सलमा उसके कमरे में – इमरान हैरान 

सलमा उसके कमरे में - इमरान हैरान - भाग 17

सलमा उसके कमरे में - इमरान हैरान

शाम को आरज़ू सलमा के साथ घर आई। वे आरज़ू के कमरे में गए और बातें करने लगे। इमरान सलमा की झलक देखकर खुश हुआ। वह उनकी बातें सुनने के लिए उत्सुक था। वह खिड़की के पास गया और अंदर देखा। लड़कियाँ बिस्तर पर बैठी थीं।

फिर सलमा खड़ी हुई l वह बहुत खूबसूरत और खुश दिख रही थी। उसका चेहरा दमक रहा था। उसने अपनी कमीज़ ऊपर कर दी। 

“आरज़ू दरवाजा बंद है न ” उसने दरवाजे की ओर देखते हुए पूछा।

“हाँ, कोई नहीं आएगा, चिंता मत करो।” आरज़ू ने विश्वास से कहा l

इमरान का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, सलमा ने अपनी सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया। “देखो आरज़ू। मैंने आज क्या किया।” आरज़ू ने उसकी  सलवार के अंदर देखा। उसने उसकी  योनि देखी । योनि की त्वचा चमक रही थी। सलमा ने आज ही अपनी योनि के बाल साफ किए थे।

“वाह, यह बहुत साफ़ लग रही है। मैं भी करना चाहती  हूँ। मुझे भी बाल पसंद नहीं हैं।”आरजू ने बिस्तर पर वापस बैठते हुए कहा।

इमरान हंसा और अपने कमरे में वापस आ गया। “तो सलमा ने आज मेरे लिए अपनी योनि  शेव कर ली।” उसने फुसफुसाया।

कुछ देर बाद आरज़ू और सलमा उसके  के कमरे में आईं। इमरान का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। सलमा का उसके कमरे में आना बहुत दुर्लभ था।

 “इमरान, सलमा को गणित के सवालों में कुछ मदद चाहिए, क्या तुम्हारे पास समय है?”आरज़ू ने पूछा l 

“हाँ आओ।” इमरान ने गंभीरता से कहा। सलमा उसके  के पास बैठ गई और कुछ कागज़ खोलने लगी। इमरान ने आरजू की तरफ देखा। वह समझ गई कि वह सलमा के साथ अकेले रहना चाहता है।

“मैं तुम्हारे लिए चाय बनाने जा रही हूँ।” आरज़ू ने कहा और कमरे से बाहर चली गई। 

इमरान ने सलमा की तरफ देखा। उसने पन्ने पलटना बंद कर दिया। उसकी नज़रें नीचे झुकी हुई थीं।

“सलमा, कैसी हो? तुम दो दिन से हमारे घर क्यों नहीं आई?” इमरान ने धीरे से पूछा। 

“मैं  तुम्हारे साथ बारिश में भीग गई  थी , इसलिए मेरी तबियत ठीक नहीं  थी।” सलमा हंस पड़ी।

“आह ठीक है।अब तुम्हें कैसा लग रहा है ?”

 “मैं ठीक हूं, इमरान, मैं कहना चाहती थी  कि मैं रिश्ते से बहुत डर रही  हूं। मुझे लगता है कि हमें किसी भी रिश्ते के बारे में नहीं सोचना चाहिए।आप हमारे परिवार को जानते हैं। वे इस तरह की किसी भी बात को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इससे हमारे परिवारों के बीच समस्याएं पैदा होंगी। मुझे पूरा यकीन है कि आप मेरी बात समझ रहे हैं।”

फिरोज का शरीर ठंडा पड़ गया, “क्या हुआ ?, क्या आरज़ू ने कुछ कहा?” 

आरज़ू तो हमेशा कहती है  “ तुम अच्छे हो, और मैं तुम पर भरोसा कर सकती हूँ। लेकिन मैं डर रही हूँ। मुझे कोई भी वादा करने के लिए समय चाहिए। मुझे उम्मीद है कि तुम मुझे समझोगे।”

“ठीक है सलमा। मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मैं तुम्हारा इंतज़ार कर सकता हूँ, तुम्हें जल्दबाज़ी में कोई फ़ैसला नहीं लेना चाहिए। हम पहले की तरह ही रहेंगे। “

“शुक्रिया फ़िरोज़।” सलमा ने कहा।

फिर आरज़ू चाय लेकर आई, वे बातें करने लगे।

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