकी अपनी सीमाओं से परे ले गया।
उसने अपनी आँखें खोलीं और विजेश का हाथ पकड़ लिया। “यह अद्भुत था। मुझे आपका प्रयोग पसंद आया” वह मुस्कुराई। फिर उसने उसका लिंग पकड़ लिया, यह पूरी तरह से कठोर था। ”मेरी योनि जल रही है l उसे भी ठंडा करना चाहती हूँ।” पूनम ने अपनी टांगें खोलते हुए कहा।