रिश्ते की नई रात, पति-पत्नी की कहानी -भाग 20
पूनम खाना बनाने की तैयारी कर ही रही थी कि दरवाज़े की घंटी बजी।
रिंकू थकान से भरा चेहरा लिए घर लौटा था, लेकिन उसकी आँखों में आज कुछ अलग चमक थी। उसने मुस्कुराते हुए पूनम को देखा और बिना कुछ कहे ताज़ा होने चला गया।
कुछ देर बाद, वह चुपचाप रसोई में आया। पूनम मसाले छान रही थी, तभी रिंकू ने उसे पीछे से हल्के से थाम लिया। उसकी बाँहों की गर्माहट पूनम को चौंका गई।
फिर उसने धीरे से पूनम की गर्दन पर एक कोमल चुंबन रखा — ऐसा स्पर्श जिसे पूनम ने वर्षों से महसूस नहीं किया था।
“प्रिय, आपका दिन कैसा रहा?” पूनम ने धीमे स्वर में पूछा, उसकी आवाज़ में आश्चर्य और स्नेह दोनों थे।
“बहुत अच्छा,” रिंकू ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज हम सिर्फ बातें करेंगे। खाना बनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, मैं सब संभाल लूंगा।”
पूनम ने उसकी आँखों में देखा — वहाँ एक नया रिंकू था, जो हर दिन कुछ नया कर रहा था।
“ठीक है,” उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “अगर आप खाना बनाना चाहते हैं तो बात करते हैं।”
उसके मन में सवाल उठे, लेकिन वह उन्हें दबा गई। शायद यह बदलाव अच्छा था।
कुछ ही देर में रिंकू ने डाइनिंग टेबल पर एक पैक्ड डिनर रख दिया। “देखो, यह हमारा डिनर है,” उसने कहा। “पहले तुम नहा लो, फिर हम साथ बैठकर खाएंगे।”
पूनम की आँखें चमक उठीं। वह मुस्कुराई और बाथरूम की ओर बढ़ गई।
नहाते समय वह सोच रही थी — रिंकू में यह बदलाव अचानक कैसे आया? वह याद करने लगी कि आखिरी बार उसने उसे इस तरह प्यार से कब छुआ था। वह सोचती रही — क्या यह वही आदमी है जो कभी भावनाओं को शब्दों में नहीं ढालता था?
जब वह बाहर आई, तो टेबल पर खाना सजा हुआ था। रिंकू बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था।
“वाह! आपने मेरा पसंदीदा खाना खरीदा,” पूनम ने कहा, उसकी आवाज़ में सच्ची खुशी थी। वह बैठ गई और दोनों ने साथ खाना शुरू किया। हर निवाले के साथ उनकी बातें गहराती गईं — जैसे रिश्ते की पुरानी परतें फिर से खुल रही हों।
रात का खाना खत्म हो चुका था। टेबल पर खाली प्लेटें थीं, लेकिन पूनम के मन में सवालों की भरमार थी। रिंकू ने जैसे ही पानी का गिलास उठाया, पूनम ने उसकी आँखों में देखा — गहराई से, बिना किसी हिचकिचाहट के।
“रिंकू,” उसने धीमे स्वर में कहा, “तुम आजकल बहुत बदल गए हो। हर दिन कुछ नया, कुछ प्यारा। क्या हुआ है? क्या कोई बात है?”
रिंकू कुछ पल चुप रहा। फिर उसने गिलास नीचे रखा और पूनम का हाथ थाम लिया।
“पूनम,” उसने कहा, “मैंने बहुत कुछ खो दिया था — तुम्हारा साथ, तुम्हारी मुस्कान, वो छोटी-छोटी बातें जो हमें जोड़ती थीं। काम, थकान, ज़िंदगी की दौड़ में मैं तुम्हें भूलता जा रहा था। लेकिन अब मैं सब ठीक करना चाहता हूँ।”
“क्या तुमने हमारे रिश्ते के बारे में किसी से बात की?” पूनम ने गंभीरता से पूछा।
“नहीं, एक दिन ऑफिस में एक सहकर्मी ने अपनी पत्नी के बारे में बात की — कैसे वो हर शाम उसका इंतज़ार करती है, कैसे वो छोटी-छोटी बातों में प्यार ढूंढते हैं। मुझे लगा, मैं क्या कर रहा हूँ? तुम्हारे साथ होते हुए भी तुम्हें अकेला महसूस करा रहा हूँ।”
पूनम ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और कहा, “मैं तो इंतज़ार कर रही थी कि तुम फिर से वही रिंकू बनो जिससे मैंने प्यार किया था।”
रिंकू ने मुस्कुराते हुए कहा, “और अब मैं वही बनने की कोशिश कर रहा हूँ।”
बात करते हुए वे बिस्तर पर चले गए। पूनम बिस्तर पर लेट गई, रिंकू ने उसका तौलिया हटा दिया। उसने हाथ उसके पेट पर फिराया । पूनम उत्सुकता से उसकी अगली कार्रवाई का इंतजार कर रही थी। उसे याद था कि वह हमेशा उसकी टांगें खोलता, लिंग डालता फिर योनि को भरता और सो जाता । उसे उसकी इच्छाओं और संतुष्टि की कभी परवाह नहीं थी। यह सब बहुत समय से चल रहा था l
रिंकू ने उसकी योनि को देखा और कहा, “आज यह बहुत सूदर लग रही है इसे चूसने को मन कर रहा हैं।”
पूनम मुस्कुराई और बोली, “वह लंबे समय से आपकी चुंबन का इंतजार कर रही है। “
रिंकू ने अपनी जीभ को योनि के पास ले गया और उसके भगशेफ को चाटने लगा। पूनम आनंद मे चिलाई । रिंकू ने थोड़ी देर भगशेफ को चाटा। फिर उसने कहा, “क्या तुमको पसंद है या मैं कुछ और करने की कोशिश करू ?”
“तुम बिल्कुल अच्छा कर रहे हो। मैं आनंद से मरी जा रही हूँ। करते रहो ,प्रिय।”
रिंकू ने फिर चाटना शुरू कर दिया। यह पूनम के लिए एक सपने जैसा था। कुछ मिनट बाद पूनम ने कहा, “रुको प्रिय, मेरे होंठ प्यासे हैं।”वह बिस्तर से उठी, पहले उसने लिंग को थोड़ा मालिश किया फिर अपने मुंह में ले लिया और चाटने लगी।
“मुझे नहीं पता था कि तुम यह इतनी अच्छी तरह से कर सकती हो।” रिंकू ने धीरे से कहा। पूनम ने थोड़ी देर तक चाटा, “अब यह बहुत कठोर है, इसे मेरी योनि में डाल दो, मैं अब अंदर चाहती हूँ।”
रिंकू ने वही किया जो वह चाहती थी। यह वह रात थी जिसका पूनम लंबे समय से इंतजार कर रही थी। आज वे वास्तव में एक साथ सोए।