नितंबों में दर्द-पूनम विजेश से फिर मिली

नितंबों में दर्द-पूनम विजेश से फिर मिली -भाग 11

पूनम के पास लाइब्रेरी में ज्यादा काम नहीं था, कुछ घंटे कुर्सी पर बैठने के बाद, जब वह घर जाने के लिए खड़ी हुई तो उसे गुदा और नितंब के आसपास तेज दर्द महसूस हुआ और वह चिल्लाई “आह..आह..!! ,गुदा मैथुन आसान नहीं है जैसा कि रोनी ने कहा, उसका लिंग तो इतना बड़ा नहीं था l  अगर विजेश अपना बड़ा लिंग डाल दे तो क्या होगा।” उसने फुसफुसाते हुए कहा। 

उसे याद आया जब शादी के बाद रिंकू ने उसकी कौमार्य भंग की थी और उस रात उसे कई बार चोदा था। उसे अपनी गांड में ऐसा दर्द महसूस हुआ था, लेकिन बाद में यह हमेशा के लिए चला गया, अब वह बिना किसी दर्द के अपनी चूत में किसी भी तरह का लिंग डाल सकती थी। शायद गुदा के साथ भी यही होगा । रोनी ने कहा था  कि अगर वह कुछ बार गुदा मैथुन करेगी, तो उसे आनंद आने लगेगा।

नितंबों में दर्द-पूनम विजेश से फिर मिली

वह जानती थी कि विजेश गुदा मैथुन चाहता है,और उसका बड़ा लिंग उसकी गुदा को नष्ट कर देगा। उसे बड़ा लिंग और गुदा मैथुन पसंद था। लेकिन वह दर्द से डरती थी। विजेश जैसे अनुभवी व्यक्ति के साथ गुदा मैथुन से पहले उसे अच्छी तैयारी की आवश्यकता होगी। वह सोच रही थी कि रोनी के साथ कुछ बार गुदा मैथुन करना अच्छा विचार होगा।

जब वह आराम कक्ष से बाहर आई और घर जाने के लिए तैयार थी, उसकी नजर किताबों की शेल्फ के पास खड़े विजेश पर पड़ी। वह कुछ सोच में डूबा हुआ लग रहा था। पूनम समझ गई कि वह उससे बात करने आया है। उसकी चाल, उसकी आँखों की हल्की बेचैनी और मुस्कान में छिपी उम्मीदें सब कुछ कह रही थीं।

“हेलो विजेश, आप कैसे हैं?” पूनम ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।

“मैं ठीक हूँ, पूनम जी। आपका दिन कैसा रहा?” विजेश ने विनम्रता से जवाब दिया।

“ज्यादा काम नहीं था। क्या आप कोई किताब ढूंढ रहे हैं?” पूनम ने शेल्फ की ओर इशारा करते हुए पूछा।

विजेश ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “मेरी किताब तुम हो। मुझे किसी और किताब की जरूरत नहीं है।”

पूनम थोड़ी देर चुप रही, फिर मुस्कराते हुए बोली, “मैं आपकी सीक्रेट बुक हूं। चलिए, वहीं कोने की मेज पर बैठकर बातें करते हैं।”

वे दोनों कोने की एक शांत मेज की ओर बढ़ गए। पूनम को अपने नितंबों में  दर्द महसूस हो रहा था। लेकिन उसके मन में एक और बात भी चल रही थी—वह जानती थी कि अगर वह विजेश के साथ ज्यादा समय बिताएगी, तो शायद बात शारीरिक संबंधों तक पहुँच जाए। यह सोच उसे थोड़ी असहज कर रही थी।

कुछ देर तक वे दोनों बात करते रहे। फिर पूनम ने धीरे से कहा, “विजेश जी, अगर हम अगले हफ्ते मिलें तो कैसा रहेगा? मैं तब आपके घर भी आ सकती हूँ।”

विजेश ने थोड़ी देर सोचा और बोला, “अगर आप अगले हफ्ते चाहें तो ठीक है, लेकिन मैं चाहता था कि हम आज ही मिलें।”

पूनम ने उसकी आँखों में देखा और कहा, “मुझे आपके साथ रहना अच्छा लगता है, लेकिन मैंने अपने दोस्त से वादा किया था कि मैं उससे मिलने आऊँगी। वह काफी समय बाद मेरे शहर आई है। वह यहाँ दो दिन रहेगी। इसलिए मैंने आपको अगले हफ्ते का सुझाव दिया।”

विजेश ने सिर हिलाया और मुस्कराते हुए कहा, “ठीक है पूनम जी, मैं सोमवार को आपको लेने आऊंगा।”

पूनम ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, “मुझे सोमवार की शाम आपके साथ बिता कर खुशी होगी।”

इसके बाद वे दोनों लाइब्रेरी से बाहर निकल गए। शाम की हल्की ठंडी हवा उनके चेहरे को छू रही थी, लेकिन उनके दिलों में एक गर्माहट थी।

पूनम जानती थी कि अगर वह आज उसके साथ गई तो वह गुदा मैथुन के लिए कह सकता है। पिछली मुलाकात में पूनम ने  भी कहा था कि हम अगली बार कोशिश करेंगे। लेकिन अब उसकी गुदा में दर्द हो रहा था और वह एक छोटी उंगली भी  डालने में असमर्थ थी।

दरअसल, पूनम ने विजेश से झूठ नहीं बोला था। वह सच में अपनी पुरानी दोस्त से मिलने जा रही थी। वह  उसकी उम्र की एक समझदार और चालाक लड़की थी। पूनम चाहती थी कि वह उस  से अपने और रिंकू  के रिश्ते के बारे में बात करे। शायद वह उसे कोई ऐसा सुझाव दे, जिससे उसकी रिंकू साथ उलझनों  सुलझा सके।

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