प्यासी नौकरानी हीरी - भाग 8
वे होटल की बड़ी पार्किंग में रुके। राजन ने जानकी का हाथ पकड़ लिया। जानकी का शरीर कांप उठा। वह बस मुस्कुराई। वे होटल के अंदर चले गए। राजन ने रिसेप्शनिस्ट से कुछ बात की। फिर वे बाहर निकले और होटल के पूल और बगीचे में घूमने लगे। जानकी के लिए सब कुछ सपने जैसा था। वह बहुत शांत थी और राजन के साथ चल रही थी। राजन ने अभी भी उसका हाथ पकड़ रखा था। जानकी, “क्या तुमने कभी तैरने की कोशिश की है?”
जानकी मुस्कुराई और बोली, “हां, जब मैं छोटी बच्ची थी। हम अक्सर अपनी गली में बारिश के पानी में तैरने की कोशिश करते थे।” वे हंस पड़े।
“हां, मैंने भी ऐसा किया था। बहुत मज़ा आता था । बाद में मैंने एक स्कूल में तैरना सीखा।” राजन ने कहा l
वे कुछ देर चले। राजन ने जानकी से कहा कि इस बगीचे में शादी की पार्टियाँ आयोजित की जाती हैं। हमें इसे पहले से बुक करना होगा क्योंकि बहुत से लोग इस बगीचे को चाहते हैं। अगर उसे पसंद आए तो हम होटल मैनेजर से बात कर सकते हैं। जानकी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे। उसने कहा, “सर, आप बेहतर जानते हैं। बगीचा बहुत सुंदर है।”
“जी जानकी। चलो उनके रेस्टोरेंट और खाने की लिस्ट देख लेते हैं।” वे रेस्टोरेंट में गए और एक तरफ की टेबल पर बैठ गए। कुछ मिनट बाद वेटर आया। राजन ने कुछ स्नैक्स और नमकीन ऑर्डर किए। उसने वाइन भी मंगवाई। “सर, आप दिन में भी वाइन पीते हैं?”
“नहीं जानकी। तुम पहली बार मेरे साथ बाहर आई हो । मैं चाहता हूँ कि हम साथ में थोड़ी वाइन चखें। नशे में धुत होने के लिए नहीं, बस मजे के लिए।”राजन मुस्कुराया।
“लेकिन मैंने इससे पहले कभी शराब नहीं पी है, सर। क्या आप सचमुच चाहते हैं कि मैं इसे चखूँ?” जानकी ने सावधानी से पूछा। उसे अपनी माँ की कही बात याद थी । वह हमेशा कहती थी कि राजन की बात मानो।
शाम ढल रही थी। सूरज की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थी। बात करते-करते जानकी ने दो गिलास शराब पी ली। उसकी आँखों और बातों से पता चल रहा था कि वह थोड़ी नशे में थी। राजन समझ गया कि अब आगे बढ़ने का समय है। उसने फिर से जानकी का हाथ पकड़ा और कहा, “चलो जानकी , पार्टी हॉल और कुछ कमरे देखते हैं।” वह जानकी को एक कमरे में ले गया। जानकी को पूरी तरह से समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। वह बस राजन के साथ चल रही थी।
उसने चारों ओर कमरा देखा, सुंदर कमरा था, बड़ा बिस्तर l
“सर हम यहाँ क्यों आए?” उसने बिस्तर पर बैठते हुए पूछा l
“प्रिय ,मुझे लगता है आपको थोड़ा आराम करने की जरूरत है।”
जानकी मुस्कुराई फिर बिस्तर पर लेट गई, उसकी आँखें थोड़ी बंद हो रही थीं, वह नशे में थी। राजन उसके पास बिस्तर पर बैठ गया, उसने अपना हाथ उसके पैरों पर रखा और टांगो पर फेराने लगा l वह बहुत शांत थी l
धीरे-धीरे राजन ने अपना हाथ उसकी जांघ के पास ले गया। जानकी मुस्कुराई और बोली, “सर, आप क्या कर रहे हैं?मुझे शादी से पहले ऐसी चीजें पसंद नहीं हैं।”