शरारती आरजू और इमरान-एक बिस्तर पर- भाग 20
इमरान सोने की तैयारी कर रहा था। घर में अब ज्यादा शोर नहीं था। तभी किसी ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी। उसने दरवाजा खोला। आरजू अपने सामान के साथ अंदर आई।
“तुम अपना सामान मेरे कमरे में क्यों लाई हो।” इमरान ने आश्चर्य से पूछा।
“माँ ने कहा कि मुझे तुम्हारे कमरे में सोना होगा क्योंकि मेहमान मेरे कमरे में सोने वाले हैं।” आरज़ू ने मुस्कुराते हुए कहा।
“नहीं, नहीं, तुम सलमा के साथ क्यों नहीं सो सकती? तुम्हें पता है कि मुझे अकेले सोना पसंद है।”
“अगर सलमा कहे कि वह तुम्हारे साथ सोना चाहती है तो क्या तुम कहोगे, मुझे अकेले सोना पसंद है।” आरज़ू ने मुस्कुराते हुए कहा।
आरज़ू, प्लीज़ मज़ाक मत करो। तुम्हें पता है मैं हमेशा अकेले सोता हूँ। अगर तुम मेरे कमरे में सो जाओगी तो मुझे नींद नहीं आएगी। लेकिन अगर मां ने कहा तो हमें कुछ करना पड़ेगा। “ठीक है, तुम सोफे पर सो जाओ l
“मैं सोफे पर क्यों सोऊँगी। यह बिस्तर दो लोगों के लिए है। मैं तुम्हारे पास वाले बिस्तर पर सोऊंगी। मुझे खुशी है कि हम लंबे समय बाद साथ सोने जा रहे हैं। तुम्हें याद ही नहीं कि जब हम साथ सोते थे और कहानियां सुनाते थे। जब तुम परियों की कहानियां सुनाती हो तो मुझे जल्दी नींद आ जाती है। चलो फिर से ऐसा करते हैं।”आरजू ने कहा l
फिरोज को कोई विकल्प नहीं सूझा। उसने फिर एक और कोशिश की। “आरज़ू, तुम जानती हो कि मैं अंडरवियर में सोता हूँ। तुम तो बड़ी लड़की हो। यह अच्छा नहीं है कि हम एक बिस्तर पर सोएँ।”
“नहीं नहीं। मैं अभी भी छोटी बच्ची हूँ। मुझे देखो,” उसने अपने शरीर को कंपकंपाया। उसके खुले स्तन इधर-उधर उछले l वह बिस्तर पर कूदी और लेट गई।
इमरान हँसते हुए बोला, “ठीक है, अगर तुम अब भी मेरे साथ सोना चाहते हो, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मुझे खुशी है कि आज तुम्हारी पीठ में खुजली नहीं हो रही है। चलो कुछ ऐसी बातें करें जैसे हम बचपन में करते थे। तुम हमेशा मुझे तारों की कहानी सुनाती थी।” इमरान ने कुछ लाइटें बंद करते हुए कहा। आरजू थोड़ी देर चुप रही। फिर वह इमरान की ओर मुड़ी और उसे कस कर पकड़ लिया। उसका हाथ इमरान के पेट पर थीा । उसके मुक्त स्तन उसके और इमरान के शरीर के बीच कसे हुए थे।
उसने धीरे से कहा,”मुझे याद नहीं,आप कुछ बताइये”
इमरान असहज महसूस कर रहा था। आरजू के बड़े-बड़े स्तन उसकी नंगी पीठ से चिपके हुए थे। उसका मोटा और सख्त लिंग उसे पहले से ही बेचैन कर रहा था। वह उसे आरजू से छिपाने की पूरी कोशिश कर रहा था। वह सेक्स के बारे में सोचना नहीं चाहता था लेकिन स्थिति बदतर होती जा रही थी। वह उससे सीधे कुछ नहीं कहना चाहता था। उसे उम्मीद थी कि वह जानती होगी कि अब वह एक पूरी तरह से विकसित युवती है।उसे ठीक से सोना होगा।
“आरज़ू मुझे गर्मी लग रही है। तुम्हें गर्मी नहीं लग रही।” इमरान ने सावधानी से कहा।
आरजू बिस्तर पर बैठ गई और चारों ओर देखने लगी। फिर उसने कहा, “तुम सही कह रहे हो इमरान। मुझे भी गर्मी लग रही है। मुझे लगता है मुझे भी तुम्हारी तरह कमीज उतारनी पड़ेगी।”
इमरान हंसा और बोला, “तुम पहले से ज्यादा मजाकिया हो गई हो, सिर्फ़ कमीज़ ही क्यों? चलो पूरी तरह नग्न होकर सोते हैं। मैं हमेशा तुम्हारी पीठ की मालिश करता हूँ। आज मैं तुम्हारे पूरे शरीर की मालिश करूंगा।
आरज़ू भी हँसी और बोली, “क्या तुममें मेरे साथ नंगे सोने की हिम्मत है, इमरान?”
इमरान चुप हो गए