रीया की एक रात – बड़े लिंग के साथ उसका अनुभव

भाग-14

रीया की एक रात - बड़े लिंग के साथ उसका अनुभव

श्रेणी : बारिश की गुड़िया

पढ़ने का समय: 6 मिनट | शब्द: 816

मोमबत्तियाँ जल रही थीं। कमरा विशेष कामुक सुगंध से भरा था। रिया सूरज के साथ पूरी तरह से नग्न लेटी हुई थी। वह अनजान थी कि उसके साथ जल्द ही क्या होने वाला था। उसकी योनि फट गई थी और दर्द हो रहा था। लेकिन  वह अभी भी सूरज के लिंग अंदर  चाहती थी।

“आपका लिंग बहुत कामुक है, जब यह मेरी योनि में प्रवेश करता है, तो यह इसे भर देता है और योनि के हर हिस्से को छूता है। यह अजीब है, मुझे बहुत जल्दी चरम सुख प्राप्त होता है।” रीया ने लिंग के साथ खेलते हुए कहा। 

“यह फिर से कठोर हो गया है। प्रिय, मैं चाहती  हूं कि तुम मुझे जोर से डालो लकीन योनि मे  अब  दर्द हो रहा है।”रिया ने अपनी योनि को छूते हुए कहा। 

सूरज मुस्कुराया और कहा, “रीया, मैंने तुम्हारे साथ गुदा मैथुन का सपना देखा था, मैं कोशिश करना चाहता हूं।” 

रीया भी मुस्कुराई। “मुझे पता है कि तुम्हें मेरे नितंब पसंद हैं। अगर तुम कोशिश करना चाहते हो तो ठीक है।चलो कोशिश करते हैं l”

रीया ने अपने पेट पर करवट ली और गुदा मैथुन के लिए एक आरामदायक स्थिति ले ली। सूरज ने गुड़िया की ओर देखा। उसकी आँखें फिर से चमक उठीं। 

रीया के बड़े नितंब उसके सामने थे। गुदा पूरी तरह से बंद लग रहा था। सूरज ने अपनी उँगलियाँ उसके चारों ओर घुमाईं और गुदा को फिसलन भरे लोशन से भर दिया।

जैसे ही सूरज ने अपने लिंग को गुदा से स्पर्श करना शुरू किया लिंग गुब्बारे की तरह फूलने लगा। सूरज का दिल तेजी से धड़कने लगा। तभी उसके शरीर में एक अजीब सी शक्ति प्रवेश कर गई। वह बहुत आक्रामक और मजबूत हो गया और  सेक्स के लिए पागल होने लगा । 

उसका लंबा, मोटा लिंग रिया के बड़े नितंबों पर गिर रहा था। जैसे ही उसने अपने लिंग के शीर्ष को गुदा में धकेलने की कोशिश की, यह एक क्रिकेट बॉल के आकार का हो गया। उसका लिंग लोहे की छड़ की तरह था। इसने नितंबों को खोलना शुरू कर दिया।

रिया ऊंची आवाज में चिल्लाई, उसने अपने नितंबों को हिलाने की कोशिश की लेकिन कुछ अजीब बल ने उसके नितंबों को इतनी कसकर पकड़ लिया था। वह अपने नितंबों को हिलाने में असमर्थ थी। 

सूरज ने पूरे आनंद के साथ लिंग को अंदर धकेलना जारी रखा।

 “मैं मर रही हूँ, प्रिय। अब रुको।” यह  आखिरी शब्द थे  जो सूरज ने सुने । 

उसने डालना  जारी रखी और गुदा के साथ पूरी तरह से आनंद लिया। वह अपने बड़े लिंग से बहुत संतुष्ट था। यह रिया के गुदा के अंदर अच्छी तरह से घूम रहा था।

फिर  उसका आनंद चरम सीमा पर पहुंचा तो  उस ने नितंबों  को  अपने शुक्राणुओं से भर दिया। लिंग फिर से सामान्य हो गया और उसके बड़े गुदा छेद से बहुत आसानी से बाहर आ गया। 

रिया  कुछ नहीं बोली । सूरज ने उसके नितंब पर बड़े छेद को देखा और मुस्कुराया। रिया की गुदा में शराब की बोतल बहुत आसानी से जा सकती थी। फिर उसने योनि को छुआ और पूछा।

”यह कैसी  है प्रिय।” कोई जवाब नहीं आया । रिया पहले से ही बेहोश थी। सूरज ने उसे उसकी पीठ पर घुमा दिया, कोई गतिविधि नहीं थी। वह डर गया l उसने गुड़िया से कांपती आवाज़ में पूछा ,

“रिया को क्या हुआ ? मेरी मदद करो।” वह बहुत चिंतित था l

“सूरज, चिंता मत करो। मैं उसे संभाल लूंगी । वह बेहोश हो गई है। कुछ घंटों में ठीक हो जाएगी। शांति से सो जाओ।” गुड़िया ने आराम से कहा l

“नीलू, मुझे डर लग रहा है। मैं चाहता हूं कि वह जल्दी ठीक हो जाए।” 

“चिंता मत करो, वह ठीक हो जाएगी और खुद घर  भी चली जाएगी। तुम अब थक गये  हो। हम सुबह बात करेंगे।” गुड़िया ने उसे सांत्वना देते हुए कहा l

सूरज को  गुड़िया पर भरोसा था ,उसने रीया को  चूमा और सोने की कोशिश करने लगा ,कुछ मिनटों के बाद वह सो गया l 

कमरा फिर से बहुत शांत हो गया। मोमबत्ती धीरे-धीरे अपने आप बंद हो गई। सुबह जब सूरज उठा तो वह यह देखकर दंग रह गया कि रिया वहां नहीं थी। कुछ देर तक उसने सोचा कि वह शायद रिफ्रेशरूम में है। फिर उसने चारों ओर देखा, उसका कोई सामान भी नहीं था। उसने गुड़िया की ओर देखा और पूछा। “नीलू क्या तुम्हें पता है कि रिया कहां है?” 

“वह सुबह-सुबह चली गई , उसने तुम्हारे लिए एक कागज छोड़ा है।”नीलू ने कहा l 

सुरजा ने तुरंत वह कागज पढ़ा। “प्रिय, आपका लिंग शानदार है, इसका ख्याल रखना। प्यारी रात के लिए धन्यवाद।” सूरज ने लंबी सांस ली और सहज महसूस किया।

“भगवान का शुक्र है, वह ठीक है l”  उसने फुसफुसाते हुए कहा l 

फिर उसने गुड़िया की तरफ देखा और कहा, “धन्यवाद नीलू। मैंने अपने बड़े आकार के लिंग से उसकी योनि और गुदा का भरपूर आनंद लिया। यह सब तुम्हारे कारण हुआ।” 

गुड़िया ने फिर से अपनी आँखें चमकाईं l

┃भाग – 15┃

सूरज ने चाय का कप नीचे रखा और घर से बाहर निकल गया। दरवाज़ा उसके पीछे ऐसे बंद हुआ जैसे कोई अध्याय समाप्त हो गया हो। वह बगीचे की ओर बढ़ा, और वहाँ फूलों के पेड़ के नीचे  परी खड़ी थी—सपनों जैसी सुंदर, रहस्यमयी।

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